World’s Rarest Blood Group: दुनिया का दुर्लभ ब्लड, संसार में सिर्फ 43 लोगों की नसों में दौड़ता है ये अनमोल खून

World's Rarest Blood Group: आपने अब तक चार कॉमन ब्लड ग्रुप के बारे में जरूर सुना होगा - A, B, AB और O। इन्हीं के पॉजिटिव और नेगेटिव टाइप्स मिलाकर पूरी दुनिया के ज्यादातर लोगों का ब्लड कैटेगरी तय होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन सबके अलावा एक ऐसा ब्लड ग्रुप भी है जो इतना रेयर है कि पूरी दुनिया में अब तक सिर्फ 43 से 45 लोगों की नसों में ही पाया गया है? आपको ये सुनकर हैरानी तो जरूर हुई होगी की ऐसा कौन सा ब्लड ग्रुप है जो पूरी दुनिया में सिर्फ कुछ ही लोगों की रगों में है?

इस ब्लड ग्रुप की खास बात ये है कि वैज्ञानिकों ने भी इसे गोल्डन ब्लड ग्रुप का नाम दे दिया है, क्योंकि ये पूरी दुनिया में रेयर है। आइए जानते हैं कि कौन सा है गोल्डन ब्लड ग्रुप और इसकी खास बात क्या है? आइए इस दुर्लभ खून के बारे में जानते हैं।

World s Rarest Blood Group

क्या है गोल्डन ब्लड (Rh-Null)?

यह ब्लड ग्रुप इतना दुर्लभ है कि संसार में इस ब्लड ग्रुप के सिर्फ 40 से 45 लोग ही हैं। यही वजह हे कि इस ब्लड ग्रुप को वैज्ञानिकों ने Rh-Null गोल्डन ब्लड ग्रुप का नाम दिया गया। आप सोच तो रहे होंगे कि आखिर इस खून में ऐसा क्या है जो उसे दुर्लभ बनाता है। दरअसल, इस खून में सभी एंटीजन पूरी तरह गायब होते हैं। यही वजह है कि यह ब्लड किसी भी ब्लड ग्रुप को ट्रांसफ्यूज किया जा सकता है, यानी यह एक तरह से यूनिवर्सल डोनर की तरह काम करता है।

World s Rarest Blood Group

क्यों है यह इतना अनमोल?

- यूनिवर्सल कम्पैटिबिलिटी - गोल्डन ब्लड को लगभग हर ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को चढ़ाया जा सकता है।

- रेयर से भी रेयर - ये ब्लड ग्रुप इतना रेयर है कि पूरी दुनिया में सिर्फ 40 से 45 लोगों की रगों में पाया गया है।

- वैज्ञानिक रिसर्च के लिए खजाना - इस ब्लड ग्रुप की मदद से रिसर्चर कई जटिल बीमारियों और जेनेटिक सीक्रेट्स को समझ सकते हैं।

दिल्ली में भी है इस ब्लड ग्रुप की एक महिला

रिपोर्ट के अनुसार, देश की राजधानी दिल्ली में भी एक महिला की रगों मे Rh-Null ब्लड ग्रुप पाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये महिला दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आई थी जहां डॉक्टरों ने उसके खून का सेंपल लिया। जब नतीजा आया तो वो हैरान रह गए।

इस ब्लड ग्रुप वालों को मुश्किलें क्यों आती हैं?

बेशक Rh-Null गोल्डन ब्लड ग्रुप वाले लोग खास होते हैं क्योंकि वो यूनिवर्सल डोनर होते हैं। मगर जिन लोगों की रगों में ये ब्लड पहुंचता है उनके लिए बहुत दिक्कतें होती हैं। दरअसल, मुसीबत के समय जिन लोगों का गोल्डन ब्लड होता है, उनके लिए किसी दूसरे डोनर से मैचिंग खून मिलना लगभग नामुमकिन होता है। इमरजेंसी के वक्त इनके लिए ब्लड ढूंढना डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। यही कारण है कि इसे सोने से भी ज्यादा कीमती माना जाता है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Desktop Bottom Promotion