Latest Updates
-
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें -
Hindi Journalism Day: 30 मई को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
Kumaoni Sweet Bal Mithai Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड की पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई -
महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है हलीम के बीज, अनियमित पीरियड्स समेत इन 5 समस्याओं को कर सकते हैं दूर -
गर्मियों में पसीने से होने वाली 5 कॉमन स्किन प्रॉब्लम्स, एक्सपर्ट से जानें इन समस्याओं से बचने के घरेलू उपाय -
World Digestive Health Day: क्यों मनाया जाता है विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस? जानें इस दिन का महत्व और इतिहास -
Grandma Style Aloo Baingan Recipe: दादी के हाथों जैसा चटपटा और लाजवाब स्वाद -
क्या ज्यादा तनाव लेने से ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है? AIIMS न्यूरोसर्जन ने बताई सच्चाई -
June 2026 Vrat Tyohar: निर्जला एकादशी से लेकर वट पूर्णिमा तक, जून के महीने में आएंगे ये प्रमुख व्रत-त्योहार
मंदिर के शिखर पर ध्वज क्यों लगाया जाता है? जानें इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
Ram Mandir Dhwajarohan 2025: आखिरकार लंबे इंतजार के बाद 25 नवंबर 2025 का शुभ दिन आ गया है, जब अयोध्या के भव्य राम मंदिर के मुख्य शिखर पर धर्म ध्वज फहराया गया। यह क्षण न सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था, भावनाओं और परंपरा का भी प्रतीक है। लंबे समय से इस शुभ दिन का इंतजार किया जा रहा था और जोर-शोर से ध्वजारोहण की तैयारी चल रही थी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है आखिर मंदिर की छत या शिखर पर ध्वज क्यों लगाया या फहराया जाता है? बता दें कि इसका उत्तर हमें रामायण, रामचरितमानस और प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।
आइए आपको भी बताते हैं कि मंदिर की छत पर ही ध्वज क्यों लगाया जाता है। साथ ही आज हुए अयोध्या राम मंदिर ध्वजारोहण व ध्वज पर अंकित कोविदार के वृक्ष की खास बातों पर भी एक नजर डालते हैं।

5 प्वाइंट में जानें क्यों मंदिर के शिखर पर लगाया जाता है ध्वज
1. देव उपस्थिति का पवित्र संकेत
हिंदू धर्म में मंदिर के शिखर पर लगाया गया ध्वज यह दर्शाता है कि यहां ईश्वर का निवास है। गरुड़ पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि शिखर पर लगा ध्वज देवताओं की उपस्थिति और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। यह बताता है कि इस स्थान पर भगवान की ऊर्जा सक्रिय है।
2. दिव्य और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का मार्ग
मंदिर का शिखर एक ऊंचा, पवित्र और ऊर्जा-संचारी बिंदु माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा सबसे पहले शिखर पर ही एकत्रित होती है और वहां लगा हुआ ध्वज उस ऊर्जा को सक्रिय रखता है। साथ ही ध्वज हवा के साथ लहरता है तो वह पॉजिटिव वाइब्रेशन पैदा करता है जिससे मंदिर परिसर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती रहती है।
3. मंदिर निर्माण की पूर्णता का प्रतीक
जब किसी भी मंदिर का निर्माण पूरा हो जाता है, तभी उसके मुख्य शिखर पर ध्वजारोहण किया जाता है। यह इस बात का संकेत है कि मंदिर का कार्य अब पूर्ण हो चुका है भगवान विधिपूर्वक यहां विराजमान हैं और मंदिर पूजा-अर्चना के लिए तैयार है। राम मंदिर में आज होने वाला ध्वजारोहण भी इसी पूर्णता और शुभारंभ का प्रतीक है क्योंकि आज अयोध्या राम मंदिर का निर्माण पूरी तरह से संपन्न हो चुका है।
4. नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा करता है
धार्मिक मान्यता है कि किसी मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज मंदिर को और उसके आस-पास के क्षेत्र को नकारात्मक शक्तियों, अशुभ प्रभावों और दुष्प्रभावों से रक्षा करता है। इसे मंदिर का आकाशीय कवच भी माना जाता है, जो भक्तों और परिसर दोनों को सुरक्षा प्रदान करता है।
5. भक्तों के लिए आस्था और पहचान का प्रतीक
ध्वज देखकर ही दूर से पता चल जाता है कि वहां मंदिर है। हवा में लहराता ध्वज हर भक्त को यह संदेश देता है कि यहां भगवान विराजमान हैं, यहां शांति, भक्ति और आध्यात्मिकता का स्थल है। इसलिए ध्वज को भक्ति का जीवंत प्रतीक कहा जाता है।
कोविदार वृक्ष का महत्व
आज अयोध्या राम मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ध्वजारोहण किया गया। इस दौरान उन्होंने ध्वज के केंद्र में अंकित कोविदार वृक्ष के बारे में भी बात की और उसके महत्व को समझाया। दरअसल, कोविदार वृक्ष भारतीय संस्कृति, आयुर्वेद और धार्मिक परंपराओं में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वृक्ष को पवित्रता, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। प्राचीन ग्रंथों में इसे "औषधियों का खजाना" कहा गया है, क्योंकि इसकी पत्तियां, छाल, फूल और फल सभी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं।
आयुर्वेद में कोविदार का उपयोग मुख्य रूप से पाचन शक्ति सुधारने, सूजन कम करने, त्वचा रोगों को ठीक करने और शरीर को डिटॉक्स करने के लिए किया जाता है। इसके फूलों को उपवास और धार्मिक प्रसादों में भी विशेष स्थान प्राप्त है। कोविदार वृक्ष को देवी-देवताओं को अर्पित करने पर सौभाग्य तथा सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने का भी विश्वास है। यही कारण है कि इसे भारतीय मंदिर वास्तुकला और धार्मिक पौराणिक कथाओं में भी विशेष रूप से उल्लेखित किया गया है।



Click it and Unblock the Notifications