इस गांव के लोग करते हैं बजरंगबली से नफ़रत

Posted By: Rupa Singh
Subscribe to Boldsky
lord-hanuman-is-not-worshiped-this-village

हम अकसर ऐसा कहते हैं कि हमें हमारे अच्छे बुरे कर्मों का फल भगवान देते हैं परन्तु स्वयं भगवान से कोई गलती हो जाए तो उन्हें सज़ा कौन दे सकता है। सोचने वाली बात है कि क्या वाकई में ईश्वर से भी गलतियां हो सकती हैं और वह सज़ा के पात्र बन सकते हैं। जी हाँ, उत्तराखंड के एक गाँव के लोग इस बात को सच साबित कर चुके हैं कि हमारे देवी देवता भी गलतियां कर सकते हैं और उन्हें सज़ा भी मिलती है। लेकिन इनकी नाराज़गी आख़िर किस देवता से है और क्यों है। हम आपको बता दें कि यहां के लोग मर्यदापुरुषोतम श्री राम के परम भक्त बजरंगबली को नहीं मानते हैं और न ही उनकी पूजा करते हैं।

एक ओर जहां समस्त संसार हनुमान जी की भक्ति को परम सुख मानता है वहीं इस गाँव में इनकी पूजा वर्जित है। इतना ही नहीं पूरे गाँव में हनुमान जी का एक भी मंदिर नहीं है।

आइए जानते हैं ऐसी कौन सी वजह है जो यहां के लोगों की नाराज़गी का कारण बनी हुई है।

lord-hanuman-is-not-worshiped-this-village

कहा जाता है कि जब लंकापति रावण के पुत्र मेघनाथ से श्री राम, लक्ष्मण और पूरी वानर सेना का भयंकर युद्ध हो रहा था तब मेघनाथ ने अपने शक्ति बाण से लक्ष्मण जी को और कई वानरों को घायल कर दिया था। तब संजीवनी को तलाशते हुए बजरंबली उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली के द्रोणागिरि गांव पहुंचे थे। यह गांव लगभग 14000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। जब वे वहां पहुंचे तो उन्हें चारों ओर केवल पहाड़ ही पहाड़ नज़र आये वे समझ ही नहीं पा रहे थे कि आख़िर संजीवनी बूटी उन्हें कहा मिलेगी। तब अचानक उनकी नज़र एक वृद्ध महिला पर पड़ी। हनुमान जी ने उन से पूछा कि संजीवनी बूटी कहाँ मिलेगी तो उस वृद्ध महिला ने एक पर्वत की तरफ इशारा किया और वहां से चली गयी। इसके बाद बजरंबली उस पर्वत पर पहुंचे किंतु संजीवनी को पहचानने में वे अब भी असमर्थ थे इसलिए उन्होंने पूरा का पूरा पर्वत ही उठा लिया और श्री राम के पास ले गए।

बजरंबली के ऐसा करने से लक्ष्मण जी की जान तो बच गई लेकिन द्रोणागिरी के लोग इस बात से नाराज़ हो गए क्योंकि ऐसी मान्यता है कि वह पर्वत इसी गाँव में स्थित था और यहाँ के लोग उस पर्वत की पूजा करते थे।

lord-hanuman-is-not-worshiped-this-village

वृद्ध महिला का कर दिया गया था समाज से बहिष्कार

ये भी कहा जाता है कि जिस महिला ने बजरंबली की मदद की थी और संजीवनी बूटी के बारे में बताया था उसे समाज से निकाल दिया गया था। इतना ही नहीं इस गाँव में पर्वत देव की विशेष पूजा की जाती है जिस दिन यह पूजा होती है उस दिन यहाँ के पुरुष महिलाओं के हाँथ का बना भोजन ग्रहण नहीं करते और ना ही महिलाओं को इस पूजा में हिस्सा लेने की अनुमति है।

lord-hanuman-is-not-worshiped-this-village

लाल ध्वज लगाना भी वर्जित है यहां

बजरंबली से यहां के लोग इस कदर रूठे हुए हैं कि यहां पर लाल ध्वज जिसे उनका प्रतीक माना जाता है उसे तक लगाने की मनाही है।

    English summary

    Lord Hanuman is not worshiped in this village

    Lord Hanumana is considered as the saviour. You will be surprised to know that there is a place in India where worshipping Lord Hanuman is considered as an offence.
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Boldsky sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Boldsky website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more