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गुरु पूर्णिमा 2023: इन संदेशों, व्हाट्सऐप, फेसबुक और ग्रीटिंग्स के जरिए भेजें शुभकामनाएं
भारतीय संस्कृति में गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। आषाढ़ शुक्ल की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है और ये दिन गुरुजनों को ही समर्पित है। माना जाता है कि इसी दिन महर्षि व्यास धरती पर अवतरित हुए थे। महर्षि व्यास ज्ञान का सागर थे और वो गुरुओं के भी गुरु थे। गुरु का पूजन भारतीय संस्कृति और परंपरा में बहुत अहम माना गया है।
भारत की हजारों साल पुरानी ये रिवायत आज एक त्योहार का रूप ले चुकी है। व्यक्ति के जीवन में गुरु के महत्व और योगदान को कभी भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। गुरु का दिया ज्ञान ही इंसान के जीवन में सफलता की सीढ़ी बनती है। गुरु खुद एक मशाल की तरह जलकर अपने शिष्यों को आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है और अपने छात्रों की कामयाबी पर गौरान्वित होता है।

गुरु शिष्य के इस पर्व को मनाने के लिए महर्षि व्यास के अवतरण के मौके को चुना गया। गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की रचना करने के साथ वेदों का विन्यास भी किया था।
लोगों के जीवन में गुरु पूर्णिमा का दिन बहुत खास है। गुरु शिष्य के रिश्ते को समर्पित इस पर्व पर आप भी अपने शिक्षकों के प्रति अपना प्रेम और आदर दर्शना चाहते हैं तो ये मैसेजस, फेसबुक, व्हाट्सऐप और ग्रीटिंग्स भेजकर अपनी शुभकामनाएं दें।

1.
गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरः
गुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः

2.
गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।।

3.
तुमने सिखाया उंगली पकड़ कर हमें चलना,
तुमने बताया कैसे गिरने के बाद संभलना,
तुम्हारी वजह से आज हम पहुंचे इस मुक़ाम पे,
गुरु पूर्णिमा के दिन करते हैं आभार प्रणाम से।

4.
गुरुरादिरनादिश्च गुरुः परमदैवतम्।
गुरोः परतरं नास्ति तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

5.
गुरु आपके उपकार का,
कैसे चुकाऊं मैं मोल?
लाख कीमती धन भला...
गुरु हैं मेरा अनमोल।।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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