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Periods Me Pradosh Vrat: क्या पीरियड्स में रख सकते हैं प्रदोष व्रत? जानें शास्त्रों के नियम और पूजा विधि
Periods Me Pradosh Vrat Ke Niyam: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को शत्रुओं पर विजय और कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। हर माह कि त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है जो महीने में दो बार यानी शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों में आता है। महादेव की भक्ति में लीन रहने वाली कई महिलाएं हर महीने इस व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ रखती हैं। लेकिन कई बार व्रत के दिन या उससे ठीक पहले मासिक धर्म (Periods) शुरू हो जाता है, जिससे मन में कई सवाल और शंकाएं पैदा होने लगती हैं।
क्या अशुद्धि की स्थिति में महादेव का व्रत रखना चाहिए? क्या बीच में पीरियड्स आने से व्रत टूट जाता है? और सबसे महत्वपूर्ण बिना मंदिर जाए और बिना मूर्ति छुए अपनी पूजा को कैसे सफल बनाएं? इन सभी सवालों से महिलाएं घिरी रहती हैं। अगर आपके भी यही सवाल हैं तो हम लेकर आए हैं उनके जवाब, आइए जान लेते हैं कि पीरियड्स के दौरान व्रत रख सकते हैं या नहीं और हां तो क्या हैं उसके नियम...

क्या पीरियड्स में प्रदोष व्रत रखना चाहिए? (Can we fast during periods?)
पहले समय में कहा जाता था कि पीरियड्स के दौरान महिलाएं अशुद्ध मानी जाती हैं। ऐसे में इस समय उन्हें न तो पूजा-पाठ करने की आज्ञा थी और न ही मूर्ति छूने व मंदिर में जाने की परमिशन। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, यदि आपने पहले से प्रदोष व्रत रखने का संकल्प लिया है, तो मासिक धर्म आने पर भी आप व्रत (उपवास) जारी रख सकती हैं। व्रत रखने में कोई मनाही नहीं है, क्योंकि व्रत मन और संकल्प की शक्ति है। हालांकि, इस दौरान मंदिर जाने और पूजा की सामग्री छूने की मनाही होती है।
अगर बीच में पीरियड्स शुरू हो जाएं, तो क्या व्रत टूट जाता है?
अक्सर महिलाएं डर जाती हैं कि यदि दोपहर या शाम को पीरियड्स शुरू हुए तो क्या व्रत बेकार हो गया? इसका जवाब है जी नहीं। यदि व्रत शुरू करने के बाद मासिक धर्म आता है, तो आपका व्रत खंडित नहीं माना जाता। आप उपवास पूरा करें, बस भगवान की प्रतिमा को स्पर्श न करें।
पीरियड्स में कैसे करें प्रदोष काल की पूजा?
चूंकि प्रदोष व्रत में शाम की पूजा (प्रदोष काल) का विशेष महत्व है, इसलिए पीरियड्स में आप ये विकल्प चुन सकती हैं:
किसी और से पूजा करवाएं: आप अपने घर के किसी सदस्य या पंडित जी से अपने नाम की पूजा और दीपदान करवा सकती हैं।
मानसिक पूजा (Manas Puja): दूर बैठकर भगवान शिव का ध्यान करें और मन ही मन 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें। मन की पूजा श्रेष्ठ मानी गई है।
व्रत कथा सुनें: आप मोबाइल या किताब (किसी और से पकड़वाकर) के माध्यम से प्रदोष व्रत की कथा सुन सकती हैं।
मंदिर जाने और दान-पुण्य के नियम
मासिक धर्म के दौरान मंदिर के गर्भ गृह में जाना वर्जित माना गया है। यदि आप दान करना चाहती हैं, तो सीधे हाथों से दान न देकर किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से दान करवा सकती हैं। यह नियम अनुशासन और मर्यादा के लिए बनाए गए हैं, न कि भक्ति को रोकने के लिए।
अशुद्धि के बाद शुद्धिकरण
मासिक धर्म समाप्त होने के बाद आमतौर पर 5वें या 7वें दिन स्नान करके शुद्ध हो जाएं। इसके बाद ही आप मंदिर जाकर शिवलिंग का अभिषेक कर सकती हैं और अपना व्रत पूर्ण रूप से उद्यापन या समापन की ओर ले जा सकती हैं।



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