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जुलाई 2018: इस महीने ये है पूजा और व्रत की खास तिथियां
भारत में त्योहारों का अपना एक अलग ही महत्व है। कोई भी बड़ा या छोटा त्योहार हो सभी जाति के लोग इसे बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। वैसे भी भारत अपने त्योहारों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। जैसा की हम सब जानते हैं त्योहारों के लिए दो तरह के कैलेंडर होते हैं पूर्णिमांत और अमावस्यांत। मूल रूप से इन दोनों में केवल नाम का ही अंतर होता है सभी त्योहार एक ही दिन पड़ते हैं।
आज हम आपके लिए हिंदू कैलेंडर के अनुसार जुलाई 2018 में पड़ने वाले त्योहारों की पूरी सूची लेकर आए हैं। तो चलिए जानते हैं जुलाई के महीने में कौन कौन से दिन महत्वपूर्ण हैं।

योगिनी एकादशी, 9 जुलाई 2018, सोमवार
आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं। हर एकादशी की तरह यह भी भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और विष्णु जी की पूजा अर्चना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से मनुष्य के सभी पापों का नाश हो जाता है। इस वर्ष योगिनी एकादशी 9 जुलाई, सोमवार को है।
योगिनी एकादशी के उपवास की शुरुआत दशमी तिथि की रात्रि से ही हो जाती है।
सूर्य ग्रहण, 13 जुलाई 2018, शुक्रवार
जब सूर्य पूरी तरीके से चन्द्रमा के पीछे होता है तब उसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं। जब सूर्य का सिर्फ एक भाग नहीं दिखता तब उसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहते हैं। ग्रहण का सभी 12 राशियों पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही रूपों से प्रभाव पड़ता है। 13 जुलाई, शुक्रवार को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने वाला है। पहला सूर्य ग्रहण फरवरी के महीने में लगा था।
जगन्नाथ रथयात्रा, 14 जुलाई 2018, शनिवार
आषाढ़ माह के शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि को ओडिशा के पुरी नगर में होने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इसमें दुनिया के कोने कोने से लोग भाग लेने आते हैं।
जगन्नाथ भगवान विष्णु और श्री कृष्ण का ही एक नाम है। साल में एक बार भगवान जगन्नाथ को उनके गर्भ गृह से निकालकर यात्रा कराई जाती है। माना जाता है कि अपने गर्भ गृह से निकल कर भगवान अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। साथ ही उनके सभी दुखों को भी दूर करते हैं।
इस दिन विशाल जुलूस निकाला जाता है जिसमें रथ पर श्री कृष्ण और उनके भाई बहन सवार रहते हैं। इस दिन श्री कृष्ण के साथ उनकी बहन सुभद्रा और भाई बलराम की भी पूजा की जाती है। रथयात्रा में सबसे आगे बलरामजी का रथ, उसके बाद बीच में देवी सुभद्रा का रथ और सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ श्रीकृष्ण का रथ होता है।
देवशयनी एकादशी, 23 जुलाई 2018, सोमवार
आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भक्त विष्णु जी की विशेष पूजा करते हैं क्योंकि इसी रात्रि से भगवान का शयन काल आरंभ हो जाता है जिसे चातुर्मास या चौमासा का प्रारंभ भी कहते हैं। पुराणों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु चार मास के लिए पाताल लोक में निवास करते हैं। चार माह के बाद भगवान का शयन समाप्त होता है। आपको बता दें इस बार देवशयनी एकादशी 23 जुलाई, सोमवार को है।
गुरु पूर्णिमा, 27 जुलाई 2018, शुक्रवार
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इसे गुरु की पूजा करने का पर्व कहा जाता है। इस त्योहार को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। महाभारत जैसे महान ग्रन्थ की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास की पूजा इस दिन की जाती है।
इस बार गुरु पूर्णिमा 27 जुलाई, शुक्रवार को है। 26 जुलाई को 1:46 मिनट पर पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी जो 27 जुलाई को 4:20 मिनट पर समाप्त हो जाएगी।
पूर्ण चंद्र ग्रहण, 27 जुलाई 2018, शुक्रवार
यह साल का दूसरा चंद्र ग्रहण है इससे पहले 31 जनवरी को पहला चंद्र ग्रहण लगा था। हिंदू मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए ताकि इसका नकारात्मक प्रभाव उन पर न पड़े। उदाहरण के तौर पर ग्रहण के दौरान सभी मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं। यहां तक की भगवान की मूर्तियों को भी छूना वर्जित माना गया है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को घर से बाहर निकलने की मनाही होती है। साथ ही ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है।
यह इस साल का नही बल्कि पूरे 21वीं सदी का सबसे बड़ा और पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। अगर जानकारों की मानें तो यह विशेष संयोग करीब 104 साल बाद बन रहा है। यह ग्रहण भारत ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी दिखाई पड़ेगा जैसे दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, पश्चिमी एशिया, आस्ट्रेलिया और यूरोप।
इस बार यह ब्लड मून होगा। चन्द्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया के कारण पृथ्वी से चांद पूरी तरह काला दिखाई देता है। वहीं कुछ समय के लिए यह पूरा लाल हो जाता है इसलिए इसे ब्लड मून कहते हैं।



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