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दिवाली 2018: क्यों जुड़ी है दिवाली पर दिये जलाने की परम्परा

रौशनी का पर्व दिवाली न सिर्फ अंधकार को दूर करता है बल्कि हमारे जीवन में सुख शांति और समृद्धि लाता है। इस त्योहार पर चारों ओर केवल जगमाती रौशनी ही दिखाई पड़ती है। इस दिन दीये जलाने की खास परंपरा है।

हालांकि आज के इस दौर में लोग तरह तरह की लाइटें, मोमबत्तियां आदि का प्रयोग करते हैं लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि दीये जलाने की इस परंपरा से धार्मिक पहलू भी जुड़ा हुआ है जिसके बारे में आज हम आपको बताएंगे।
दिवाली के इस त्योहार के पीछे कई सारी कथाएं प्रचलित है। आइए जानते हैं क्यों जलाए जाते हैं दिवाली पर दीये।

त्रेता युग में हुई दीये जलाने की शुरुआत
कहते हैं त्रेता युग में जब श्री राम माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ चौदह वर्षों का वनवास पूरा करके लौटे थे तब कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या थी। अयोध्या वासियों ने उनके आने की ख़ुशी में उनके रास्ते में पंक्तियों में दीप जलाए थे। दरअसल आवली का अर्थ होता है पंक्ति दीपावली दीप और आवली दोनों को मिलाकर बना एक शब्द है। उसी दिन से दीये जलाने की इस रिवायत का आग़ाज़ हुआ था और वो आज भी बदस्तूर जारी है।
इसके अलावा माना जाता है कि दिवाली पर दीये जलाने से माता लक्ष्मी और गणेश जी प्रसन्न होते हैं और अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। शास्त्रों में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि दीये जलाने से घर में शुभता आती है और वातावरण में सकारात्मकता बानी रहती है।

दीपावली पर होता है माँ लक्ष्मी का आगमन
दिवाली पर हम सब साफ़ सफाई पर ज़्यादा ध्यान देते हैं क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी हमारे घर पधारती है। लेकिन गंदगी वाले स्थान पर माता का वास कभी नहीं होता है। इसलिए दिवाली से पहले हम अच्छे से अपने घरों की साफ़ सफाई करते हैं। इसके अलावा इस दिन चारों ओर रौशनी होनी चाहिए। इसके लिए घर के हर कोने में हम दीये जलाते हैं क्योंकि अंधकार से देवी अप्रसन्न होती है और लौट जाती है।
माँ लक्ष्मी की पूजा में मिट्टी से बने दीये का ही प्रयोग करें।

घर के इन स्थानों में जलाएं दीये
जैसा कि हमने आपको बताया कि दीपावली पर दीये जलाने का विशेष महत्त्व होता है इसलिए आपको यह भी पता होना चाहिए कि इस दिन घर के किस किस कोने में दीपक जलाना बेहद ज़रूरी होता है। सबसे पहले माता लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति या चित्र के आगे दीया जलाएं। अब अपने कुलदेवी या देवता और माँ गंगा के नाम का दीपक जलाएं। इन दीयों को आप अपने घर के मंदिर में ही रख सकते हैं या फिर घर के आस पास बने किसी मंदिर में जाकर भी आप इनके नाम का दीपक जला सकते हैं।
उसके बाद घर के मुख्य द्वार, अन्य दरवाज़ों, खिड़कियों, बालकनी, छत पर भी दीपक जलाएं। आप पीपल के वृक्ष के पास भी दीया जलाकर रख सकते हैं। ऐसा करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
हमारे सभी पाठकों को हमारी ओर से दिवाली की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं।



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