आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2022: दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना

हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्रि में पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है और नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। कहते है इस दिन मां की व्रत कथा करने और पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ऐसी भी मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से तप, शक्ति ,त्याग ,सदाचार, संयम और वैराग्य में वृद्धि होती है। इस आर्टिकल में हम आपको मां ब्रह्मचारिणी की उत्पत्ति से जुड़े कुछ रोचक तथ्य बताने के साथ ही नवरात्र के दूसरे दिन के पूजा-विधान के बारे में बताने वाले है।

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मां ब्रह्मचारिणी तपस्या और अच्छे आचरण की देवी है

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यन्त भव्य है।

मां ब्रह्मचारिणी के हाथ में कमंडल और माला सुशोभित होते है

मां के दाहिने हाथ में जप की माला है और बायें हाथ में कमण्डल है तथा मान्यता ये है कि माता ब्रह्मचारिणी की पूजा और साधना करने से कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है। हिन्दु मान्यता के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी पर्वतराज हिमालय और मैना की पुत्री हैं, जिन्होंने भगवान नारद के कहने पर भगवान शंकर की ऐसी क न तपस्या की, जिससे खुश होकर ब्रह्माजी ने इन्हे मनोवांछित वरदान दिया, जिसके प्रभाव से ये भगवान शिव की पत्नी बनीं। मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को असंख्य लाभ देने में सक्षम है।

चक्र पर ध्यान लगाने से मिलता है आशीर्वाद

नवरात्रि के दूसरे दिन भक्त को ध्यान की स्थिति में बैठकर स्वाधिस्थाना चक्र की ओर अपन मन लगाना चाहिए। इस चक्र पर ध्यान केंद्रित करने वाला पूजक, देवी ब्रह्मचारिणी के स्नेह और आशीर्वाद के अलावा मनवांछित वस्तु प्राप्त करता है। मां ब्रह्मचारिणी के रूप में देवी का ये अवतार भक्त को असंख्य लाभ प्रदान करता है। इनकी पूजा करने से, सफलता और विजय की प्राप्ति की जा सकती है।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का शुभ मूहुर्त

अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:57 से दोपहर 12:53 तक।

नवरात्रि के दूसरे दिन के लिए मां ब्रह्मचारिणी का मंत्रः

ओम ब्रह्म ब्रह्मचारीनै नमः। इस मंत्र का 108 बार जाप करें।

दूसरे दिन का रंग - सफेद

दूसरे दिन का प्रसाद - शक्कर और बिना नमक का मक्खन

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