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हिंदू धर्म में रथ सप्तमी का विशेष महत्व है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रथ सप्तमी कहा जाता है।

रथ सप्तमी को अचला सप्तमी, भानु सप्तमी, आरोग्य सप्तमी, रथ आरोग्य सप्तमी आदि के नामों से भी जाना जाता है। प्रचलित पौराणिक कथाओं की मानें तो इसी दिन भगवान सूर्य का जन्म हुआ था। इस वजह से इस दिन सूर्य जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान सूर्य की पूरे विधि विधान से पूजा की जाती है। जानते हैं इस साल रथ सप्तमी की तिथि, शुभ मुहूर्त क्या है और इस दिन पूजा करने से क्या लाभ मिलेंगे।

रथ सप्तमी की तिथि और शुभ मुहूर्त:
सप्तमी तिथि का शुभारंभ- 18 फरवरी 2021 (गुरूवार) सुबह 8 बजकर 17 मिनट से
सप्तमी तिथि समाप्त- 19 फरवरी 2021 (शुक्रवार) सुबह 10 बजकर 58 मिनट तक
सप्तमी के दिन अरुणोदय- सुबह 6 बजकर 32 मिनट
सप्तमी के दिन अवलोकनीय (दिखने योग्य) सूर्योदय- सुबह 6 बजकर 56 मिनट।

रथ सप्तमी का महत्व:
लोगों की ऐसी आस्था है कि रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की पूजा करने वाला जातक अपने बीते कल और वर्तमान समय के पापों से छुटकारा पाने और मोक्ष प्राप्त करने के करीब पहुंच जाता है। इस दिन भगवान सूर्य की उपासना और नियम के अनुसार व्रत करने से जातक को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का भी विशेष महत्व है। ये भी मान्यता है कि रथ सप्तमी के दिन जो व्यक्ति सच्चे मन से प्रार्थना करता है उसे पूरे साल भगवान सूर्य के आशीर्वाद के साथ पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

रथ सप्तमी पूजा के लाभ
रथ अथवा अचला सप्तमी के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करने से व्यक्ति सभी तरह के रोगों से मुक्त हो जाता है। इस दिन जातक को आरोग्य होने का वरदान मिलता है। भगवान सूर्य देव से अच्छे स्वास्थ्य के साथ दीर्घायु का भी आशीर्वाद मिलता है।



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