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जॉब के प्रेशर के वजह से युवा हो रहे हैं बर्नआउट के शिकार, एक्सपर्ट ने बताया कैसे मैनेज करें वर्क स्ट्रेस
World Mental Health 2024: हाल ही में दो मामले सामने आए थे, जिसमें पुणे की एक महिला सीए की वर्कलोड अधिक होने के कारण जान चली गई। वहीं दूसरी और लखनऊ में एक प्राइवेट बैंक की महिला अधिकारी भी काम के प्रेशर की वजह से चल बसी। कई सर्वे में भी यह बात सामने आ चुकी हैं कि छोटी से लेकर मल्टीनेशनल कंपनियों तक में काम करने वाले 18 से 24 साल के युवा बर्नआउट का ज्यादा शिकार हो रहे हैं।
जब इस बारे में हमने इस बारे में देहरादून स्थित थ्राइविंग माइंड्स की फाउंडर और न्यूरो-साइकेट्रिस्ट डॉक्टर अंकिता प्रियदर्शिनी से बात की तो उन्होंने बताया कि कारपोरेट जगत में काम करने वालों के लिए वर्क प्रेशर एक सामान्य सी बात हो सकती है, मगर बर्नआउट की कंडीशन से बचने के लिए इसे मैनेज करना आना जरुरी है। ज्यादा वर्क स्ट्रेस मेंटल हेल्थ के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में उन्होंने वर्क स्ट्रेस की वजह और इसे मैनेज करने के तरीके भी बताएं।

क्या होता है बर्न आउट?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जब किसी भी काम के कारण हम दबाव महसूस करते हैं, तो इसे स्ट्रेस कहा जाता है। अगर यह स्ट्रेस नियंत्रण से बाहर होने पर टेंशन का रूप लेता है। अगर इस स्थिति में खाना-पीना छूट जाए, घबराहट, बेचैनी और अनिश्चितता बढ़ने लगे, तो इसे एंग्जाइटी कहा जाता है। जब स्ट्रेस का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाए और व्यक्ति थकावट, हर समय उदासी, और किसी काम में दिलचस्पी न दिखाएं, तो यह बर्नआउट हो सकता है।
साइकोलॉजी टुडे के अनुसार, बर्नआउट एक क्रॉनिक कंडीशन है, जिसका इलाज एक या दो दिन की छुट्टी या कुछ समय के लिए कम काम करने से नहीं हो सकता। बर्नआउट के बढ़ते मामलो को देखते हुए 2019 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे एक मेडिकल कंडीशन की श्रेणी में जगह दी है।
बर्न आउट के लक्षण
- काफी थका या शरीर में ऊर्जा न महसूस होना
- ऑफिस में काम करने के दौरान फोकस ना कर पाना।
- अक्सर काम करने के दौरान नकारात्मकता महसूस करना।
- प्रोडक्टिविटी में कमी आना
लॉकडाउन में वर्क फ्रॉम होम ने दिया वर्क प्रेशर को बढ़ावा
डॉक्टर अंकिता प्रियदर्शिनी बताती हैं कि लॉकडाउन से पहले इस के मामलों में कमी थी, लेकिन लॉकडाउन के दौरान और बाद में कर्मचारियों में वर्क प्रेशर की शिकायते बढ़ी हैं। पहले लोग ऑफिस में 9 से 6 की जॉब के बाद दोस्तों और परिवार के साथ क्वॉलिटी टाइम बिताते थे, जिसकी वजह से उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता था।
लाकॅडाउन में वर्क फ्रॉम कल्चर की वजह से कर्मचारियों में काम का प्रेशर बढ़ा है। क्योंकि कई ऑफिस मैनजमेंट को लगता है कि कर्मचारी घर पर ही तो है काम कर लेगा। इस वजह से व्यक्ति की पर्सनल लाइफ में प्रोफेशनल वर्क की दखलांदाजी बढ़ गई और वो परिवार से कटने लगा। काम की वजह से लोग न सिर्फ फैमिली बल्कि सेहत को भी अवॉइड करने लगे। नतीजन स्ट्रेस और एंग्जायटी जैसी शिकायतों में इजाफा होने लगा। लॉकडाउन के दौरान इस तरह के इंटरैक्शन कम हो गए, जिससे अकेलापन और मानसिक तनाव बढ़ने लगा।
ऑनलाइन मीटिंग्स ने बढ़ा दिया स्ट्रेस
लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन मीटिंग्स की संख्या भी बढ़ गई, जिससे कर्मचारियों को और अधिक काम के बोझ का सामना करना पड़ा। 24 घंटे में से ज्यादात्तर समय मीटिंग और ऑफिस लोगों में बर्नआउट की स्थिति पैदा कर देती है।
बर्न आउट का व्यक्ति के प्रोडक्टिविटी और सेहत पर असर
अत्यधिक वर्कलोड से कर्मचारी की प्रोडक्टिविटी कम हो सकती है, क्योंकि मानसिक और शारीरिक थकान से उसका ध्यान और काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। व्यक्ति जितना अधिक तनाव में होता है, उतना ही उसकी कार्यक्षमता पर असर पड़ता है। लंबे समय तक उच्च वर्कलोड के कारण व्यक्ति को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, और अन्य गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।
इन तरीकों से करें वर्क स्ट्रेस को मैनेज
डॉक्टर अंकिता प्रियदर्शिनी के अनुसार वर्क स्ट्रेस या बर्नआउट का कोई इलाज नहीं हैं। स्ट्रेस मैनेज, वर्कलाइफ मैनेज और मेंटल हेल्थ पर ध्यान देकर बर्नआउट की स्थिति को मैनेज किया जा सकता है।
- वर्क शेड्यूल बनाए और काम करने का समय का सही ढंग से मैनेज करें ताकि तनाव कम हो।
- नियमित अंतराल पर ब्रेक लें और आराम करें ताकि थकान से बचा जा सके।
- अगर तनाव बढ़ रहा है, तो मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेषज्ञ से सलाह लें या कॉउंसलिंग की मदद लें।
- नियमित व्यायाम और संतुलित आहार मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं।
- पूरे दिन लेपटॉप पर बिताने के बाद मोबाइल की स्क्रीन पर टाइम खराब न करें। इससे भी स्ट्रेस बढता है क्योंकि सोशल मीडिया में बहुत सारी चीजे झूठ होती है, ऐसे में टाइम खराब होता है।
- दोस्तों और परिवार संग समय बिताएं और वैकेशन पर जाएं।
- ऑफिस में कोई समस्या है, तो सीनियर से बात करें और अपनी समस्या से अवगत कराएं।
- अच्छी नींद लें और हेल्दी डाइट लें।
इस बार की विश्व मानसिक दिवस की थीम
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा हाल के वर्षों में कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताओं को देखते हुए विश्व मानसिक दिवस 2024 की थीम "Mental Health at the Workplace" को चुना गया है। इस थीम का उद्देश्य है कि वर्कप्रेशर को हावी होने की बजाय मेंटल हेल्थ को प्राथमिकता देना है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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