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खूबसूरत अंडों और टेस्टी व्यंजनों का त्योहार ईस्टर
ईस्टर, ईसाइयों का बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। गुड फ्राईडे के दो दिन बाद ईस्टर मनाया जाता है। ईसाई धार्मिक ग्रन्थ के अनुसार प्रभु यीशु को जब सूली पर लटका कर मारा गया था, तब वह तीन दिन के बाद फिर से जी उठे थे। इसलिये इस खुशी के मौके को ईस्टर दिवस या ईस्टर रविवार कह कर बुलाया जाता है।
ईस्टर संडे को ईसाई समुदाय के लोग गिरजाघरों में इकट्ठा होते हैं और जीवित प्रभु की आराधना (उपासना) स्तुति करते हैं और ईसा मसीह के जी उठने की खुशी में प्रभु भोज में भाग लेते हैं और एक-दूसरे को प्रभु ईशु के नाम पर शुभकामनाएँ देते हैं।

40 दिन के लेंट के कठिन व्रत के बाद ईस्टर का यह त्योहार लोगों में खुशियां बिखेर देता है। ईस्टर के महीने में यूरोप के ज्यादातर बाजार बाज़ार रंग बिरंगे ईस्टर अंडों से सजे रहते हैं। चाकलेट, गत्तो और फूलों से बने स्वादिष्ट ईस्टर खरगोश भी बच्चों को लुभाते हैं। लोगों को अपने परिवार और दोस्तों से मिलने का मौका मिलता है और हर कोई चॉकेलट, कैंडी और तरह-तरह के व्यंजनों का स्वाद चखते हैं।
पूरे अंग्रेजी भाषी दुनिया के क्षेत्र में ईस्टर एक ही तरीके से मनाया जाता है और इसके मनाये जाने के तरीके में बहुत मामूली अंतर पाया जाता है। ईस्टर के एक दिन पहले घर के बडे़ शनिवार रात को रंग बिरंगे और सुंदरता से सजाए हुए अंडो को घरों के कोनों या बाहर बगीचे में छिपा देते हैं। और फिर रविवार की सुबह बच्चे इन अंडों को ढूँढ़ते हैं।
नीदरलैंड, बेल्जियम और फ्रांस में ईस्टर के पहले के एक या अधिक दिनों तक शोक संकेत के रूप में गिरिजाघर की घंटियाँ मौन रहती हैं। इन घंटियों को संडे के दिन खूब बजाया जाता है।



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