दिवाली 2018: भूल से भी किसी को ना दें ये तोहफें

Diwali: Gifts to Avoid | इस दिवाली भूल कर भी न दें ये तोहफें, हो सकता है अशुभ | Boldsky

हमारा भारत देश त्योहारों के लिए जाना जाता है और हर एक त्योहार का अपना एक अलग ही महत्व होता है चाहे वो कोई बड़ा पर्व हो या छोटा। इन्हीं में से एक है दीवाली का त्योहार।

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माने जाने वाला यह पर्व प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। सभी जाति के लोग इस त्योहार को पूरे हर्षोउल्लास के साथ मनाते हैं।

We Should Not Gift These Things On Diwali

रौशनी के इस पर्व के पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। उनमें से सबसे प्रचलित कथा श्री राम से जुडी हुई है। जब श्री राम दैत्य राजा रावण का वध करके और अपने चौदाह वर्षों का वनवास पूरा करके अयोध्या वापस लौटे थे तब उनके आगमन की ख़ुशी में अयोध्यावासियों ने पूरे राज्य में दीपक जलाकर अपनी खुशी व्यक्त की थी। तभी से दिवाली मनाने की परंपरा शुरू हो गयी।

इस बार दिवाली का त्योहार 7 नवंबर को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं दीपावली से जुड़ी कुछ अन्य पौराणिक कथाओं के बारे में।

13 वर्षों के वनवास के बाद लौटे थे पांडव

13 वर्षों के वनवास के बाद लौटे थे पांडव

जब शकुनी ने शतरंज के खेल में छल से पांडवों से उनका सब कुछ छीन लिया और उन्हें 13 वर्षों के वनवास पर जाना पड़ा तब उनके वनवास पूरा करके लौटने की ख़ुशी में लोगों ने चारों तरफ दिए जलाए थे।

श्री कृष्ण ने नरकासुर का किया था वध

श्री कृष्ण ने नरकासुर का किया था वध

एक अन्य कथा के अनुसार इसी दिन श्री कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। नरकासुर उस समय प्रागज्योतिषपुर (जो की आज दक्षिण नेपाल एक प्रान्त है) का राजा था। नरकासुर ने देवमाता अदिति के शानदार बालियों को छीन लिया। देवमाता अदिति श्री कृष्ण की पत्नी सत्यभामा की संबंधी थी। श्री कृष्ण ने नरकासुर से कुल 16 भगवान की कन्याओं को मुक्त कराया था।

माता लक्ष्मी हुई थीं प्रकट

माता लक्ष्मी हुई थीं प्रकट

पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी ने सृष्टि में अवतार लिया था। दिवाली मनाने का ये भी एक मुख्य कारण है।

मां आदिशक्ति ने धारण किया था महाकाली का रौद्र रूप

मां आदिशक्ति ने धारण किया था महाकाली का रौद्र रूप

कहते हैं जब असुरों का वध करने के बाद भी माता का क्रोध शांत नहीं हुआ था तब उन्होंने देवी काली का रूप धारण कर लिया था उनके क्रोध को शांत करने के लिए स्वयं भगवान शिव उनके चरणों के पास लेट गए थे जैसे ही माता ने उन्हें स्पर्श किया उनका क्रोध शांत हो गया इसलिए दिवाली पर उनके शांत रूप देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

दिवाली के आने से कुछ दिन पहले ही लोग अपने अपने अपने घरों की साफ़ सफाई पर विशेष ध्यान देते हैं फिर त्योहार वाले दिन अपने घरों को दिए और अन्य साज सजावट की वस्तुओं से सजाते हैं। इस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही लोग एक दूसरे के घर जाकर त्योहार की बधाइयां भी देते हैं। दिवाली पर एकदूसरे को लोग तरह तरह के उपहार भी देते हैं। लेकिन कई बार हम अनजाने में ही सही पर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को कुछ ऐसे तोहफे दे देते हैं जो न सिर्फ उनके लिए बल्कि हमारे लिए भी अशुभ माने जाते हैं। आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ उपहारों के विषय में बताएंगे जिन्हें भूलकर भी इस दिवाली आप अपने करीबियों को न दें। आइये जानते हैं कौन सी हैं वो चीज़ें।

भूलकर भी न दें इस दिवाली ये तोहफे

भूलकर भी न दें इस दिवाली ये तोहफे

चूँकि दीपावली का त्योहार माता लक्ष्मी से जुड़ा हुआ है इसलिए ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस दिन इन तोहफों को देने या लेने से लक्ष्मी जी अप्रसन्न होती हैं।

1. दिवाली के पहले धनतेरस की पूजा का भी बहुत महत्त्व है। यदि इस दिन आप किसी को कोई उपहार दे रहे हैं तो ध्यान रखें वह वस्तु अष्टधातु से बनी ना हो।

2. लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा या चित्र वाले उपहार किसी को न दें। इससे आप अपना सौभाग्य किसी और को दे देते हैं।

3. बर्तन आप उपहार में दे सकते हैं लेकिन उसमें पानी का गिलास और जग न हो।

4. सोने चांदी के बर्तन न दें।

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