Latest Updates
-
नीम करौली बाबा के 3 गुप्त नियम बदल सकते हैं आपकी किस्मत, आज ही जान लें सफल जीवन का रहस्य! -
UP Village Style Besan Cheela Recipe: घर पर बनाएं गांव जैसा पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता -
Hindi Journalism Day 2026 Wishes: हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर सभी पत्रकार दोस्तों को ये शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 30 May 2026: शनिवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, शनिदेव की कृपा से होगा धन लाभ -
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें -
Hindi Journalism Day: 30 मई को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
Kumaoni Sweet Bal Mithai Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड की पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई -
महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है हलीम के बीज, अनियमित पीरियड्स समेत इन 5 समस्याओं को कर सकते हैं दूर -
गर्मियों में पसीने से होने वाली 5 कॉमन स्किन प्रॉब्लम्स, एक्सपर्ट से जानें इन समस्याओं से बचने के घरेलू उपाय
Karva Chauth : करवा चौथ शुभ मूहूर्त और तिथि, महाभारत के इस पात्र ने भी रखा था करवा चौथ का व्रत
करवा चौथ का खास दिन पति-पत्नी के बीच प्यार और अपनेपन की एक अलग मिठास घोल देता है। पति की लम्बी उम्र की कामना के साथ ये व्रत सुहागिन स्त्रियों को अखंड सौभाग्य का आर्शीवाद भी मिलता है। ये व्रत विवाहित महिलाओं के लिए काफी खास होता है।
पति की लम्बी आयु के लिए हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आने वाला यह व्रत करवा चौथ इस बार करवा चौथ 8 अक्टूबर को है। जिसमें सुहागिन स्त्रियां अपने सुहाग की लम्बी आयु के लिए इस दिन निर्जला व्रत करती है और पूरी विधि से पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्ध्य देकर अपना व्रत खोलती हैं।
उत्तर भारत के कई प्रांतों में विवाहित महिलाएं अंखड सुहागन रहने के लिए ये व्रत किया करती हैं। ये व्रत जो सबसे महत्वपूर्ण होता है वो है पूजा विधि तो आइए जानते है इस बार का करवा चौथ का मूहूर्त।

ये रहेगा इस बार करवा चौथ व्रत पूजा का मूहूर्त
- वार -रविवार
- तारीख-8 अक्टूबर
- करवा चौथ पूजा मुहूर्त- 17:55 से 19:09
- चंद्रोदय- 20:14 चतुर्थी तिथि आरंभ- 16:58 (8 अक्टूबर)
- चतुर्थी तिथि समाप्त- 14:16 (9 अक्टूबर)
- घर के दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्र बनाएं। इसे वर कहा जाता है। चित्र बनाने की कला को करवा धरना कहा जाता है।
- आठ पूरियों की अठावरी, हलवा और पक्के पकवान बनाएं।
- पीली मिट्टी से गौरी बनाएं साथ ही गणेश को बनाकर गौरी के गोद में बिठाएं।
- गौरी को लकड़ी के आसन पर बिठाएं। चौक बनाकर आसन को उस पर रखें। गौरी को चुनरी ओढ़ाएं। बिंदी आदि सुहाग सामग्री से गौरी का श्रृंगार करें।
- जल से भरा हुआ लोटा रखें।
- भेंट देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। करवा में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें। उसके ऊपर दक्षिणा रखें।
- रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाएं।
- गौरी-गणेश और चित्रित करवा की परंपरानुसार पूजा करें। पति की दीर्घायु की कामना करें।
- 'नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥'
- करवा पर 13 बिंदी रखें और गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें।
- कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपनी सासुजी के पैर छूकर आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें।
- तेरह दाने गेहूं के और पानी का लोटा या टोंटीदार करवा अलग रख लें।
- रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चन्द्रमा को अर्घ्य दें।
- इसके बाद पति से आशीर्वाद लें। उन्हें भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन कर लें।

सुखद रहे दाम्पत्य जीवन
करवा चौथ पर पति की दीर्घायु एवं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए गणेश जी की और करवा माता की पूजा की जाती है। इस व्रत को करने से दाम्पत्य जीवन भी सुखद रहता हैं।

इन चीजों का ध्यान रखें

महाभारत से भी है नाता
वैसे इस व्रत के चमत्कारी होने के पीछे एक कहानी कही जाती है कि जब पांडव वनवास कर रहे थे तो भगवान श्री कृष्ण ने अपनी सखी द्रौपदी को इस दिव्य व्रत के बारे बताया था, जिसे करने के बाद ही द्रौपदी को अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान मिला था।



Click it and Unblock the Notifications