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क्या है हिन्दू धर्म में पूजा के कमरे का महत्व?
हर एक हिन्दू घर में आप एक पूजा का कमरा ज़रूर पाएंगे। अगर आप ज़िंदगी के थपेड़े झेलते हुए अपने अंदर को टटोलना चाहते हैं तो एक जगह बेहद ज़रूरी है जो सिर्फ पूजा के लिए हो। हिन्दू धर्म में पूजा की अलग जगह बनाने को मान्यता दी गई है।
घर में एक पूजा का कमरा होने मात्र से जो लोग घर में रह रहे होते हैं उनको यह प्रतीत होता है कि भगवान असल में मालिक हैं और हम तो सिर्फ देखभाल करने के लिए हैं। रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अगर इस बात पर विचार किया जाए तो आप वेदांत के आसक्ति के सिद्धांत पर विश्ववास करने लगेंगे।

इससे आप निष्पक्ष हो जाएंगे और अपने कर्तव्य अलिप्त होकर पर बिलकुल मन से कर पाएंगे। सहभागिता इस बात को समझने से आती है कि किया जाने वाला काम अपना है। ज़िंदगी तब काफी आसान हो जाती है और यह एक नदी की तरह हो जाती है जो राह में बाधा आने पर भी बिना किसी थकान के समुद्र में मिल जाती है।
जब आप शांत वातावरण में पूरे दिल से पूजा करते हैं तो यह काफी लाभदायक सिद्ध होता है। इसलिए पूजा घर इसके लिए सही होता है। ध्यान लगाने पर मन का परमात्मा के साथ मिलन होता है। अगर आप मन करते हैं दिल के बोझ को हल्का करता है और श्रद्धालु की श्रद्धा को बढ़ाता है।
अगर अहम की वजह से आप भगवान को घर का मालिक नहीं मान सकते तो कम से कम अपने घर का सबसे प्रमुख गेस्ट तो मान ही सकते हैं। घर में पूजा का कमरा होने से भगवान से आपका भावुक बंधन बनता है। वह सर्व वयापक हैं और आपके घरों में भी रहते हैं। इसलिए पूजा के कमरे को इंसान की आध्यात्मिक यात्रा का द्वार भी माना गया है।



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