'गोविंदा आला रे' की गूंज इस साल रहेगी कम, मगर दही हांडी पर्व का उत्सव है खास

देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम है। यह त्योहार भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। दुनियाभर में मौजूद कान्हा के भक्तों के लिए ये दिन बेहद खास होता है। हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाता है।

Significance of Dahi Handi Celebration

इसके अगले दिन भारत के अलग अलग हिस्सों में दही हांडी उत्सव का आयोजन किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की माखन चुराने वाली लीलाओं को जीवंत करने के लिए ये उत्सव रखा जाता है।

साल 2020 में दही हांडी मुहूर्त

साल 2020 में दही हांडी मुहूर्त

हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 11 अगस्त को सुबह 09 बजकर 06 मिनट से हुआ है और यह 12 अगस्त को दिन में 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। दही हांडी का खेल अष्टमी के अगले दिन आयोजित किया जाता है। इस हिसाब से साल 2020 में दही हांडी का उत्सव 12 अगस्त, बुधवार के दिन मनाया जाएगा।

Janmashtami 2020 : कृष्ण जन्माष्टमी पर जानें क्या है दही हांडी का महत्व, Dahi Handi 2020 । Boldsky
दही हांडी का अर्थ

दही हांडी का अर्थ

इस उत्सव में मिट्टी की हांडी का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें दही या छाछ भरकर ऊंचाई पर रस्सी की सहायता से लटका दिया जाता है। दही और हांडी के इस्तेमाल के कारण ही इस पर्व का नाम दही हांडी उत्सव रखा गया है। बच्चों और नौजवानों का दल मानव पिरामिड बनाकर उस हांड़ी तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। सबसे पहले इस हांडी तक पहुंचने वाले दल को विजयी घोषित किया जाता है।

दही हांडी उत्सव का महत्व

दही हांडी उत्सव का महत्व

भगवान श्री कृष्ण की बाल कथाओं से पता चलता है कि उन्हें दूध, दही, माखन से कितना प्रेम था। वो दही-माखन चुराने से भी पीछे नहीं हटते थे। नंद लाला गोपियों के घर अपने सखा-मित्रों की टोली लेकर पहुंच जाते थे। इनके डर से ही गोपियां माखन और छाछ के बर्तन उंचाई पर रखती थीं। मगर कान्हा के हाथों से माखन की मटकी कैसे बच सकती है। वो एक एक करके अपने मित्रों के कंधों पर चढ़ते हुए मटके तक पहुंच जाते थे और उसमें रखा अनमोल खजाना अपने दोस्तों के साथ बांटकर चट कर जाते थे। उनकी इसी बाल लीला के आधार पर दही हांडी उत्सव का आयोजन आज भी किया जाता है।

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