हलहारिणी अमावस्या 2021: जानें इस साल कब है आषाढ़ अमावस्या, जब किसान करते हैं हल-खेत का पूजन

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि की काफी महत्ता है। धार्मिक दृष्टि से आषाढ़ महीने की अमावस्या तिथि को विशेष माना गया है। आषाढ़ महीने में आने वाली अमावस्या को अषाढ़ी अमावस्या और कई स्थानों पर हलहारिणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन खेती-किसानी करने वाले लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वो पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनके खेतों की हरियाली बनी रहे। जानते हैं साल 2021 में आषाढ़ अमावस्या अथवा हलहारिणी अमावस्या किस दिन है और इस दिन पूजा का मुहूर्त और विधि क्या है।

आषाढ़ अमावस्या की तिथि और शुभ मुहूर्त

आषाढ़ अमावस्या की तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के मुताबिक आषाढ़ मास साल का चौथा महीना है। साल 2021 में आषाढ़ महीने का प्रारंभ 25 जून से हो चुका है और आषाढ़ी अमावस्या 9 जुलाई, शुक्रवार को पड़ रही है।

अमावस्या तिथि प्रारंभ: 9 जुलाई को सुबह 5 बजकर 16 मिनट से

अमावस्या तिथि समापन: 10 जुलाई को सुबह 06 बजकर 46 मिनट तक

व्रत का पारण: 10 जुलाई को

आषाढ़ अमावस्या की पूजा विधि

आषाढ़ अमावस्या की पूजा विधि

आषाढ़ अमावस्या के दिन पवित्र नदी अथवा जलाशय या कुंड में स्नान करना लाभकारी होता है। यदि ऐसा करना संभव न हो तो घर पर ही गंगा जल की कुछ बूंदें मिलकर स्नान कर लें। इसके बाद जातक तांबे के पात्र में जल, लाल रंग का चंदन और लाल रंग के फूल डालकर सूर्य भगवान को अर्घ्य दें। इसके बाद अपनी क्षमता अनुसार जरुरतमंद को दान-दक्षिणा दें। इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपवास भी किया जाता है।

आषाढ़ अमावस्या का महत्व

आषाढ़ अमावस्या का महत्व

आषाढ़ अमावस्या का दिन किसानों के लिए बहुत मायने रखता है। इस दिन वो अपने हल और खेती में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करते हैं। आषाढ़ महीने के अंत में वर्षा ऋतु का आगमन हो जाता है। इस वजह से किसान भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनकी फसलों के लिए आने वाला ये मौसम अच्छा रहे। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और तर्पण करके पितरों के मोक्ष की कामना की जाती है।

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