Latest Updates
-
8 या 9 अगस्त, कामिका एकादशी कब है? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
National Handloom Day: अपने वॉर्डरोब में शामिल करें ये 7 मशहूर हैंडलूम साड़ियां, हर मौके पर मिलेगा शाही लुक -
80 की उम्र में अकेले जिंदगी जी रही हैं उषा नाडकर्णी, बेटा नहीं मानता मां, एक्ट्रेस ने बयां किया अपना दर्द -
National Handloom Day: जम्मू-कश्मीर से तमिलनाडू तक, जानें भारत में किस राज्य का कौन सा हथकरघा उत्पाद है मशहूर -
Rabindranath Tagore Death Anniversary: आज है रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्य तिथि, यहां जानिए उनके अनमोल विचार -
विटामिन K की कमी हो सकती है शरीर के लिए घातक, जानें इसके लक्षण और फूड सोर्स -
Steel Vs Glass Container: स्टील या ग्लास कंटेनर, किसमें खाना स्टोर करना है ज्यादा सुरक्षित? जानें एक्सपर्ट से -
सावन में जन्मे बेटे को दें भगवान शिव से जुड़े ये यूनिक नाम, यहां देखें अर्थ सहित 100+ मॉर्डन नामों की लिस्ट -
Lock Upp 2 Winner: 'लॉक अप 2' की विनर बनीं श्रेया कालरा, जानें रोडीज से ट्रॉफी तक का सफर और कितनी है नेट वर्थ -
Gujarat Chandipura Virus: गुजरात में चांदीपुरा वायरस से 22 बच्चों की मौत, जानें इसके लक्षण और बचाव
अनचाही प्रेगनेंसी और एसटीडी से बचाता है फीमेल कंडोम, जाने फायदे और नुकसान
अनचाही प्रेगनेंसी से बचने के लिए बात जब महिला बर्थ कंट्रोल की आती है तो ज्यादातर महिलाएं या तो गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करती हैं या कुछेक आईयूडी (इन्ट्रयूटरिन कॉन्ट्रसेप्टिव डिवाइस) Intrauterine contraceptive device का इस्तेमाल करती है। इसके अलावा महिलाओं के लिए एक ओर आसान सा बर्थ कंट्रोल का तरीका है, वो है फीमेल कंडोम। लेकिन, ज्यादात्तर महिलाएं शर्म और जानकारी के अभाव में इस तरीके को अपनाने से बचती है।
आप अगर गर्भनिरोधक गोलियां नहीं खाना नहीं चाहतीं तो फीमेल कंडोम आपके लिए बेस्ट ऑप्शन है। अगर आप इसे यूज करना चाहती है तो हम आपको बता रहे हैं फीमेल कॉन्डम यूज करने के फायदे और नुकसान।

शुरुआत में लग सकता है असहज
अगर आप पहली बार फीमेल कंडोम यूज करने जा रही है तो याद रखिए, शुरू-शुरू में आप काफी असहज महसूस कर सकती हैं लेकिन जब आप नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करने लगेंगी तो धीरे धीरे आपको यह काफी सुविधाजनक लगने लगेगा। इसके अलावा फीमेल कंडोम, पुरुषों द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले कंडोम की तुलना में काफी पतले होते हैं और ये लेटेक्स से नहीं बल्कि नाइट्राइल से बने हुए होते हैं।

यौन संचारित रोगों से करता है बचाव
कई शोध में ये बात सामने आई है कि फीमेली कंडोम से एचआईवी संक्रमण के खतरे को 94-97 फ़ीसदी कम कर सकता है। जबकि मेल कंडोम एचआईवी के खतरे को 80-95 फ़ीसदी कम करता है। इसका मतलब ये हुआ कि अगर महिलाओं को इसके इस्तेमाल का सही तरीका बताया जाए, तो काफी हद तक यौन संचारित रोगों से बचा जा सकता है।

टैम्पून की तरह किया जाता है इस्तेमाल
जिस तरह से टैम्पून को वजाइना के अंदर इंसर्ट किया जाता है, ठीक उसी तरह फीमेल कंडोम को यूज किया जाता है। इसे प्राइवेट पार्ट के अंदर इंसर्ट किया जाता है। फीमेल कंडोम के इनर रिंग को अंदर की ओर जबकि आउटर रिंग को बाहर की ओर रखा जाता है। एक बार जब आपका कंडोम गर्भाशय तक पहुंच जाता है तब आपको बिल्कुल अहसास नहीं होगा कि आपने कंडोम पहन भी रखा है। अगर इसे पहनने के बाद आपको लगता है कि आपके वजाइना के अंदर कुछ है तो इसका मतलब है कि सही ढंग से कंडोम नहीं लगाया है। इसके लिए कंडोम को फिर से निकालें और दोबारा अन्दर डालें।

कंडोम निकालते हुए बरतें सावधानी
इंटरकोर्स के बाद महिलाओं कंडोम निकालते हुए थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। कंडोम निकालते हुए इसका आउटर रिंग पकड़ें और उसे मोड़ कर बाहर निकालें साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि सीमेन कंडोम में ही रहे कहीं से लीक न हो। अब कंडोम को निकालकर बाहर फेंक दें। पुरुषों की ही तरह फीमेल कंडोम को भी सिर्फ एक ही बार प्रयोग में लाया जा सकता है।

फीमेल कंडोम लगाने के नुकसान
- फीमेल कंडोम को लगाना ही सबसे बड़ी परेशानी होती है, इसलिए इसे पहनते हुए महिलाओं को विशेष ध्यान देना चाहिए।
- फीमेल कंडोम वैसे तो मजबूत होता है लेकिन अगर इसे सही तरीके से इस्तेमाल न किया जाए तो यह फट भी सकता है।

खर्चीला हो सकता है
- सेक्स के दौरान ये थोड़ा डिस्ट्रैक्टिंग होता है कई लोंगो का कहना है कि इसे लगाने के बाद सेक्स करते वक्त इसमें से क्रैक या पॉप जैसी आवाजें आती हैं, जिससे आप का पूरा ध्यान सेक्स से हट कर इसकी ओर चला जाता है जो कि काफी डिस्ट्रैक्टिंग होता है।
- कम डिमांड की वजह से फीमेल कंडोम्स मार्केट में बहुत उपलब्ध हैं और ये बहुत ही मंहगे मिलते हैं।



Click it and Unblock the Notifications