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नवरात्रि उत्सव में पहले दिन घटस्थापना की जाती है और फिर नौ दिवसीय इस त्योहार में दुर्गा माता की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। इसके बाद दसवें दिन दशहरा का उत्सव मनाया जाता है। दसवीं तिथि को मां दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन करने का भी विधान है। बंगाल में दुर्गा विसर्जन के समय सिंदूर खेला की प्रथा के साथ मां की विधायी होती है। जानते हैं इस साल दुर्गा विसर्जन किस तारीख को और किस शुभ मुहूर्त में किया जाएगा। साथ ही जानें शुभ मंत्र और इस दिन का खास महत्व।

दशमी तिथि प्रारंभ व समाप्त
नवरात्रि के समापन के पश्चात् दशमी तिथि पर दुर्गा माता की प्रतिमा को समंदर, सरोवर अथवा किसी जल स्रोत में विसर्जित किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन महीने की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दुर्गा विसर्जन होता है।
दशमी तिथि प्रारंभ: 14 अक्टूबर 2021 को शाम 06 बजकर 52 मिनट से
दशमी तिथि समाप्त: 15 अक्टूबर 2021 को शाम 06 बजकर 02 मिनट तक

दुर्गा विसर्जन का शुभ मुहूर्त
साल 2021 में दुर्गा विसर्जन 15 अक्टूबर को किया जाएगा।
विसर्जन का शुभ मुहूर्त प्रारंभ: 15 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 22 मिनट से
विसर्जन का शुभ मुहूर्त समाप्त: 15 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 40 मिनट तक।
दुर्गा विसर्जन की अवधि: 2 घंटे 18 मिनट

दुर्गा विसर्जन मंत्र
गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठे स्वस्थानं परमेश्वरि।
पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च।।
मां दुर्गा की इस मंत्र से स्तुति करें-
रूपं देहि यशो देहि भाग्यं भगवति देहि मे।
पुत्रान् देहि धनं देहि सर्वान् कामांश्च देहि मे।।
महिषघ्नि महामाये चामुण्डे मुण्डमालिनी।
आयुरारोग्यमैश्वर्यं देहि देवि नमोस्तु ते।।

दुर्गा विसर्जन का महत्व
माना जाता है जिस प्रकार से विवाह के बाद बेटियां अपने मायके आती हैं, ठीक उसी तरह नवरात्रि के समय नौ दिनों के लिए मां दुर्गा धरती पर आती हैं। इस अवधि में मां दुर्गा का पूरा सम्मान किया जाता है और पूरे विधि-विधान के साथ उनकी पूजा-आराधना की जाती है। मायके में कुछ दिन रहकर बेटियां वापस अपने ससुराल चली जाती हैं। दुर्गा मैय्या भी पृथ्वी पर कुछ समय रूककर वापस कैलाश महादेव के पास चली जाती हैं। दुर्गा विसर्जन माता रानी के विदाई के रूप में मनाया जाता है।
वर्ष 2021 में कार्तिक अमावस्या की तिथि 04 नवंबर, गुरुवार को है। इसी दिन दिवाली का उत्सव मनाया जाएगा।



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