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Karwa Chauth 2025 : करवा चौथ व्रत के दिन सुहागिनें पानी पी सकती है या नहीं? क्या है नियम
Is Drinking Water Allowed on Karwa Chauth 2025 : भारत में करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए सूर्योदय से लेकर चंद्रमा के दर्शन तक निर्जला उपवास रखती हैं।
करवा चौथ की विशेषता यह है कि इस व्रत में पूरे दिन अन्न और जल का त्याग किया जाता है। लेकिन अक्सर महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि करवा चौथ व्रत के दौरान पानी पीना चाहिए या नहीं? आइए जानते हैं परंपरा, मान्यता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसका उत्तर।

करवा चौथ व्रत की परंपरा
करवा चौथ का व्रत केवल भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में रहने वाली भारतीय महिलाएँ भी आस्था और श्रद्धा के साथ रखती हैं। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार यह व्रत निर्जला ही किया जाता है यानी न तो अन्न ग्रहण किया जाता है और न ही पानी। ऐसा माना जाता है कि निर्जला व्रत रखने से पति की आयु में वृद्धि होती है और दांपत्य जीवन सुखमय बनता है। यही कारण है कि अधिकांश महिलाएँ इस व्रत में पानी तक ग्रहण नहीं करतीं।
क्या व्रत में पानी पी सकते हैं?
शास्त्रों में करवा चौथ को कठोर तपस्या के समान माना गया है। इस दिन व्रती महिला को सूर्योदय से पहले 'सरगी' ग्रहण करने की परंपरा है। सरगी में फल, मिठाई, मेवे और हल्का भोजन शामिल होता है ताकि दिनभर उपवास रखने में कठिनाई न हो। सरगी के बाद से चंद्रमा निकलने तक महिलाएँ जल भी ग्रहण नहीं करतीं।
हालांकि, कुछ जगहों पर प्रचलित मान्यताओं और व्यक्तिगत स्वास्थ्य कारणों से महिलाएँ केवल पानी या फलाहार ग्रहण करके भी व्रत करती हैं। इसे उपवास का सरल रूप कहा जा सकता है।
धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ का व्रत जितना कठिन होगा, उतना ही फलदायी माना जाता है। इसलिए जल त्याग करना इस व्रत की प्रमुख शर्त है। पौराणिक कथाओं में भी उल्लेख है कि इस व्रत को निर्जला रखा जाना चाहिए। जब तक चंद्रमा को छलनी से देखकर अर्घ्य नहीं दिया जाता, तब तक व्रती महिला को जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो निर्जला उपवास शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया को बढ़ाता है। एक दिन का उपवास पाचन तंत्र को आराम देता है और मानसिक धैर्य बढ़ाता है। हालांकि, लंबे समय तक जल न पीना शरीर को डिहाइड्रेशन की ओर ले जा सकता है। इसलिए स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर अक्सर सलाह देते हैं कि यदि किसी महिला को कमजोरी, लो ब्लड प्रेशर, मधुमेह या कोई अन्य समस्या है तो वह कम से कम पानी या नारियल पानी अवश्य ग्रहण करे।
क्या करें और क्या न करें
- यदि आप पूरी तरह स्वस्थ हैं और परंपरा का पालन करना चाहती हैं तो आप निर्जला व्रत रख सकती हैं।
- अगर स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या है तो बिना संकोच पानी पी सकते हैं। भगवान भाव और निष्ठा को ही देखते हैं।
- सरगी में हल्के और पौष्टिक भोजन लें ताकि दिनभर भूख-प्यास सहना आसान हो।
- दिनभर खुद को व्यस्त और शांत रखें ताकि व्रत रखने में कठिनाई महसूस न हो।
- तेज धूप या अधिक मेहनत वाले काम से बचें, क्योंकि निर्जला उपवास में शरीर जल्दी थक सकता है।



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