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जगन्नाथ मंदिर का वो भोग, जिसे इंसान नहीं... भूत-प्रेत खाते हैं! जानें 'अधर पाना' का होश उड़ाने वाला रहस्य
Jagannath Rath Yatra 2026: उड़ीसा के पुरी में हर साल जून के महीने में जगन्नाथ रथ यात्रा का महाउत्सव मनाया जाता है। इस यात्रा में देश-विदेश से लोग शामिल होने के लिए आते हैं। ये रथ यात्रा जितनी अद्भुत है उतनी ही रहस्यमयी भी है। इस रथ यात्रा में वैसे तो कई सारी अनोखी रस्में निभाई जाती है जिसमें से एक है 'अधर पाना' रस्म, जिसे लेकर ऐसा कहा जाता है कि भगवान को चढ़ाए इस भोग को इंसान नहीं बल्कि भूत-प्रेत ग्रहण करते हैं। आइए इस रस्म के बारे में विस्तार से जानते हैं।

जगन्नाथ मंदिर की 'अधर पाना' रस्म क्या है?
सबसे पहले ये जानते हैं कि जगन्नाथ पुरी की ये 'अधर पाना' रस्म आखिर है क्या? दरअसल, ये रस्म भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के अंतिम चरण में होने वाली एक विशेष धार्मिक परंपरा है। इस रस्म में पुजारियों के द्वारा भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों पर विशाल मिट्टी के घड़ों में विशेष मीठा जल जिसे पाना कहा जाता है अर्पित किया जाता है। इस जल में दूध, छेना, केला, चीनी, मसाले, नारियल और अन्य पवित्र सामग्री मिलाई जाती हैं।
इस रस्म का नाम क्यों पड़ा 'अधर पाना'?
आपने ये तो जान लिया कि 'अधर पाना' रस्म क्या होती है? अब क्या आपके जेहन में ये सवाल नहीं उठ रहा कि इस रस्म को 'अधर पाना' रस्म क्यों कहा जाता है? संस्कृत में 'अधर' का अर्थ है होंठ होता है और 'पाना' का अर्थ है पेय। ऐसे में इस रस्म को पुरा करने के लिए विशाल घड़े इतने ऊंचे बनाए जाते हैं कि उनका ऊपरी हिस्सा भगवान के होंठों के पास तक पहुंचता है। इसी कारण इस रस्म को 'अधर पाना' कहा जाता है।
क्या सच में यह भोग इंसान नहीं बल्कि भूत-प्रेतों के लिए होता है?
ऐसा कहा जाता है कि 'अधर पाना' रस्म का भोग इंसानों के लिए नहीं होता है। धार्मिक मान्यत है कि जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा के दौरान भगवान के साथ अनेक अदृश्य देवता, यक्ष, गंधर्व, भूत-प्रेत और सूक्ष्म शक्तियां भी यात्रा में शामिल होती हैं। माना जाता है कि ये दिव्य शक्तियां पूरे उत्सव के दौरान भगवान की सेवा और रक्षा करती हैं। इसलिए भगवान की सेवा में शामिल होने की वजह से उन्हें भी प्रसाद का एक अंश 'अधर पाना' के द्वारा दिया जाता है ताकि वे प्रसन्न होकर अपने लोक लौट जाएं और किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

भोग चढ़ाने के बाद घड़े क्यों तोड़ दिए जाते हैं?
जब 'अधर पाना' रस्म निभाई जाती है तो उसके बाद मिट्टी के बड़े-बड़े विशलकाय घड़ों को तोड़ दिया जाता है। इसके पीछे की मान्यता ये है कि घड़ों को जमीन पर फोड़ देने से सारा पेय जमीन पर फैल जाता है और अदृश्य आत्माएं उस भोग को प्रसाद के रूप में ग्रहण करती हैं। इसके बाद रथ यात्रा की धार्मिक प्रक्रिया पूर्ण मानी जाती है।



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