क्‍यों समान गोत्र में शादी नहीं करते है हिंदू, क्‍या है है गोत्र से जुड़ा विज्ञान?

गोत्र को सप्‍तऋषियों यानि सात ऋषियों का वंशज कहा जाता है। ये सात ऋषि अंगिरासा, अत्री, गौतम, कश्‍यप, भृगु, वशिष्‍ठ और भारद्वाज हैं। प्राचीन मान्‍यता के अनुसार वैदिक काल के दौरान गोत्र का वर्गीकरण अस्तित्व में आया था। इस रीति को खून के रिश्‍तों जैसे भाई-बहन आदि के बीच विवाह को रोकने के लिए किया गया था और इसके लिए कई कड़े नियम बनाए गए थे।

इंटरनेट पर उपलब्‍ध वैज्ञानिक शोध की मानें तो रक्‍त संबंधी रिश्‍तों में विवाह करने से असामान्‍य संतान का जन्‍म होता है और ये मेल आनुवांशिक रूप से बेमेल होता है। चौथी शताब्‍दी में सामाजिक नियमों और कानूनों को समायोजित करने के लिए गोत्र प्रथा की शुरुआत हुई थी। समय के साथ विवाह के लिए ये प्रथा सबसे ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण बन गई और आधुनिक समाज में भी इसकी पकड़ काफी मजबूत है।

ऐसे कई सवाल मन में उठते हैं जिनका जवाब मिलना जरूरी है, जैसे कि गोत्र लगभग 3000 से 4000 साल पहले बनाए गए थे और गोत्र के बाहर निरंतर विवाह हो रहे हैं, इसलिए क्‍या उनमें जींस की कोई कमी आई? हज़ारों सालों बाद भी गोत्र के आधार पर शादी करने का क्‍या तात्‍पर्य है ?

गोत्र प्रक्रिया की प्रसिद्ध पद्धति

गोत्र प्रक्रिया की प्रसिद्ध पद्धति

मनुष्य के शरीर में 23 जोड़े क्रोमोजोम के हैं और प्रत्येक जोड़ी में एक क्रोमोज़ोम पिता से आता है और दूसरा मां से। तो इस तरह हर कोशिका में 46 क्रोमोज़ोम होते हैं। इनमें से एक होता है सेक्‍स क्रोमोज़ोम जोकि व्‍यक्‍ति का लिंग निर्धारित करता है। अगर कोशिका में एक्‍सएक्‍स सेक्‍स क्रोमोज़ोम है तो संतान लड़की होगी और अगर एक्‍सवाई है तो संतान लड़का होगा।

एक्‍स और वाई

एक्‍स और वाई

जैविक तथ्‍यों के अनुसार केवल पुरुषों में ही वाई क्रोमोज़ोम होता है इसलिए लड़कों को वाई क्रोमोज़ोम हमेशा अपने पिता से और एक्‍स क्रोमोज़ोम अपनी मां से मिलता है। लेकिन लड़कियों को एक एक्‍स क्रोमोज़ोम पिता से और दूसरा मां से मिलता है। इसलिए वाई क्रोमोज़ोम लड़कों में हमेशा जीवित रहता है जबकि लड़कियों में ऐसा नहीं होता। उनका ये क्रोमोज़ोम मां बनने के बाद उनके पति पर भी निर्भर करता है।

वाई क्रोमोज़ोम और वैदिक प्रक्रिया

वाई क्रोमोज़ोम और वैदिक प्रक्रिया

वाई क्रोमोज़ोम सिर्फ पुरुषों में ही होता है, इसमें महिलाओं की कोई भूमिका नहीं है। इसलिए पूर्वजों से अलग वाई क्रोमोज़ोम मॉडर्न आनुवांशिकी में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। गोत्र प्रक्रिया किसी व्‍यक्‍ति के मूल को जानने के लिए स्‍थापित की गई थी। जैसे कि अगर कोई व्‍यक्‍ति अत्री गोत्र का है तो इसका मतलब है कि उसके वाई क्रोमोज़ोम हज़ारों सालों तक ऋषि अत्री से ही आए है। कितना बढिया लॉजिक है।

वाई क्रोमोज़ोम के एशिलेस हील

वाई क्रोमोज़ोम के एशिलेस हील

सिर्फ वाई क्रोमोज़ोम ही अकेला है जिसका मानव शरीर में कोई मैचिंग योग नहीं है। सृजन और विकास के लिए ये महत्‍वपूर्ण क्रोमोज़ोम पुरुषों की एक कमज़ोरी है - ये विकास की सामान्‍य प्रक्रिया से अलग दूसरे क्रोमोज़ोम से मिल नहीं पाते और हर पीढ़ी में बेहतर संस्‍करण में बाधा उत्‍पन्‍न करते हैं। इस वजह से आने वाले कुछ सालों में वाई क्रोमोज़ोम खत्‍म हो सकता है।

इस बात का है डर

इस बात का है डर

पता नहीं कि 23 क्रोमोज़ोम के जोड़ों में से कौन सा क्रोमोज़ोम वाई क्रोमोज़ोम की जगह लेगा। क्‍या इसका मतलब है कि पुरुषों का अस्तित्‍व खत्‍म हो जाएगा? इसके अलावा ऐसा माना जा रहा है कि वाई क्रोमोज़ोम के विकास का आकार घटता जा रहा है और ये अपने अधिकतर जीन खोता जा रहा है। एक ही गोत्र में विवाह करने से आनुवांशिक विकार हो सकते हैं और पुरुषों के वंश को बचाने के लिए एक ही गोत्र में विवाह को रोकना चाहिए।

जीन-विशिष्ट रोग

जीन-विशिष्ट रोग

यदि दो नरम जीन, एक मां और एक पिता से मिलकर संतान के अंदर प्रवेश करें तो उसे किसी जीन विशिष्‍ट रोग होने की संभावना ज्‍यादा रहती है। इसमें एक हज़ार से भी ज्‍यादा रोग हो सकते हैं जैसे - सिस्टिक फाइब्रोसिस, फेनिलकेटोनूरिया (पीकेयू), गैलेक्टोसिमिया, रेटिनोब्लास्टोमा, बीबीनिज्म, सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया, टे-साक्स रोग, ऑटिज्म, ग्रोथ हार्मोन की कमी, एडेनोसिन डेमिनेज की कमी और किशोर स्नायु डिस्ट्रोफी आदि।

शोध के परिणाम

शोध के परिणाम

हिंदू समाज में एक ही गोत्र में विवाह करने की परंपरा है लेकिन एक गोत्र में विवाह करने से बचना चाहिए। एक ही गोत्र में विवाह करने की प्रथा को रोकने के लिए इस शोध का हवाला दिया जा रहा है। एक ही गोत्र में विवाह होने से अव्यवहारिक जीन विकार की आंशका बढ़ जाएगी। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि एक ही गोत्र में विवाह करने वाले हर कपल के बच्‍चे में ये विकार हो।

शोधकर्ताओं का क्‍या है कहना

शोधकर्ताओं का क्‍या है कहना

शोधकर्ताओं ने कहा कि भारतीयों में यूरोप की तुलना में एल्‍ले आवृत्ति का अंतर ज्‍यादा है। एक ही गोत्र में शादी करने के कारण भारत में विकार संबंधित रोग सबसे ज्‍यादा बढ़ सकते हैं। हैल्‍डेन कहते हैं कि अगर सदियों पहले अंर्तजातीय विवाह करना सामान्‍य बात होती तो अव्यवहारिक जीन विकार का खतरा बहुत कम रहता है। इसका मतलब है कि ये बीमारी सिर्फ भारत में ही है।

सिद्धांत में है कमी

सिद्धांत में है कमी

कुछ समय पहले एक लेख प्रकाशित हुआ था जिसमें बताया गया था कि नज़दीकी रिश्‍तेदारों में शादी करने से बच्‍चों में कई प्रकार के आनुवांशिक विकार देखने को मिलते हैं। अगर ऐसा है तो मुस्लिमों में कजिन के बीच शादी होने पर इस बीमारी का खतरा सबसे ज्‍यादा रहना चाहिए और इस तरह से मुस्लिम आनुवांशिक रूप से संक्रमित होने चाहिए। लेकिन ऐसा तो कुछ हुआ नहीं है।

अन्‍य सिद्धांत

अन्‍य सिद्धांत

डिबंकिंग ने इससे पहले गोत्र प्रक्रिया की स्‍थापना का तर्क दिया था। एम.वी. अनजनेयालु का कहना है कि भाई-बहन होने की वजह से एक ही जाति में विवाह पर रोक नहीं लगानी चाहिए बल्कि उनके समाज के समान विकास के लिए इस पर रोक लगनी चाहिए। उदाहरणार्थ, भारद्वाज गोत्र में विवाह की अनुमति हहोगी तो भारद्वाज गोत्र का मानने वाले लोग कम हो जाएंगं। अगर किसी अन्‍य गोत्र की लड़की भारद्वाज गोत्र के लड़के से विवाह करती है तो वो भारद्वाज गोत्र को मानने वाली अन्‍य सदस्‍य हो जाएगी। इससे इस गोत्र को मानने वाले लोगों की संख्‍या में वृद्धि होगी।

पूर्वजों के बारे में नहीं है ?

पूर्वजों के बारे में नहीं है ?

एम.वी. अनजनेयालु के अनुसार गोत्र जन्‍म के आधार पर नहीं बल्कि आप किस गुरु को मानते हैं इस पर निर्भर करता था। उदाहरणार्थ, भारद्वाज परिवार के लोग ऋषि भारद्वाज को मानते थे। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वे सभी उस परिवार के सदस्‍य हो गए। एक ही जाति के अलग-अलग परिवार भारद्वाज को मान सकते हैं। इसलिए उन्‍हें भारद्वाज गोत्र का नाम मिला। अगर इस तर्क को माना जाए तो विवाह के लिए गोत्र की पूरी प्रक्रिया ही गलत है।

टैबू है

टैबू है

दिल्‍ली हाईकोर्ट और पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक ही गोत्र में विवाह पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया था। कई विद्वानों का दावा है कि एक ही गोत्र में विवाह करने से संतान की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता है। इसलिए गोत्र का टैबू सिर्फ सामाजिक है मेडिकल नहीं।

अस्‍वीकृति

अस्‍वीकृति

इस लेख में पूरी तरह से बताया गया कि है गोत्र प्रकिया की शुरुआत कैसे हुई। विवाह की आनुवंशिक व्यवहार्यता को सत्यापित करने का सर्वोत्तम तरीका डीएनए कंपैटिबिलिटी टेस्‍ट है जिससे भविष्‍य में होने वाली संतान के आनुवांशिक विकार की संभावना का पता चलता है।

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