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क्यूं चढ़ाया जाता है भगवान शिव को बेलपत्र और क्या है इसकी कहानी
आपने बेल का नाम सुना ही होगा और उसका पेड़ भी देखा होगा। जी हां, बेल के पेड़ पर लगने वाली पत्तियों को बेलपत्र कहा जाता है। ये पत्तियां कुछ विशेष प्रकार की होती हैं, एक ही डंडी पर तीन पत्ते एक साथ जुड़े हुए होते है।
हिंदू धर्म में बेलपत्र का विशेष महत्व होता है। सावन महीने में भगवान शिव की पूजा करने के दौरान बेलपत्र को चढ़ाना अनिवार्य माना जाता है जिसके लिए कई नियम भी होते हैं।
ऐसा माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करता है और उन्हें बेलपत्र अर्पित करता है तो भगवान उसकी हर इच्छा पूरी करते हैं। क्या आप बेलपत्र के बारे में अन्य और भी बातें जानना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को पढ़ें-

बेलपत्र की कहानी
स्कंद पुराण के अनुसार, एक बार माता पार्वती के पसीने की बूंद मंदृंचल पर्वत पर गिर गई और उससे बेल का पेड़ निकल आया। इसलिए, माना जाता है कि माता पार्वती में इसके सभी रूप बसते हैं।
पेड़ की जड़ में वह गिरिजा के स्वरूप में, इसके तनों में वह माहेश्वरी के स्वरूप में और शाखाओं में दक्षिणायनी व पत्तियों में पार्वती के रूप में रहती हैं।

फलों में कात्यायनी स्वरूप व फूलों में गौरी स्वरूप निवास करता है। इस सभी रूपों के अलावा, मां लक्ष्मी का रूप समस्त वृक्ष में निवास करता है। इसीलिए, भगवान शिव पर इसकी पत्तियों को चढ़ाया जाता है क्योंकि माता पार्वती का रूप पत्तियों में होता है।
कई जगह ऐसा भी वर्णन किया गया है कि अगर बेल का पेड़ आप सच्चे मन से छूते हैं तो सारे रोगों और पापों से छुटकारा मिल जाता है।

बेलपत्र के वैज्ञानिक लाभ
शास्त्रों और आयुर्वेद के अनुसार, बेलपत्र में कई सारे औषधीय गुण होते हैं। इसकी तीन पत्तियां, सत्व, रजस और तमस का प्रतीक होती है।
सत्वा यानि सकारात्मक ऊर्जा, तमस यानि नकारात्मक ऊर्जा होती है। बीच वाली पत्ती, रजस का प्रतीक होती है जो न्यूट्रल ऊर्जा को दर्शाती है।
बेल की जड़, छाल, पत्तियां, फल, यानि हर हिस्सा कई बीमारियों के लिए फायदेमंद होता है। इसके इस्तेमाल से मसूड़ों से निकलने वाले खून की समस्या, दस्त, अस्थमा, पीलिया, खून की कमी आदि रोग सही हो जाते हैं। कुल मिलाकर, हिंदू धर्म में बेल का पेड़, हर नजरिए से लाभकारी होता है।



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