महाभारत के शूरवीर कर्ण से जुड़ी है पितृ पक्ष की पौराणिक कथा, जानें क्यों वो स्वर्ग से वापस धरती पर आए

पितृ पक्ष एक ऐसा समय है जब हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने परिवार वालों से अलग अलग रूपों में मिलते हैं। माना जाता है कि सोलह दिन की इस अवधि में यमराज आत्माओं को मुक्त कर देता है ताकि वो धरती पर अपने परिवार को निकट से देख सकें। वहीं पितृपक्ष में संतानें अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-पाठ व तर्पण करता है। जो जातक प्रेम व श्रद्धापूर्वक श्राद्ध कर्म करता है उसे अपने पूर्वजों का आशीर्वाद अवश्य मिलता है।

Pitru Paksha Mythological Story in Hindi

पितृ पक्ष व श्राद्ध कर्म का संबंध महाभारत काल से बताया जाता है। आज इस लेख में जरुर जानें पितृ पक्ष से जुड़ी कथा के बारे में।

पितृ पक्ष की पौराणिक कथा

कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध में जब दानवीर कर्ण की मृत्यु हुई तब उनकी आत्मा स्वर्ग को प्राप्त हुई। वहां कर्ण इस बात से हैरान थे कि अन्य लोगों को नियमित भोजन दिया जाता है और उन्हें खाने में स्वर्ण और तरह तरह के आभूषण दिए गए। कर्ण को ये समझ नहीं आया। वो तो अन्न की तलाश में थे।

Pitru Paksha Mythological Story in Hindi

अंत में उन्होंने इंद्र देव से ही इसका कारण पूछा कि उन्हें भोजन के स्थान पर गहने और सोना क्यों दिया गया। तब इंद्र ने कर्ण से कहा कि आपने अपने पूरे जीवन में केवल सोना और आभूषण ही दान में दिया। आपने न कभी किसी गरीब और न ही कभी अपने पूर्वजों को अन्न का दान नहीं दिया। कर्ण को एहसास हुआ कि एक गरीब व्यक्ति के लिए बहुमूल्य रत्न से ज्यादा अन्न कीमती है। कर्ण को अपने पूर्वजों के बारे में जानकारी नहीं थी जिसका जिक्र उन्होंने इंद्र से किया।

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दानवीर कर्ण की समस्या को समझते हुए इंद्र देव ने उन्हें 15 दिन के लिए पृथ्वी पर वापस जाने की अनुमति दे दी ताकि वो इस अवधि में अपने पितरों को दान व तर्पण कर सकें। यही वो पन्द्रह दिन की अवधि है जो आज भी पितृ पक्ष के रूप में मानी जाती है।

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