जानिए क्‍यों हनुमान जी लगाते थे सिंदूर, हनुमान जी से जुड़े 5 रहस्‍य

Posted By: Parul Rohatgi
Subscribe to Boldsky

हिंदू धर्म में हनुमान जी एकमात्र ऐसे देवता है जो शीघ्र अपने भक्‍तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं। उनकी पूजा से भक्‍तों को शक्‍ति और साहस की प्राप्‍ति होती है। टीवी शोज़ की वजह से हम सभी हनुमान जी के बारे अधिकतर सब कुछ जानते हैं लेकिन फिर भी बजरंबग बली के बारे में कुछ ऐसे रहस्‍य हैं जिनसे हम अभी तक अनजान हैं।

हनुमान जी को भगवान शिव का अवतार कहा जाता है एवं वह शक्‍ति, भक्‍ति और दृढ़ता के प्रतीक हैं।

ब्रह्मा जी की न्‍याय सभा में अंजना नामक स्‍त्री को ऋषि से श्राप मिला था कि जब कभी भी वो किसी से प्रेम करेगी तो उसका मुख बंदर के समान हो जाएगा। बाद में उस स्‍त्री ने धरती पर जन्‍म लिया।

क्‍या आप जानते हैं कैसे हुआ है भगवान शिव का जन्‍म ?

तब अंजना को राजा केसरी से प्रेम हुआ जोकि स्‍वयं बंदरों के राजा थे। दोनों ने विवाह कर लिया। अंजना सच्‍चे मन से भगवान शिव की भक्‍ति करने लगी ताकि उसे पुत्र की प्राप्‍ति हो और ऋषि के श्राप से मुक्‍ति मिल जाए।

 शिव का अवतार

शिव का अवतार

राजा दशरथ ने पुत्र की प्राप्‍ति के लिए हवन का आयोजन किया था जहां ब्राह्मणों ने उन्‍हें अपनी सभी पत्‍नियों को खीर खिलाने के लिए दी थी। उनकी पहली पत्‍नी कौशल्‍या के पात्र की थोड़ी सी खीर एक पक्षी लेकर उड़ गया और ध्‍यान में लीन अंजना के पास पहुंचा। वायु व पवन देव ने इसे भगवान शिव का प्रसाद कहकर अंजना के हाथ में रख दिया। भगवान शिव का प्रसाद समझकर अंजना इसका सेवन कर लेती है और इस तरह भगवान शिव के अवतार हनुमान जी का जन्‍म होता है।

भगवान राम की दीर्घायु के लिए हनुमान जी लगाते थे सिंदूर

भगवान राम की दीर्घायु के लिए हनुमान जी लगाते थे सिंदूर

हनुमान जी, भगवान राम के परम भक्‍त हैं और माता सीता को सिंदूर लगाते देख हनुमान जी ने उनसे इसका कारण पूछा। तब सीता माता ने बताया कि वो भगवान राम की दीर्घायु के लिए सिंदूर लगाती हैं। ये सुनकर हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर ही सिंदूर लगा लिया।क्यों भरा जाता है मांग में सिंदूर, जानिए कब और कैसे हुई थी इसकी शुरुआत

मकरध्‍वज का जन्‍म

मकरध्‍वज का जन्‍म

ब्रह्मचारी होने के बाद भी हनुमान जी का मकरध्‍वज नामक पुत्र है जिसका जन्‍म मछली से हुआ था। लंका दहन के बाद हनुमान जी की पूंछ में आग लगी थी। जिसे बुझाने के लिए वो समुद्र में कुछ देर बैठ गए। तब उनके पसीने की एक बूंद उस समुद्र के मछली के पेट में चला गया। इस तरह मछली के पेट से मकरध्‍वज का जन्‍म हुआ।

 हनुमान जी ने भी लिखी थी रामायण

हनुमान जी ने भी लिखी थी रामायण

लंका युद्ध के बाद भगवान राम की सेवा के लिए हनुमान जी हिमालय पर चले गए। यहां पर उन्‍होंने हिमालय के पर्वत की दीवारों पर स्‍वयं की रामायण लिखी थी।

हनुमान जी के हैं 108 नाम

हनुमान जी के हैं 108 नाम

संस्‍कृत भाषा में हनुमान जी के 108 नाम हैं। उनमें से कुछ मारुति, अंजनेय, बजरंग बली, दीनबंधवे, कलनभा, महादूत, रामभक्‍त, सर्वग्रह, वागमिने और योगिनी आदि हैं।

For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    English summary

    Do You Know Why Lord Hanuman Rubbed Sindoor All Over His Body?

    What is the story associated with applying sindoor to Lord Hanuman and what is the importance of sindoor in Hanuman puja?
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Boldsky sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Boldsky website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more