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स्ट्रेस में न खाएं ये 6 फूड्स, इन्हें खाने से बिगड़ सकता है स्ट्रेस लेवल
स्ट्रेस आज के समय में हर सभी के जीवन का हिस्सा बन चुका है। अमूमन इसे हम अपने ओवर वर्कलोड से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, इसमें आपका खानपान एक बहुत महत्वपूर्ण रोल निभाता है। आपको शायद पता ना हो, लेकिन ऐसे कई फूड्स होते हैं, जिनके लगातार सेवन से आपका स्ट्रेस बद से बदतर होता चला जाता है। इसलिए इन फूड्स से आपको थोड़ी दूरी बनानी चाहिए।
खानपान आपके शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। ऐसे में आपके खान-पान की चीजों का चयन आपकी ओवर ऑल हेल्थ को इंपेक्ट करता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ फूड्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें स्ट्रेस लेवल को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार माना जा सकता है-

चीनी
अमूमन यह देखने में आता है कि स्ट्रेस में होने पर हमें कंफर्ट फूड या शुगरी आइटम्स खाने की इच्छा अधिक होती है। दरअसल, स्ट्रेस में होने पर हमारा शरीर हार्मोन कोर्टिसोल छोड़ता है, जो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकता है। ऐसे में अगर शुगरी फूड का सेवन किया जाता है तो इससे शुगर लेवल और भी ज्यादा बढ़ जाता है। जिसके बाद ऊर्जा के लेवल में एकदम से कमी आ सकती है और आपका तनाव बढ़ सकता है। इतना ही नहीं, चीनी मैग्नीशियम के अवशोषण को भी डिस्टर्ब कर सकती है। इसलिए भी स्ट्रेस में होने पर चीनी से बचने की सलाह दी जाती है।
कैफीन
अमूमन हम चाय या कॉफी आदि लेना पसंद करते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह आपकी बॉडी को एनर्जी देता है। लेकिन वास्तव में अधिक मात्रा में कैफीन आपके शरीर के सेरोटोनिन के उत्पादन को कम करता है, जिसके परिणामस्वरूप आप खुद को डिप्रेस्ड महसूस करते हैं। इतना ही नहीं, इससे आपकी नींद में परेशानी उत्पन्न होती है। इससे भी आपका तनाव बढ़ने लगता है। इसलिए यह कहा जाता है कि अगर आप स्ट्रेस में हैं तो आपको कैफीन के सेवन से बचना चाहिए या फिर इसका सेवन बेहद ही मिनिमम करना चाहिए।
अल्कोहल
अमूमन लोग जब स्ट्रेस में होते हैं तो वे अल्कोहल का सेवन करना अधिक पसंद करते हैं। हालांकि, ऐसा करने से उनका तनाव कम होने के स्थान पर और भी अधिक बढ़ने लगता है। दरअसल, अल्कोहल आपके मूड को नियंत्रित करने वाले एक न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन के उत्पादन में हस्तक्षेप कर सकता है। ऐसे में जब आपकी बॉडी में सेरोटोनिन का लेवल कम होता है, तो इसके कारण आपको एंग्जाइटी और स्ट्रेस जैसी फीलिंग्स हो सकती हैं। इसलिए अल्कोहल का सेवन पूरी तरह से बंद कर देना ही सेहत के लिए अच्छा माना जाता है।

हाई फैट फूड्स
अगर आप स्ट्रेस से जूझ रहे हैं तो ऐसे में हाई फैट फूड्स खाने से आपकी समस्या और भी ज्यादा बढ़ सकती है। दरअसल, हाई फैट फूड्स भी सेरोटोनिन के उत्पादन में हस्तक्षेप कर सकते हैं, जिससे आपको अधिक तनाव महसूस होता है। इसलिए कुछ वक्त के लिए इनसे बचना ही अच्छा उपाय है।
नॉन-डेयरी क्रीमर
नॉन-डेयरी क्रीमर अक्सर ट्रांस फैट से भरे होते हैं, जो एलडीएल अर्थात् बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं और एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं। ट्रांस फैट को डिप्रेशन और एंग्जाइटी से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए बेहतर होगा कि नॉन-डेयरी क्रीमर को दूध, मलाई, बादाम का दूध या सोया दूध से स्विच करें।

टोमैटो केचप
अधिकतर लोग सोचते हैं कि टोमैटो केचप को टमाटर से बनाया जाता है। लेकिन इसमें टमाटर के अलावा भी बहुत कुछ है। यानी इसमें ढेर सारी चीनी का इस्तेमाल किया जाता है। कई बार इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर को भी शामिल किया जाता है और यह एंग्जाइटी व डिप्रेशन आदि की समस्या को बद से बदतर बना सकते हैं। ऐसे में बेहतर होगा कि आप बाजार में मिलने वाले टोमैटो केचप को इस्तेमाल करने के बजाय घर का बना टमाटर साल्सा ट्राई करें। अगर चाहें तो अपनी डिश के टेस्ट को बढ़ाने के लिए थोड़ी सी काली मिर्च डालें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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