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Yoni Mudra Benefits : फर्टिलिटी से लेकर सेक्स लाइफ को बेहतर बनाती है ये मुद्रा, इसे करने का तरीका जानें
Yoni Mudra: योग न सिर्फ कई तरह की बीमारियों से बचने में मदद करता है बल्कि शरीर को फिट भी रखता है। इसलिए समय-समय पर हम आपको ऐसे योग के बारे में बताते हैं जो आपकी रोजमर्रा की समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकते हैं। आज हम आपको एक ऐसी योग मुद्रा के बारे में बता रहे हैं जो महिलाओं के प्रजनन तंत्र और सेहत से संबंधित हैं।
हम बात कर रहे हैं योनि मुद्रा की। महिलाओं के मासिक धर्म से जुड़ी सभी समस्याओं का इलाज है योनि मुद्रा। यह मुद्रा महिला प्रजनन प्रणाली को दुरुस्त रखने में मदद करती है। जानिए क्या है इसे करने का तरीका।

योनि मुद्रा का अर्थ
योनि मुद्रा एक ऐसी तकनीक है जो महिला रिप्रोडक्टिव अंग या गर्भ का प्रतिनिधित्व करती है। योनि मुद्रा संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बनी है, 'योनि' का अर्थ है 'गर्भ' जो महिला के रिप्रोडक्टिव सिस्टम को दर्शाता है और 'मुद्रा' का अर्थ है 'हाथ की उंगलियों और अंगूठे का इशारा'। हिंदू धर्म में, योनि मुद्रा स्त्री शक्ति को समर्पित है। योनि मुद्रा गर्भ की "रचनात्मक शक्ति' को जन्म देती है। इसलिए, योनि मुद्रा, किसी सुप्रीम पॉवर की तरह आपको शक्ति देती है।
महिलाओं में रिप्रोडक्टिव सिस्टम में सुधार के लिए इस मुद्रा को किया जा सकता है। इस मुद्रा के अभ्यास से पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम, हाइपोथायरायडिज्म, हृदय रोग, प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ-साथ मस्तिष्क पर भी सकारात्मक प्रभाव डालने में मदद करता है। महिला का प्रजनन अंग यानि गर्भ। मुद्रा का अर्थ है एक ही स्थिति को बनाए रखना। जिस प्रकार गर्भ में बच्चा बाहरी दुनिया से अलग शांत रहता है ठीक वैसे ही इस मुद्रा को करने वाले भी बाहरी दुनिया से कट जाते हैं।
प्रजनन तंत्र संबंधी परेशानियों को करे दूर
योनि मुद्रा महिलाओं को गर्भ से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या जैसे माहवारी के दौरान दर्द, कंसीव करने में दिक्कत आदि को दूर करती है। अगर इस मुद्रा को सही प्रकार से किया जाए तो हमारे प्रजनन तंत्र से संबंधित सभी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है। यह मुद्रा योनि अर्थात प्रजनन तंत्र में लाभकारी है।
तनाव करे कम
योनि मुद्रा करते समय ध्यान पूरा क्रिया पर होता है। हम बाहरी दुनिया से कट जाते हैं। इसलिए तनाव कम होता है। तो वहीं, चिंता, चिड़चिड़ापन, गुस्सा आदि को भी यह मुद्रा दूर करती है। इस मुद्रा को करने से रासायनिक स्राव होता है। साथ ही साथ जिसके कारण हमें सकारात्मक व तनावमुक्त महसूस होता है। यह मुद्रा शरीर से विषैल पदार्थों को भी बाहर निकलती है। पूरा शरीर तनावमुक्त होता है। यह मुद्रा हमारे तंत्रिका तंत्र के लिए भी बहुत फायदेमंद है। यह हमारी एकाग्रता को बढ़ाता है। साथ ही साथ हमें आंतरिक शांति भी प्रदान करती है।
कैसे करें ये योगा?
- इसे करने के लिए सुखासन में बैठ जाएं।
- अब अंगूठे और तर्जनी को छोड़कर सभी उंगलियों को आपस में फंसा लें।
- तर्जनी और अंगूठे को एक साथ लाएं।
- गर्भ के ऊपर एक त्रिभुज बनाएं और उंगलियों को नीचे की ओर रखें।
- अब आंखें बंद कर लें और श्वास को देखें।
- प्राणायाम को शामिल करें।
- सांस को अपनी नाक से भरते हुए अपनी मध्यमिका से नाक को अगल-बगल से बंद कर दें। सांस को अपनी क्षमता के अनुसार रोकें व कुछ समय पश्चात ओम का जाप करते हुए धीरे से सांस को बाहर छोड़ दें।
- इसमें आप भंवरे की तरह हमिंग साउंड या कंपन भी कर सकते हैं। इसमें आपको अपने पूरे चेहरे पर कंपन महसूस होगी।
- धीरे से फिर से सामान्य मुद्रा में वापस आ जाएं।
- शुरुआत में किसी की देखरेख में करें। अपनी क्षमता के अनुसार मुद्रा करते समय रुकें।
किसे और कब इस मुद्रा को नहीं करना चाहिए?
- मानसिक स्वास्थ्य में गड़बड़ी का सामना कर रहे लोगों को इसका अभ्यास करने से बचना चाहिए।
- सुबह के समय योनि मुद्रा को करें। अपनी सुविधानुसार कभी भी योग नहीं करना चाहिए।
- हमेशा शांत वातावरण में मुद्रा को करें।
- कुछ खाने या पीने के तुरंत बाद इस मुद्रा का अभ्यास न करें क्योंकि इससे पाचन क्रिया पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
- अगर आपको पीठ और घुटनों में दर्द या फिर रीढ़ की हड्डी से जुड़ी कोई बीमारी है तो ज्यादा देर तक इस मुद्रा का अभ्यास न करें।
एक्सपर्ट इसे सुबह और दिन के समय करने और लंबे समय तक बनाए रखने की सलाह देते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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