Latest Updates
-
Aaj Ka Rashifal 21 June 2026: रविवार को इन 5 राशियों पर होगी धन वर्षा, सूर्य देव बदलेंगे आपका भाग्य -
Fried Onion Special Egg Do Pyaza Recipe: घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा लाजवाब स्वाद -
International Yoga Day 2026 Quotes: योग दिवस पर इन 30+ कोट्स के जरिए प्रियजनों को दें स्वस्थ रहने का संदेश -
Tandoor Style at Home Paneer Tikka Recipe: अब घर पर पाएं होटल जैसा स्मोकी स्वाद -
Yoga Day 2026 Wishes In Sanskrit: नित्यं योगाभ्यासः...इन संस्कृत संदेशों से अपनों को दें योग दिवस की बधाई -
Father's Day 2026: किसी ने छोड़ी स्मोकिंग, तो कोई निभाता है नैपी ड्यूटी, ये हैं बॉलीवुड के Super Dads -
Simple Aromatic Peas Pulao Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसा खिला-खिला मटर पुलाव -
International Yoga Day 2026: रोजाना योग करने से मिलेंगे ये 10 जबरदस्त फायदे, तन और मन रहेगा स्वस्थ -
Jamai Sasthi 2026: दामाद की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है व्रत, जानें जमाई षष्ठी का महत्व और मनाने का तरीका -
5 Minute Protein Masala Omelette Recipe: झटपट बनाएं होटल जैसा टेस्टी और हेल्दी नाश्ता
माथे पर लगाए जाने वाली पवित्र विभूति का महत्व
विभूति मात्र एक राख नहीं है जो पूजा के बाद माथे पर लकीर बन रह जाए। विभूति एक बहुमूल्य राख है जो कि एक विशेष प्रकार की लकड़ी को जलाने के बाद प्राप्त होती है। विभूति को गाय के गोबर या फिर चावल की भूसी से भी प्राप्त किया जा सकता है।
विभूति को आमतौर पर भगवान शिवा के साथ जोड़ा गया है क्योंकि वह अपने पूरे शरीर पर इस पवित्र राख को लगाते थे। विभूति के कई सारे आध्यात्मिक महत्व है भी हैं। पूजा में तांबे के बर्तन का उपयोग क्यूं किया जाता है?
यह इस दुनिया को इस बात की याद दिलाने का भी महत्व रखती है, कि हम सभी अस्थायी हैं और एक दिन हम सब को राख में ही नाश हो जाना होगा। आइये हम विभूति का महत्व जानते हैं और देखते हैं कि इसे हिंदू धर्म में पवित्र राख क्यूं मानी जाती है।

विभूति कैसे बनाई जाती है
श्मशान की भूमि, चावल की भूसी या गोबर आदि को जला कर विभूति तैयार की जाती है। कहीं कहीं विभूति को विषेश लकड़ी को जला कर बनाया जाता है।

प्रतीकात्मक अर्थ
विभूति मानव जाति के लिए चेतावनी है कि इंसान को सांसारिक इच्छाओं या माया के चारों ओर बंधना नहीं चाहिये। वासना और इच्छाओं का एक ही अंत होता है, जैसे कि कामदेव का अंत भगवान शिव ने उन्हें जला कर राख किया था।

शिव और शक्ती
विभूति आमतौर पर माथे, हाथ या गर्दन पर लगाई जाती है। यह एक लाल सिंदूर के तिलक के साथ लगाई जाती है। विभूति भगवान शिव और लाल सिंदूर शक्ति को दर्शाती है। यह प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व बयां करती है कि शिव और शक्ति ब्रह्मांड में केवल सत्य हैं।

औषधीय महत्व
विभूति को भस्मा के रूप में भी जाना जाता है, जिसका बहुत बड़ा औषधीय महत्व है। यह शरीर से अत्यधिक नमी को बाहर निकाल कर सोख लेता है और सिरदर्द तथा ठंड से बचाता है। इसे साधू साबुन की जगह पर नहाने के लिये प्रयोग में इसलिये लाते हैं क्योंकि इससे त्वचा अच्छी तहर से साफ हो जाती है।

विभूति का महत्व
विभूति भगवान शिव का एक पसंदीदा समान है। यह इस ब्रह्मांड में सबसे पवित्र और शुद्ध चीज़ के रूप में मानी जाती है। इसे भगवान शिव अपने पूरे शरीर पर लगाते थे। इसका कभी क्षय नहीं हो सकता और एक दिन पूरा संसार राख बन कर शिव के अंदर समा जाएगा।



Click it and Unblock the Notifications