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समुद्र मंथन में वासुकि नाग की थी अहम भूमिका, भगवान शिव के आभूषण के बारे में जानें और भी खास बातें
हर साल श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। नाग पंचमी के शुभ मौके पर नाग देवताओं की पूजा की जाती है। सावन का महीना भगवान शिव का प्रिय माना जाता है। आपने भोलेनाथ के गले में लिपटा हुआ नाग देखा होगा। सावन माह में आने वाली नाग पंचमी के दिन उनकी भी पूजा होती है। जानते हैं कि वह नाग कौन है और उससे जुड़े रहस्य क्या हैं।

वासुकि नाग
भगवान शिव के गले में जिन नाग को स्थान प्राप्त है उनका नाम वासुकि है। उनके पिता ऋषि कश्यप और माता कद्रू थीं। वासुकि नाग के बड़े भाई शेष (अनंत) और दूसरे भाइयों का नाम तक्षक, पिंगला और कर्कोटक आदि था।

शिव जी का आशीर्वाद
वासुकि के बड़े भाई शेष नाग भगवान विष्णु के सेवक बने। वहीं वासुकि भोलेनाथ के परम भक्त थे। उनकी भक्ति और आस्था से प्रसन्न होकर ही महादेव ने उन्हें अपने गणों में शामिल किया था।

भगवान शिव के साथ वासुकि नाग की पूजा
ऐसी मान्यता है कि कैलाश पर्वत के नजदीक ही वासुकि का राज्य था। वासुकि को नागलोक का राजा भी माना जाता है। भगवान शिव के साथ वासुकि नाग भी पूजनीय हैं। नागपंचमी के मौके पर शेष नाग के बाद वासुकि नाग की पूजा भी जरूर की जाती है। ये भी माना जाता है कि नाग जाति के लोगों ने ही सबसे पहले शिवलिंग की पूजा करने की प्रथा की शुरुआत की।

वासुकि की समुद्र मंथन में भूमिका
जब अमृत पाने के लिए देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन का फैसला लिया था तब वासुकि नाग को ही रस्सी के तौर पर इस्तेमाल किया गया था। इन्हें मेरु पर्वत के चारों ओर लपेटकर क्षीर सागर में मंथन किया गया। इसकी वजह से वासुकि नाग का पूरा शरीर लहूलुहान हो गया था।

वासुकि के कारण ही भीम के पास था दस हजार हाथियों का बल
वासुकि ने ही पांच पांडवों में से भीम को दस हजार हाथियों के बल का वरदान दिया था। दरअसल दुर्योधन ने भीम को धोखे से विष पिलाकर गंगा नदी में फेंक दिया था और वो नागलोक पहुंच गए थे। वहां भीम के नानाजी ने वासुकि को भीम के बारे में जानकारी दी। इसके बाद ही वासुकि नाग ने भीम का विष उतारा और उसे दस हजार हाथियों का बल वरदान में दिया।



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