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Navratri Wishes In Sanskrit: संस्कृत के इन मंत्रों और श्लोकों से दें तीसरे नवरात्रि की शुभकामनाएं
Navratri 2026 Sanskrit Wishes: हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। यह पर्व मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की भक्ति और आराधना का प्रतीक है। पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च 2026 से होने जा रही है। वहीं, इसका समापन 27 मार्च को होगा। इन नौ दिनों में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं और मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए उपवास रखते हैं।
ऐसा माना जाता है कि नवरात्रि में सच्चे मन से पूजा-पाठ करने से माता अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। इस शुभ अवसर पर आप भी अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और प्रियजनों को संस्कृत में भी चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं भेज सकते है।

मां चंद्रघंटा मंत्र और संस्कृत श्लोक (अर्थ सहित)
ध्यान मंत्र:
पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।
(अर्थ: श्रेष्ठ सिंह पर सवार और चण्ड आदि शस्त्र धारण करने
वाली मां चंद्रघंटा मुझ पर अपनी कृपा करें।)
स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
(अर्थ: सभी प्राणियों में मां चंद्रघंटा के रूप में
स्थित देवी को मेरा बारंबार प्रणाम है।)
कल्याण मंत्र:
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
(अर्थ: हे नारायणी! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान
करने वाली मंगलमयी हैं, आपको नमस्कार है।)
शांति मंत्र:
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः। नवरात्रस्य पावनपर्वणि भगवती
चंद्रघण्टा भवतां जीवनं सुख-शांति-समृद्धिभिः पूरयतु।
(अर्थ: नवरात्रि के पावन पर्व पर भगवती चंद्रघंटा
आपके जीवन को सुख, शांति और समृद्धि से भर दें।)
शक्ति मंत्र:
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं चंद्रघण्टायै नमः। देवी चन्द्रघण्टा
भवतां सर्वान् भयानू दूरीकरोतु।
(अर्थ: देवी चंद्रघंटा आपके सभी भयों को दूर
करें और आपको शक्ति प्रदान करें।)
नवरात्रि तृतीया: भक्तिपूर्ण शुभकामनाएँ
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा आपके द्वार आएं, खुशियों का अंबार लाएं
और आपके जीवन से सभी बाधाओं को मिटा दें।
आपके और आपके परिवार को चैत्र नवरात्रि की अनंत शुभकामनाएं।
देवी चंद्रघंटा का मस्तक पर अर्धचंद्र इस बात का प्रतीक है कि जीवन
में कितनी भी उथल-पुथल हो, मन में शीतलता बनी रहनी चाहिए।
मां आपको अपार धैर्य और साहस दें। शुभ नवरात्रि!
सिंह पर सवार मां चंद्रघंटा का तेज आपके चेहरे पर झलके,
उनकी शक्ति आपके इरादों में दिखे और उनकी दया आपके व्यवहार में रहे।
नवरात्रि का यह तीसरा दिन आपके लिए मंगलमय हो।
पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।
अर्थ: श्रेष्ठ सिंह पर सवार और चण्ड आदि शस्त्र धारण
करने वाली मां चंद्रघंटा मुझ पर अपनी कृपा करें।
सरल ध्यान मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
अर्थ: जो देवी सभी प्राणियों में मां चंद्रघंटा
के रूप में स्थित हैं, उन्हें मेरा बारंबार प्रणाम है।
शक्ति मंत्र:
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः।
(इस मंत्र का जाप भक्तों के सभी कष्टों को हर लेता है।)
चैत्रनवरात्रस्य तृतीयादिने सर्वभक्तवृन्दाय
देवी चंद्रघण्टायाः शुभाशीर्वादाः अनन्तशुभकामनाश्च।
अर्थ: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन सभी भक्तों को
देवी चंद्रघंटा का आशीर्वाद और अनंत शुभकामनाएं।
नवरात्रस्य पावनपर्वणि भगवती चंद्रघण्टा
भवतां जीवनं सुख-शांति-समृद्धिभिः पूरयतु।
अर्थ: नवरात्रि के पावन पर्व पर भगवती चंद्रघंटा
आपके जीवन को सुख, शांति और समृद्धि से भर दें।
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
तृतीया नवरात्रस्य शुभाशयाः।
अर्थ: सभी मंगलों में मंगल करने वाली,
मां चंद्रघंटा आपको हर कार्य में सफलता दें।
देवी चन्द्रघण्टा भवतां सर्वान् भयानू दूरीकरोतु,
शक्तिं च ददातु। शुभं नवरात्रम्!
अर्थ: देवी चंद्रघंटा आपके सभी भयों को दूर
करें और आपको शक्ति प्रदान करें। शुभ नवरात्रि!
भवतां उपरि मां चंद्रघण्टायाः शुभाशीर्वादाः सदैव तिष्ठन्तु।
अर्थ: आप पर मां चंद्रघंटा का आशीर्वाद सदैव बना रहे।
हृदयस्पर्शी संस्कृत कोट्स और स्टेटस (Sanskrit Status for Social Media)
"साहसं धैर्यं च ददातु देवी चन्द्रघण्टा।" (
देवी चंद्रघंटा हमें साहस और धैर्य प्रदान करें।)
"नवरात्रं शुभप्रदं भवतु।"
(यह नवरात्रि आपके लिए शुभ फल देने वाली हो।)
"शक्तिमयी मां चंद्रघण्टा रक्षतु त्वाम्।"
(शक्तिमयी मां चंद्रघंटा आपकी रक्षा करें।)
"देवी प्रसादेन सर्वे सिध्यन्तु कामाः।"
(देवी की कृपा से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हों।)
पापान्निवारयति योजयते हिताय,
गुह्यं निगूहति गुणान् प्रकटीकरोति।
आपद्गतं च न जहाति ददाति काले,
सन्मित्रलक्षणमिदं प्रवदन्ति सन्तः।।
हिंदी अर्थ: सच्चा मित्र वह है जो मित्र को पाप से रोकता है, हित के कार्यों में लगाता है, उसकी गोपनीय बातों को छुपाता है, उसके गुणों को प्रकट करता है, विपत्ति आने पर साथ नहीं छोड़ता और समय आने पर सहायता करता है। सज्जन पुरुष अच्छे मित्र के यही लक्षण बताते हैं।
न च संकुचितं प्रेम, न च मे हृदयं द्विधा।
तव विरहेऽपि हे प्राण, त्वमेव मम देवता।।
त्वयि मे मरणं मोक्षः, त्वयि मे जीवनं तपः।
यत्र यत्र गमिष्यामि, तत्र त्वां हि स्मराम्यहम्।।
हिंदी अर्थ: मेरा प्रेम संकुचित (कम) नहीं है और न ही मेरा हृदय दो भागों में बंटा है। हे प्राण! तुम्हारे विरह में भी तुम ही मेरे देवता हो। तुम्हारे साथ मरना भी मोक्ष है और तुम्हारे बिना जीना भी तपस्या है। मैं जहाँ कहीं भी जाऊँगा, वहीं तुम्हें याद करूँगा।
विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्,
विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः।
विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परा देवता,
विद्या राजसु पूज्यते न तु धनं विद्याविहीनः पशुः।।
हिंदी अर्थ: विद्या मनुष्य का वास्तविक रूप (सुंदरता) है, यह अत्यंत सुरक्षित गुप्त धन है। विद्या भोग, यश और सुख देने वाली है। विद्या गुरुओं की भी गुरु है। विदेश जाने पर विद्या ही सबसे बड़ी मित्र है। राजाओं के यहाँ विद्या पूजी जाती है, धन नहीं। जिसके पास विद्या नहीं, वह पशु के समान है।
परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः, परोपकाराय वहन्ति नद्यः।
परोपकाराय दुहन्ति गावः, परोपकारार्थमिदं शरीरम्।।
न कश्चित् कस्यचिन्मित्रं न कश्चित् कस्यचिद्रिपुः।
स्वार्थेन संप्रवर्तन्ते, लोकाः स्वार्थपरायणाः।।
हिंदी अर्थ: परोपकार के लिए ही वृक्ष फल देते हैं, परोपकार के लिए नदियाँ बहती हैं और परोपकार के लिए ही गायें दूध देती हैं। यह मनुष्य शरीर भी परोपकार के लिए ही है। यद्यपि संसार स्वार्थ पर चलता है, पर उत्तम जन का जीवन दूसरों की सेवा में ही सार्थक है।
निन्दन्तु नीतिनिपुणा यदि वा स्तुवन्तु,
लक्ष्मीः समाविशतु गच्छतु वा यथेष्टम्।
अद्यैव वा मरणमस्तु युगान्तरे वा,
न्याय्यात्पथः प्रविचलन्ति पदं न धीराः।।
हिंदी अर्थ: नीति में निपुण लोग चाहे निंदा करें या स्तुति, लक्ष्मी (धन) आए या अपनी इच्छा से चली जाए, मृत्यु आज ही हो या युगों के बाद- धैर्यवान पुरुष कभी भी न्याय के मार्ग से अपने कदम पीछे नहीं हटाते।



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