Latest Updates
-
Restaurant Style Egg Masala Gravy Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसा चटपटा अंडा मसाला -
International Yoga Day 2026: नाभि खिसकने पर करें ये 4 योगासन, मिलेगा तुरंत आराम -
कब से शुरू हो रहे हैं श्राद्ध? जानें तिथि, धार्मिक महत्व और पितरों के तर्पण की सही विधि -
जुलाई 2026 में कितने दिन बंद रहेंगे बैंक? यहां देखें स्टेट वाइज छुट्टियों की लिस्ट -
Restaurant Secret Amritsari Kulcha Recipe: घर पर बनाएं बाजार जैसा कुरकुरा कुलचा -
Father's Day 2026: पापा को स्पेशल फील कराने के लिए बेस्ट हैं ये शॉर्ट स्पीच और कविताएं, जो छू लेंगी दिल -
निर्जला एकादशी व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जान लें क्या कहते हैं शास्त्र और नियम -
इन 5 बीमारियों में भूलकर भी न खाएं काजू, स्वाद के चक्कर में बढ़ सकता है मर्ज -
UP Style Vegetable Pulao Tehri Recipe: घर पर बनाएं यूपी का मशहूर स्वाद -
Father's Day Sanskrit Wishes: पिता स्वर्गः पिता धर्मः, फादर्स डे पर संस्कृत संदेशों से जताएं प्यार और सम्मान
Bakrid 2022: बकरीद पर क्यों दी जाती है नर बकरे की कुर्बानी, ये है इससे जुड़ा इतिहास
मुस्लिम धर्म में बकरीद के त्योहार का बड़ा ही महत्व होता है। इस पर्व को ईद-उल-अजहा भी कहते हैं या और कुर्बानी का पर्व भी कहा जाता है। पवित्र माह रमजान के ठीक 70 दिन बाद बकरीद मनाई जाती है। वैसे तो बकरीद की तारीख चांद दिखने पर निर्धारित होती है, ऐसे में इस साल पूरे भारत में 10 जुलाई को बकरीद मनाई जाएगी।

कुर्बानी के इस त्योहार से जुड़ी कुछ खास बातें यहां हम आपको बताएंगे। तो चलिए जानते हैं क्या है बकरीद का इतिहास और कैसे मनाते हैं इस खास दिन को।
कैसे मनाते हैं बकरीद?
इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग ईदगाहों और मस्जिदों में जमात के साथ नमाज अदा करते हैं। सुबह नमाज अदा करने के साथ ही इस त्योहार की शुरुआत हो जाती है। लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के घर भी जाते हैं और एक दूसरे को मुबारकबाद देते हैं। इसके अलावा इस दिन घर पर एक से बढ़कर एक स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं।
ऐसे हुई कुर्बानी देने की शुरुआत
कहा जाता है कि पैगंबर हजरत इब्राहिम ने सबसे पहले कुर्बानी देने की शुरुआत की थी। कहते हैं एक बार अल्लाह ने उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी थी। तब पैगंबर हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया था क्योंकि उनका बेटा उन्हें सबसे ज्यादा प्यारा था। पैगंबर के इस फैसले से अल्लाह उनसे बेहद खुश हुए। जैसे ही वे अपने 10 साल के बेटे की कुर्बानी देने जा रहे थे अल्लाह ने उनके बेटे की जगह वहां एक बकरा भेज दिया। तब से बकरीद के दिन बकरे की कुर्बानी की परंपरा शुरू हो गई। इस दिन नर बकरे के अलावा ऊंट और भेड़ की भी कुर्बानी दी जा सकती है।

तीन हिस्सों में बांटा जाता है गोश्त
कुर्बानी देने के बाद गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। पहला हिस्सा रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों को दिया जाता है, वहीं दूसरा हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को बांट दिया जाता है। तीसरा और आखिरी हिस्सा परिवार के लिए रखा जाता है।
कुर्बानी के नियम
बकरीद पर कुर्बानी देने के लिए भी कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। इस दिन स्वस्थ्य पशु की ही कुर्बानी दी जाती है। इसके अलावा कुर्बानी का धन ईमानदारी से कमाया होना चाहिए। गलत तरीकों से कमाए हुए पैसों से कुर्बानी नहीं दी जाती है।
बकरीद का महत्व
कुर्बानी का यह त्योहार लोगों को सच्ची और नेक राह पर चलने की सीख देता है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से किसी जरूरतमंद की मदद करता है अल्लाह उसे जन्नत में जगह देते हैं। इसके अलावा व्यक्ति को अपना फर्ज़ नहीं भूलना चाहिए और उसे अपने परिवार के साथ अपने मुल्क की भी हिफाजत करनी चाहिए।



Click it and Unblock the Notifications