अवज्ञा में भी आज्ञा का पालन

Obedience In Defiance
गुरु बनकेइ के उनके जैन छात्रों के अलावा विभिन्न संप्रदायों और रैंको के मिश्रित दर्शक थे जो कि उनके शब्दों को सुनते थे। उनके शब्द एकदम सरल और सीधे दिल से निकले होते थे। वे सूत्र या शब्द उदाहरण होते थे जिससे लोग भली भांति समझ पाते थे।

उनके भाषणों में अनुयायियों की बड़ी भीड़ होती थी, उसी भीड़ में निचिरेन संप्रदाय के एक पुजारी थे जो कि उनसे नाराज थे।

इस संप्रदाय के लोगों ने उनके शब्दों को सुनना भी छोड़ दिया था। इसलिए पुजारी ने बनकेइ को एक बहस में खींचने का फैसला किया। पुजारी ने भीड़ में ही बोला, "जैन शिक्षक "एक मिनट रुको, जो भी आपका सम्मान करते हैं वे आपकी आज्ञा का पालन करते होंगे लकिन एक मेरे जैसा आदमी आपका सम्मान नहीं करता।

आप मुझसे आज्ञा का पालन नहीं करा सकते? "आओ, यहाँ मेरे पास आओ और मैं तुम्हें दिखाता हूँ" बनकेइ ने कहा। पुजारी गर्व से भीड़ से निकलता हुआ बनकेइ के पास आ गया।

बनकेइ मुस्कराए और कहा, "अब मेरे बाईं ओर आओ। वह पुजारी इस प्रकार अवज्ञा में भी बनकेइ कि आज्ञा का पालन करता गया।

Story first published: Thursday, September 6, 2012, 16:49 [IST]
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