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Chhath Puja Me Hair Cut: छठ व्रत के दौरान बाल कटवाना चाहिए या नहीं? जानें क्या कहता है वैदिक ज्योतिष
Chhath Puja Me Hair Cut: वैदिक ज्योतिष में कई ऐसी बातें बताई गयी है जिनका हम दैनिक जीवन में पालन करते हैं और बड़े बुजुर्गो के मुताबिक़ पालन करना भी चाहिए क्योंकि इनके पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक कारण भी है।
कई बार आपको कुछ करने की मनाही भी है और उसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण ना भी मिले तो ये आस्था का विषय है। अगर आपकी आस्था है तो पालन करें वरना आपकी इच्छा है।

पर्व त्यौहार में बाल कटवाने चाहिए या नहीं?
पर्व त्यौहार में सज धज के पारंपरिक वेशभूषा में सुन्दर दिखना हर महिला चाहती है। ये सदियों से चला आ रहा है। लेकिन बदलते समय के अनुसार फैशन भी बदलता है और कई बार मॉडर्न चीजों या तरीकों को अपनाते समय दुविधा होती है कि क्या ये करना धर्मसम्मत है? ऐसी ही एक दुविधा है जो खासतौर पर महिलाओं में देखने को मिलती है कि महिलाओं को पर्व त्यौहार में बाल कटवाने चाहिए या नहीं? बाल ट्रिम कराके नयी लुक में इम्प्रेशन ज़माना हर महिला चाहती है लेकिन वैदिक ज्योतिष इसके बारे में अलग सलाह देता है।
सबसे पहले तो सुहागिन महिलाओं को बाल नहीं कटवाना चाहिए। लेकिन अगर कटवाना ही हो तो वो दिन बता देते हैं जब बाल कटवाना या धोना बुरा नहीं होता। वो दिन है तृतीया, पंचमी, सप्तमी, नवमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी और पूर्णिमा। इन दिनों में अगर आप चाहे तो बाल ट्रिम करवा सकते हैं।

छठ पर्व में बाल कटवा सकते हैं या नहीं?
किसी त्यौहार या सांस्कृतिक ओकेजन से पहले बाल कटवाना हो तो ये तिथि देख लें। इसके अलावा अगर कोई व्रत, पर्व या त्यौहार जिसका धार्मिक महत्व हो उस समय सुहागिन महिलाओं को बाल नहीं कटवाना चाहिए।
छठ पूजा ने त्यौहार का रूप ले लिया है लेकिन वास्तव में ये एक पूजा है जिसमें व्रती कठिन व्रत करते हैं और वो भी निर्जला। इस दौरान मन में छठी माता के लिए पूरी श्रद्धा रखनी होती है। यह व्रत पूजा सज धज कर दूसरों को इम्प्रेस करने के लिए नहीं बल्कि अपनी सादगी और सुहागिनों के लिए बताये गए श्रृंगार के साथ छठी माता को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इसलिए नाहाय खाय के दिन बाल धो लेना चाहिए लेकिन कटवाना नहीं चाहिए।
नहाय खाय से लेकर पारण तक बाल बिलकुल ना कटवाएं। बाकि सुहागिन वाला श्रृंगार करने से मनाही नहीं है वो किया जा सकता है। व्रती नहाय खाय से पहले बाल कटवा लें या फिर पारण के बाद कटवाएं। व्रत के दौरान सादगी बरतें और छठी माता का स्मरण करते रहें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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