Latest Updates
-
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी पर चाय पी सकते हैं या नहीं? जानें व्रत से जुड़े सभी जरूरी नियम -
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी के दिन झाड़ू लगाना शुभ या अशुभ? बसौड़ा पर भूलकर भी न करें ये गलतियां -
Sheetala Ashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है शीतला अष्टमी? जानिए सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
Sheetala Ashtami Vrat Katha: शीतला अष्टमी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, घर में आएगी सुख-समृद्धि -
Sheetala Ashtami 2026 Wishes: मां शीतला का आशीर्वाद बना रहे...इन संदेशों के साथ अपनों को दें बसौड़ा की बधाई -
कौन हैं संजू सैमसन की पत्नी चारुलता रमेश? टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद क्रिकेटर ने लिखा भावुक पोस्ट -
रणदीप हुड्डा बने पापा, लिन लैशराम ने बेटी को दिया जन्म, इंस्टाग्राम पर शेयर की क्यूट फोटो -
Kalashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है कालाष्टमी का व्रत? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
गर्मियों में वजन घटाने के लिए पिएं ये 5 ड्रिंक्स, कुछ ही दिनों में लटकती तोंद हो जाएगी अंदर -
Mangalwar Vrat: पहली बार रखने जा रहे हैं मंगलवार का व्रत तो जान लें ये जरूरी नियम और पूजा विधि
Hartalika Teej 2021: हरतालिका तीज का व्रत करने से वैवाहिक जीवन बनता है सुखद, जानें तिथि व शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज मनाई जाती है। विवाहित महिलाओं के लिए ये दिन बहुत मायने रखता है। इस दिन हर सुहागिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं। हरतालिका तीज पर महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं और अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस व्रत के प्रभाव से दाम्पत्य जीवन सुखमय बनता है। कुंवारी कन्याएं भी यह व्रत करती हैं और भोलेनाथ-पार्वती से मनचाहे वर का आशीर्वाद मांगती हैं।

हरतालिका तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त
इस साल हरतालिका तीज का व्रत 9 सितंबर, गुरुवार के दिन रखा जाएगा।
प्रातः काल हरितालिका पूजा मुहूर्त: सुभ 06 बजकर 03 मिनट से 08 बजकर 33 मिनट पर
तृतीया तिथि प्रारम्भ: सितंबर 09, 2021 को प्रात: 02 बजकर 33 मिनट से
तृतीया तिथि समाप्त: सितंबर 10, 2021 की रात 12 बजकर 18 मिनट तक

हरतालिका तीज की पूजा विधि
हरतालिका तीज का व्रत करने वाली महिलाएं इस दिन सुभ जल्दी उठ जाती हैं। स्नानादि के बाद सोलह श्रृंगार करती हैं। पूजा स्थल पर केले के पत्तों से मंडप तैयार किया जाता है और फिर वहां मां गौरी और शंकर भगवान की प्रतिमा स्थापित की जाती है। इस दिन पार्वती माता को सुहाग की सभी सामग्री चढ़ाई जाती है। हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत किया जाता है। इस पर्व में महिलाएं रात का समय भजन-कीर्तन में व्यतीत करती हैं और भगवान शिव व माता पार्वती की तीन बार आरती करती हैं। इस दिन व्रती महिलाओं को हरतालिका तीज की व्रत कथा अवश्य सुननी चाहिए। शिव-पार्वती के विवाह की कथा के पाठ से वैवाहिक जीवन मंगलमय बना रहता है।

हरतालिका तीज का महत्व
हिंदू धर्म में हरतालिका तीज की विशेष महत्ता बताई गयी है। इस दिन व्रत करने से हर मनोकामना पूरी होती है। यदि वैवाहिक जीवन में कलह चल रही है तो हरतालिका तीज का व्रत अवश्य करें। इसके प्रभाव से पति पत्नी के रिश्ते में सुधार आता है। महिलाएं अखंड सुहाग के लिए निर्जला व्रत करती हैं। सोलह श्रृंगार करके दुल्हन की तरह सजती हैं और गौरी-शंकर से प्रार्थना करती हैं कि उनका दाम्पत्य जीवन खुशहाली के साथ आगे बढ़े। उनका रिश्ता हर तरह के कलह से बचा रहे। विवाहित महिलाएं ही नहीं, कुंवारी कन्याएं भी इस दिन व्रत करती हैं। वो अपने लिए मनचाहे जीवनसाथी का वरदान मांगती हैं। माता पार्वती को कड़ी तपस्या और कई वर्षों की प्रतीक्षा के बाद भगवान शिव पति स्वरूप में मिले थे। यह व्रत उसी सुखद पल से जुड़ा हुआ है।



Click it and Unblock the Notifications











