Latest Updates
-
सुबह खाली पेट जौ का पानी पीने से दूर होंगी ये 5 समस्याएं, जानें इसे बनाने का तरीका -
Baglamukhi Jayanti 2026: बगलामुखी जयंती कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
फैटी लिवर में कौन सा योग करें? जानें लिवर को साफ और मजबूत रखने के लिए योगासन -
May 2026 Vrat Tyohar: वट सावित्री, शनि जयंती सहित मई माह में पड़ रहे हैं कई व्रत-त्योहार, देखें पूरी लिस्ट -
Swapna Shastra: सपने में मरे हुए व्यक्ति को देखने का क्या मतलब होता है? जानें ये शुभ होता है या अशुभ -
Bael Juice Benefits: गर्मियों में रोजाना पिएं एक गिलास बेल का जूस, सेहत को मिलेंगे ये 5 फायदे -
Who Is Divyanka Sirohi: कौन हैं एक्ट्रेस दिव्यांका सिरोही? जिनका 30 साल की उम्र में हार्ट अटैक से हुआ निधन -
Kedarnath Yatra 2026: केदारनाथ यात्रा आज से शुरू, रजिस्ट्रेशन से हेलीकॉप्टर बुकिंग तक जानें सभी जरूरी नियम -
बालों की ग्रोथ के लिए इस तरह करें केले के छिलके का इस्तेमाल, कुछ ही दिनों में घुटनों तक लंबे हो सकते हैं बाल -
दीपिका कक्कड़ की MRI रिपोर्ट में मिले 2 नए सिस्ट, अब होगी इम्यूनोथेरेपी, जानें क्या है ये ट्रीटमेंट
भारतीय शादियों में मेहंदी लगाने का महत्व
भारतीय शादियों में 'मेहंदी की रात' शादी के पूर्व की सबसे महत्वपूर्ण रस्मों में से एक है। यह केवल शादी के पूर्व की एक मजेदार रस्म ही नहीं है बल्कि इसका सांस्कृतिक महत्व भी बहुत गहरा है।
पारंपरिक रस्म: शादी से पहले दूल्हा तथा दुल्हन को मेहंदी लगाना, भारत की सबसे पुरानी परंपराओं में से एक है। हालांकि, इस रस्म में दुल्हन के हाथों एवं पैरों पर मेहंदी के विस्तृत डिजाइन बनाए जाते हैं। जबकि दूल्हें को, शगुन के रुप में मेहंदी का एक छोटा टीका लगाया जाता है। मेंहदी के पत्तों के स्वास्थ्य लाभ
इसका अनुसरण शादी की एक परंपरा के रुप में, भारत के कई हिस्से में साथ ही पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में किया जाता है। मुसलमानों के बीच भी मेहंदी काफी लोकप्रिय है। इस्लामी साहित्य के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद अपनी दाढ़ी को रंगने के लिए मेहंदी का इस्तेमाल करते थे तथा इसका उपयोग बीमारों के इलाज में करते थे। इसी बजह से, मेहंदी की रस्म को भारतीय उपमहाद्वीप व कई अरबी देशों में शादी के पूर्व की एक महत्वपूर्ण रस्म के रुप में मनाया जाता है।

मेहंदी का महत्व
मेहंदी विवाह के बंधन का प्रनीक है और इसलिए, इसे एक 'शगुन' माना जाता है। यह दंपती व उनके परिवारों के बीच के प्यार एवं स्नेह का प्रतीक है।

यहाँ इस परंपरा के साथ जुड़ी कुछ प्रचलित मान्यताएं हैं:
- दुल्हन के हाथों की मेहंदी का गहरा रंग जोडों के बीच के अटूट प्रेम को बयान करता है।
- मेहंदी का गहरा रंग दूल्हन तथा उसकी सास के बीच के प्रम व समझ को दर्शाता है।
- जितने दिनों तक दुल्हन के हाथों पर मेहंदी का रंग चढा रहता है, उसे नववरवधू के लिए उतना ही शुभ माना जाता है।
- मेहंदी को प्रजनन क्षमता का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व भी समझा जाता है।

औषधीय गुणों के लिए भी जानी जाती है
इसकी शीतलता तनाव, सिर दर्द और बुखार से राहत दिलाती है। नाखूनों को बढ़ाने में भी मेहंदी बहुत लाभकारी जड़ी बूटी है। अतः, शादी के तनाव से राहत पाने के लिए दूल्हा तथा दुल्हन को मेहंदी लगाई जाती है। यह शादी के पहले होने वाले किसी भी संभावित रोग से बचाती है।

मेहंदी की रस्म
मेहंदी की रस्म बहुत रंगीन, सुरमय तथा धूम धडाके से भरी होती है। रस्म के दौरान विभिन्न परिवारों की विभिन्न प्रथाएं होती है। आमतौर पर इस रस्म को शादी के एक दिन पहले पूरा किया जाता है तथा यह अक्सर 'संगीत' के प्रोग्राम के साथ आयोजित होती है। दुल्हन एवं परिवार की अन्य महिलाओं के हाथों तथा पैरों पर मेहंदी के आलंकारिक डिजाइन होते हैं। यह दोनों परिवारों के लिए मौज करने का, नाचने का तथा खाने पीने का अवसर है।

डिजाइन का आधुनिकीकरण
समय के साथ-साथ, मेहंदी के पारंपरिक डिजाइन और अधिक जटिल तथा सजावटी हो गए हैं। अब मेहंदी के कई सारे डिजाइन हैं तथा इनमें राजस्थानी व अरबी डिजाइन अधिक लोकप्रिय हैं। अब मेहंदी को क्रिस्टल तथा चमकी के साथ भी लगाया जाता है। प्रत्येक सुंदर डिजाइन बहुत जटिल होता है और खासकर दुल्हन के लिए बनाया जा सकता है। अब ये जटिल डिजाइन पैटर्न दुनिया भर की दुल्हनों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।



Click it and Unblock the Notifications