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परम एकादशी आज, शुभ मुहूर्त के साथ जरूर पढ़ें इससे जुड़ी व्रत कथा
अधिक मास अंतिम चरण में चल रहा है। इसके समाप्त होते ही नवरात्रि का शुभारंभ हो जाएगा। परम एकादशी अधिक मास की आखिरी एकादशी है। अधिकमास में पड़ने वाली एकादशी काफी खास मानी जाती है। साल 2020 में परम एकादशी का व्रत 13 अक्टूबर को रखा जाएगा। माना जाता है कि एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है। परम एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा करें और साथ ही व्रत कथा अवश्य पढ़ें।

परम एकादशी का शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि आरंभ: 12 अक्टूबर, सोमवार को दोपहर 4 बजकर 38 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त: 13 अक्टूबर, मंगलवार को दोपहर 2 बजकर 35 मिनट तक
पारण मुहुर्त: 14 अक्टूबर, बुधवार को सुबह 06 बजकर 21 मिनट से 8 बजकर 39 मिनट तक

परम एकादशी का महत्व
भगवान विष्णु के भक्तों के लिए परम एकादशी परम सुख देने वाली मानी गई है। लोगों की आस्था है कि एकादशी का व्रत करने वाले जातक पर भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। प्राचीन समय में ऋषि-मुनि बैकुंठ धाम की प्राप्ति के लिए कई हजार वर्षों तक तपस्या करते थे। माना जाता है कि परम एकादशी इतना प्रभावशाली है कि इस व्रत को करने वाला जातक बैकुंठ धाम प्राप्त कर सकता है।

परम एकादशी की व्रत कथा
परम एकादशी से जुड़ी कथा के अनुसार प्राचीन काल में सुमेधा नाम का एक ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी का नाम पवित्रा था। वह परम सती और साध्वी थी। उनका जीवन दरिद्रता और निर्धनता में बीत रहा था। मगर इसके बाद भी वे परम धार्मिक और अतिथि सेवा में तत्पर रहते थे। एक दिन गरीबी से दुखी होकर ब्राह्मण ने परदेश जाने का विचार किया, किंतु उसकी पत्नी ने कहा- ‘'स्वामी धन और संतान पूर्वजन्म के दान से ही प्राप्त होते हैं, अत: आप इसके लिए चिंता न करें।''
एक दिन महर्षि कौडिन्य उनके घर आए। ब्राह्मण दंपति ने तन-मन से उनकी सेवा की। महर्षि उनसे प्रसन्न हुए और उनकी दशा देखकर उन्हें परमा एकादशी का व्रत करने को कहा। उन्होंने कहा, ‘'दरिद्रता को दूर करने का सुगम उपाय यही है कि तुम दोनों मिलकर अधिक मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत तथा रात्रि जागरण करो। इस एकादशी के व्रत से यक्षराज कुबेर धनाधीश बना है, हरिशचंद्र राजा हुआ है।''
यह मार्ग बताने के बाद मुनि चले गए। सुमेधा ने अपनी पत्नी सहित एकादशी का व्रत किया। प्रात: काल एक राजकुमार घोड़े पर चढ़कर आया और उसने सुमेधा को सर्व साधन, संपन्न, सर्व सुख समृद्ध कर एक अच्छा घर रहने को दिया। इसके बाद उनके समस्त दुख दर्द दूर हो गए।



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