Latest Updates
-
No Bitterness Trick Karela Sabzi Recipe: अब घर पर बनाएं बिना कड़वाहट वाली चटपटी सब्जी -
घर में क्लेश और बार-बार होने वाली बीमारियों के पीछे हो सकती है बुरी नजर, दूर करने के लिए अपनाएं ये वास्तु उपाय -
Bihari Style Crunchy Chivda Namkeen Recipe: चाय के साथ लें कुरकुरे स्नैक का मजा -
Telangana Formation Day: 2 जून को जन्मा था तेलंगाना; जानें कैसे संघर्षों से लिखी नए राज्य की कहानी -
IRCTC vs RailOne: टिकट बुक करने के लिए कौन सा ऐप है सुपरफास्ट? पीक ऑवर्स में भरोसेमंद कौन? -
कुछ मिनटों के लिए धरती पर छा जाएगा अंधेरा, जानें कब लगेगा सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण? -
MBA ग्रेजुएट जो 25 लाख की नौकरी छोड़ बना कैब ड्राइवर, आज कमा रहा पहले से 4 गुना ज्यादा -
Kashmiri Style Dum Aloo Recipe: अब घर पर पाएं रेस्टोरेंट जैसा स्वाद -
इन 7 लोगों को गर्मियों में अंडों से करना चाहिए पूरी तरह परहेज, वरना बिगड़ सकती है तबीयत -
Global Parents Day पर हमारे पहले मेंटर, पहले लीडर और सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम माता-पिता को भेजें ये कोट्स
माथे पर लगाए जाने वाली पवित्र विभूति का महत्व
विभूति मात्र एक राख नहीं है जो पूजा के बाद माथे पर लकीर बन रह जाए। विभूति एक बहुमूल्य राख है जो कि एक विशेष प्रकार की लकड़ी को जलाने के बाद प्राप्त होती है। विभूति को गाय के गोबर या फिर चावल की भूसी से भी प्राप्त किया जा सकता है।
विभूति को आमतौर पर भगवान शिवा के साथ जोड़ा गया है क्योंकि वह अपने पूरे शरीर पर इस पवित्र राख को लगाते थे। विभूति के कई सारे आध्यात्मिक महत्व है भी हैं। पूजा में तांबे के बर्तन का उपयोग क्यूं किया जाता है?
यह इस दुनिया को इस बात की याद दिलाने का भी महत्व रखती है, कि हम सभी अस्थायी हैं और एक दिन हम सब को राख में ही नाश हो जाना होगा। आइये हम विभूति का महत्व जानते हैं और देखते हैं कि इसे हिंदू धर्म में पवित्र राख क्यूं मानी जाती है।

विभूति कैसे बनाई जाती है
श्मशान की भूमि, चावल की भूसी या गोबर आदि को जला कर विभूति तैयार की जाती है। कहीं कहीं विभूति को विषेश लकड़ी को जला कर बनाया जाता है।

प्रतीकात्मक अर्थ
विभूति मानव जाति के लिए चेतावनी है कि इंसान को सांसारिक इच्छाओं या माया के चारों ओर बंधना नहीं चाहिये। वासना और इच्छाओं का एक ही अंत होता है, जैसे कि कामदेव का अंत भगवान शिव ने उन्हें जला कर राख किया था।

शिव और शक्ती
विभूति आमतौर पर माथे, हाथ या गर्दन पर लगाई जाती है। यह एक लाल सिंदूर के तिलक के साथ लगाई जाती है। विभूति भगवान शिव और लाल सिंदूर शक्ति को दर्शाती है। यह प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व बयां करती है कि शिव और शक्ति ब्रह्मांड में केवल सत्य हैं।

औषधीय महत्व
विभूति को भस्मा के रूप में भी जाना जाता है, जिसका बहुत बड़ा औषधीय महत्व है। यह शरीर से अत्यधिक नमी को बाहर निकाल कर सोख लेता है और सिरदर्द तथा ठंड से बचाता है। इसे साधू साबुन की जगह पर नहाने के लिये प्रयोग में इसलिये लाते हैं क्योंकि इससे त्वचा अच्छी तहर से साफ हो जाती है।

विभूति का महत्व
विभूति भगवान शिव का एक पसंदीदा समान है। यह इस ब्रह्मांड में सबसे पवित्र और शुद्ध चीज़ के रूप में मानी जाती है। इसे भगवान शिव अपने पूरे शरीर पर लगाते थे। इसका कभी क्षय नहीं हो सकता और एक दिन पूरा संसार राख बन कर शिव के अंदर समा जाएगा।



Click it and Unblock the Notifications