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Ramadan 2026 Chand Raat Live: रमजान के चांद का हुआ दीदार, पढ़ें की खास दुआ, जानें इफ्तार और सहरी का समय
Ramadan 2026 Chand Raat Dua In India Live: दुनिया भर के मुसलमानों के लिए साल का सबसे मुकद्दस (पवित्र) महीना रमजान-ए-पाक दस्तक दे रहा है। 17 फरवरी को सऊदी अरब में चांद रात के बाद 19 फरवरी को पहला रोजा रखा गया। अब 18 फरवरी की शाम भारत में चांद का दीदार हो गया है, तो कल 19 फरवरी 2026 को पहला रोजा रखा जाएगा। चांद नजर आते ही मस्जिदों में तरावीह की गूंज शुरू हो गई है, लेकिन इबादत की इस शुरुआत में सबसे अहम है 'चांद देखने की दुआ' जो हर मुसलमान को पढ़नी चाहिए।
शरीयत के अनुसार, नया चांद देखकर अल्लाह का जिक्र करना न केवल सुन्नत है, बल्कि यह पूरे महीने की खैर-ओ-बरकत का जरिया भी है। आइए जानते हैं भारत में चांद रात की ताजा स्थिति, चांद देखने की सही दुआ और पहले रोजे के लिए दिल्ली, मुंबई और लखनऊ समेत बड़े शहरों का मुकम्मल टाइम-टेबल।

क्यों होता है रमजान का चांद देखना इतना अहम?
इस्लाम में रमजान का महीना चांद के दिखाई देने के बाद ही तमाम धार्मिक कृत्यों के साथ शुरू होता है। यह केवल एक प्राकृतिक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि अल्लाह की ओर आध्यात्मिक समर्पण और आत्म-अनुशासन का प्रतीक है। इसी चांद के साथ रोजों, तरावीह और जकात जैसी महान इबादतों का सिलसिला शुरू होता है।
आज भारत में नजर आएगा रमजान का चांद?
साऊदी अरब में कल यानी 17 फरवरी 2026 को रमजान का चांद नजर आ चुका है यानी चांद रात हो चुकी है। अब भारत और उसके आसपास के देशों में भी रमजान का चांद नजर आ चुका है। अब 19 फरवरी को भारत में चांद के दीदार बाद रोजे की शुरूआत हो जाएंगी। शहर वाइज जान लें चांद कब कितने बजे दिखाई दिया है-
| जिला | चांद दिखाई देने का समय | जिला | चांद दिखाई देने का समय |
| आगरा | 18:43 | अलीगढ़ | 18:41 |
| अंबेडकर नगर | 18:36 | अमेठी | 18:37 |
| अमरोहा | 18:44 | औरैया | 18:42 |
| अयोध्या | 18:36 | आजमगढ़ | 18:34 |
| बागपत | 18:46 | बहराइच | 18:38 |
| बलिया | 18:33 | बलरामपुर | 18:39 |
| बांदा | 18:43 | बाराबंकी | 18:37 |
| बरेली | 18:39 | बस्ती | 18:37 |
| भदोही | 18:35 | बिजनौर | 18:45 |
| बदायूं | 18:41 | बुलंदशहर | 18:42 |
| चंदौली | 18:34 | चित्रकूट | 18:43 |
| देवरिया | 18:34 | एटा | 18:42 |
| इटावा | 18:43 | फर्रुखाबाद | 18:41 |
| फतेहपुर | 18:39 | फिरोजाबाद | 18:43 |
| गौतम बुद्ध नगर | 18:45 | गाजियाबाद | 18:46 |
| गाजीपुर | 18:33 | गोंडा | 18:38 |
| गोरखपुर | 18:35 | हमीरपुर | 18:44 |
| हापुड़ | 18:45 | हरदोई | 18:39 |
| हाथरस | 18:42 | जालौन | 18:44 |
| जौनपुर | 18:34 | झांसी | 18:45 |
| कन्नौज | 18:41 | कानपुर देहात | 18:42 |
| कानपुर नगर | 18:42 | कासगंज | 18:42 |
| कौशांबी | 18:39 | कुशीनगर | 18:34 |
| लखीमपुर खीरी | 18:39 | ललितपुर | 18:46 |
| लखनऊ | 18:38 | महाराजगंज | 18:35 |
| महोबा | 18:44 | मैनपुरी | 18:43 |
| मथुरा | 18:44 | मऊ | 18:33 |
| मेरठ | 18:46 | मिर्जापुर | 18:35 |
| मुरादाबाद | 18:44 | मुजफ्फरनगर | 18:46 |
| पीलीभीत | 18:40 | प्रतापगढ़ | 18:37 |
| प्रयागराज | 18:38 | रायबरेली | 18:38 |
| रामपुर | 18:43 | सहारनपुर | 18:48 |
| संभल | 18:44 | संत कबीर नगर | 18:36 |
| शाहजहांपुर | 18:41 | शामली | 18:47 |
| श्रावस्ती | 18:39 | सिद्धार्थनगर | 18:37 |
| सीतापुर | 18:39 | सोनभद्र | 18:36 |
| सुल्तानपुर | 18:37 | उन्नाव | 18:40 |
| वाराणसी | 18:34 |
चांद देखने पर पढ़ें ये मसनून दुआ (Dua for Sighting the Moon)
अल्लाह के रसूल (स.अ.व.) जब भी नया चांद देखते थे, तो यह दुआ पढ़ते थे। चांद नजर आते ही इसे पढ़ना अफजल माना गया है:
अरबी: اللَّهُمَّ أَهِلَّهُ عَلَيْنَا بِالْأَمْنِ وَالْإِيمَانِ، وَالسَّلَامَةِ وَالْإِسْلَامِ، رَبِّي وَرَبُّكَ اللَّهُ
Allahumma Ahlilhu Alaina Bill Yumni Wal-Iman, Was-Salamati Wal Islam, Rabbi wa Rabbuk Allah
हिन्दी तर्जुमा: "ऐ अल्लाह! इस चांद को हमारे ऊपर अमन, ईमान, सलामती और इस्लाम के साथ निकाल। (ऐ चांद) मेरा और तेरा रब अल्लाह है।"
दुआ पढ़ने के फायदे और रूहानी सुकून
उलेमा फरमाते हैं कि जो शख्स नए महीने की शुरुआत अल्लाह के जिक्र से करता है, अल्लाह ताला उसके पूरे महीने के कामों में आसानी पैदा फरमा देता है। यह दुआ हमें आने वाले कठिन रोजों के लिए मानसिक और रूहानी तौर पर तैयार करती है।
सहरी और इफ्तार का संभावित समय (Sehri & Iftar Timing 2026)
पहले रोजे (19 फरवरी 2026) के लिए भारत के प्रमुख शहरों में संभावित समय इस प्रकार है:

| शहर | सहरी (Sehri) | इफ्तार (Iftar) |
| दिल्ली (Delhi) | 05:25 | 18:15 |
| लखनऊ (Lucknow) | 05:12 | 18:02 |
| मुंबई (Mumbai) | 05:48 | 18:40 |
दुआ पढ़ने का सही तरीका और सुन्नत (Step-by-Step)
दुआ की कबूलियत के लिए अदब का ख्याल रखना जरूरी है:
चांद की तरफ देखना: जब चांद नजर आए, तो अपना चेहरा उस ओर रखें।
किबला-रू होना: यदि संभव हो, तो काबा की ओर रुख करके खड़े होना बेहतर है।
हाथ उठाकर मांगना: पूरी तवज्जो के साथ हाथ उठाएं और अल्लाह से आने वाले महीने की सलामती मांगें।
दुरूद शरीफ: दुआ के शुरू और आखिर में दुरूद शरीफ पढ़ना कबूलियत की गारंटी माना जाता है।



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