Latest Updates
-
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
World Nature Conservation Day 2026: क्यों मनाते हैं विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
World Hepatitis Day 2026: हेपेटाइटिस क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण, प्रकार और बचाव के उपाय -
CJP के बाद किसने शुरू की E20 जनता पार्टी? सोशल मीडिया पर जुड़े लाखों फॉलोअर्स, जानें क्या है मांग -
कौन हैं Indian Idol 16 की विनर ज्योतिर्मयी नायक? कैंसर मरीजों को देती थीं थेरेपी, अब है ये सपना -
Bank Holidays August 2026: अगस्त में 14 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट
जन्माष्टमी 2018: इन तीन वर्णों से बना था श्री कृष्ण का रूप, जानिए ऐसे ही अनसुने राज़
जब जब धरती पर पाप बढ़ा है तब तब भगवान ने किसी न किसी रूप में जन्म लेकर बुराई का अंत किया है और संसार को पापियों से मुक्त कराया है। ठीक इसी प्रकार श्री हरी विष्णु ने अलग अलग अवतार लेकर संसार का उद्धार किया है।
आज हम अपने इस लेख में विष्णु जी के ही अवतार श्री कृष्ण को और भी करीब से जानने की कोशिश करेंगे। यूं तो हमने कन्हैया से जुड़ी कई रोचक कथाएं और बातें सुनी या पढ़ी होंगी। श्री कृष्ण अपनी रास लीलाओं के लिए भी खासे चर्चित हैं।

जन्माष्टमी यानी श्री कृष्ण का जन्मोत्सव आने ही वाला है, इस शुभ मौके पर हम भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़ी कुछ अन्य बातों पर चर्चा करेंगे।
आपको बता दें इस बार जन्माष्टमी 2 सितंबर, 2018 को मनायी जाएगी। हर बार जन्माष्टमी का जश्न दो दिनों तक मनाया जाता है। पहले दिन यह पर्व संतों के लिए होता है जबकि दूसरे दिन सभी भक्तजन इसे बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं।
आठ अंक का रहस्य
भ्रादपद की रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। श्री कृष्ण ने द्वापर युग में देवकी के गर्भ से जन्म लिया था। वे देवकी और वसुदेव की आठवीं संतान थे। कहते हैं भगवान के जन्म से पहले आकाशवाणी हुई थी कि देवकी और वसुदेव का आठवां पुत्र ही कंस की मृत्यु का कारण बनेगा इसलिए एक एक कर कंस ने देवी की सात संतानों का वध कर दिया था।
किन्तु श्री कृष्ण को मारने में वह असफल रहा। श्री कृष्ण के जीवन में आठ अंक का बड़ा ही महत्व है जैसा कि हमने आपको बताया कि वे देवकी और वसुदेव की आठवी संतान थे। उनका जन्म भी रात्रि में सातवें मुहूर्त के बीतने के बाद आठवें मुहूर्त में रात के 12 बजे हुआ था।
तीन रंगों को मिलाकर बना है श्री कृष्ण का रूप
श्री कृष्ण के रंग रूप को लेकर भी लोगों के कई मत हैं। कोई कहता है वे काले रंग के थे तो कोई उन्हें सावंला कहता है लेकिन वास्तव में वे न तो काले हैं और न ही सांवले उनका रंग तो काला, सफ़ेद और नीले रंग का मिश्रण है। इतना ही नहीं, श्री कृष्ण का शरीर लड़कियों के समान कोमल व सुन्दर था किन्तु जब युद्ध की बारी आती तो उनके जैसा बलवान कोई नहीं होता।
कहा जाता है कि श्री कृष्ण खुद को योग्य बनाए रखने के लिए कलारीपयटू और योग विद्या का सहारा लेते थे। वे इन दोनों में ही पारंगत थे। भगवान के शरीर से एक सुंदर महक आती थी जो रात रानी के फूल और चन्दन का मिश्रण थी।

119 वर्ष की आयु में भी थे युवा
श्री कृष्ण ने मथुरा में जन्म लिया था लेकिन उनका जीवन वृन्दावन, गोकुल बरसाना आदि जैसे स्थानों में बीता। जैसा कि हमने बताया भगवान बहुत ही सुन्दर काया के थे और वे अपने पूरे जीवन में ऐसे ही आकर्षक और जवान रहे। जी हां, श्री कृष्ण की मृत्यु 119 वर्ष की आयु में हुई थी लेकिन तब भी वे एक युवा पुरुष के समान दिखाई देते थे।
श्री कृष्ण की सिर्फ 8 पत्नियां थीं
कहते हैं श्री कृष्ण की 16 हज़ार से भी अधिक पत्नियां थी लेकिन उनकी केवल 8 ही पटरानियां थी जिनके नाम हैं रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, मित्रवन्दा, सत्या, लक्ष्मणा, भद्रा और कालिंदी। इन सभी रानियों से उन्हें कई पुत्र और पुत्रियों की प्राप्ति हुई थी।
इसके अलावा उनकी कई प्रेमिकाएं भी थीं जिनमें राधा और ललिता सबसे प्रमुख थीं। कहते हैं ललिता को मोक्ष नहीं मिल पाया था जिसके कारण उन्होंने अगला जन्म मीरा के रूप में लिया था।
जन्माष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त
2 सितंबर 2018 को शाम 20:47 बजे के बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी। यह 3 सितंबर 2018 को शाम 19:19 बजे तक रहेगी।
पूजा का समय - 23:58 से 24:44 बजे तक।



Click it and Unblock the Notifications