वरलक्ष्मी पूजा: मनवांछित फल पाने के लिए महिलाएं इस विधि और मुहूर्त पर करें पूजा

इंसान जीवन में सुख समृद्धि और धन संपदा के लिए मेहनत के साथ भगवान का आशीर्वाद भी पाना चाहता है। सभी चाहते हैं कि उन पर माता लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहे। देवी लक्ष्मी को समर्पित वरलक्ष्मी का खास व्रत किया जाता है। हिंदू धर्म में वरलक्ष्मी व्रत को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

varalakshmi Pooja Vidhi and Vrat Katha

वरलक्ष्मी, स्वयं महालक्ष्मी का ही रूप हैं। ऐसी मान्यता है कि वरलक्ष्मी देवी का अवतार दूधिया महासागर अर्थात क्षीर सागर से हुआ था। उनका रंग दूधिया महासागर के रंग के रूप में वर्णित किया जाता है और वह रंगीन कपड़े में सजी होती हैं।

वरलक्ष्मी व्रत की तिथि

वरलक्ष्मी व्रत की तिथि

माता का ये रूप भक्तों की हर मनोकामना पूरी करता है। यही वजह है कि देवी के इस रूप को 'वर' और 'लक्ष्मी' के रूप में जाना जाता है। वरलक्ष्मी व्रत करने से घर की दरिद्रता दूर होती है और सुख संपत्ति में इजाफा होता है। वरलक्ष्मी का व्रत श्रावण माह के शुक्ल पक्ष के दौरान एक सप्ताह पूर्व शुक्रवार को मनाया जाता है। ये राखी और सावन पूर्णिमा से कुछ दिन पहले ही आता है। इस व्रत की अपनी ही महत्ता है।

वेदों, पुराणों तथा शास्त्रों के मुताबिक सावन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को वरलक्ष्मी जयंती मनाई जाती है। इस साल वरलक्ष्मी व्रत 9 अगस्त 2019 को मनाया जाएगा।

वरलक्ष्मी पूजन मुहूर्त

वरलक्ष्मी पूजन मुहूर्त

वरलक्ष्मी व्रत तिथि- 9 अगस्त 2019 (शुक्रवार)

सिंह लग्न पूजा मुहूर्त (प्रातः)- 06:41 से 08:44

अवधि- 2 घंटे 03 मिनट

वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त (दोपहर)- 12:53 से 15:05

अवधि- 2 घंटे 12 मिनट

कुम्भ लग्न पूजा मुहूर्त (संध्या)- 19:05 से 20:46

अवधि- 1 घंटा 42 मिनट

वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त (मध्यरात्रि)- 24:13+ से 26:16+

अवधि- 2 घंटा 02 मिनट

जानें वरलक्ष्मी व्रत पूजा की विधि और सामग्री

जानें वरलक्ष्मी व्रत पूजा की विधि और सामग्री

वरलक्ष्मी पूजा के लिए आप सभी सामग्री पहले से ही एकत्र कर लें। यहां हम उन सामग्रियों के बारे में बता रहे हैं जो खासतौर से वरलक्ष्मी व्रत पूजा के लिए जरूरी होती हैं। इसमें शामिल है- माता वरलक्ष्मी जी की प्रतिमा, फूल माला, कुमकुम, हल्दी, चंदन चूर्ण पाउडर, विभूति, शीशा, कंघी, आम पत्र, फूल, पान के पत्ते, पंचामृत, दही, केला, दूध, पानी, अगरबत्ती, मोली, धूप, कर्पुर, छोटी पूजा घंटी, प्रसाद, तेल दीपक तथा अक्षत।

जानें वरलक्ष्मी पूजा की विधि

जानें वरलक्ष्मी पूजा की विधि

वरलक्ष्मी का व्रत करने वाले व्यक्ति को प्रातः काल में जाग जाना चाहिए। घर की साफ़ सफाई करके स्वयं स्नानादि कर लें। अपने पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर लें और फिर व्रत का संकल्प लें।

माता लक्ष्मी की मूर्ति को नए कपड़ों, जेवर और कुमकुम से सजाएं। इसके बाद एक आसन पर गणपति जी की मूर्ति के साथ मां लक्ष्मी की मूर्ति को पूर्व दिशा में स्थापित करें। आप पूजा स्थल पर थोड़ा सा तांदूल (आखा चावल) फैलाएं। एक कलश में जल भरकर उसे तांदूल पर रखें। इसके बाद आप कलश के चारों तरफ चंदन लगाएं।

कलश के पास पान, सुपारी, सिक्का, आम के पत्ते आदि डालें। फिर एक नारियल लें और उस पर चंदन, हल्दी, कुमकुम लगाकर उसे कलश पर रख दें। एक थाली में लाल वस्त्र, अक्षत, फल, फूल, दूर्वा, दीप, धुप आदि से मां लक्ष्मी की पूजा करें। मां की मूर्ति के सामने दीपक जलाएं और साथ ही वरलक्ष्मी व्रत की कथा पढ़ें। पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद महिलाओं को बांटें। इस दिन व्रती को निराहार रहना चाहिए। रात के समय में आरती-अर्चना के बाद फलाहार करना बेहतर माना जाता है।

पढ़ें वरलक्ष्मी व्रत कथा

पढ़ें वरलक्ष्मी व्रत कथा

पौराणिक कथा के मुताबिक एक बार मगध राज्य में कुंडी नाम का एक नगर था। कुंडी नगर का निर्माण स्वर्ग से हुआ माना जाता था। इस नगर में एक ब्राह्मण महिला चारुमति अपने परिवार के साथ रहती थी। चारुमति कर्त्यव्यनिष्ठ औरत थी। वह अपने सास, ससुर एवं पति की सेवा और माता लक्ष्मी जी की पूजा-अर्चना कर एक आदर्श नारी का जीवन व्यतीत करती थी।

एक रात चारुमति के स्वप्न में मां लक्ष्मी आकर बोलीं, चारुमति हर शुक्रवार को मेरे निमित्त मात्र वरलक्ष्मी व्रत को किया करो। इस व्रत के प्रभाव से तुम्हें मनोवांछित फल प्राप्त होगा।

अगले सुबह चारुमति ने लक्ष्मी माता द्वारा बताये गए वरलक्ष्मी व्रत का समाज की अन्य महिलाओं के साथ विधिवत पूजन किया। पूजन के संपन्न होने पर सभी नारियां कलश की परिक्रमा करने लगीं, परिक्रमा करते समय सभी औरतों के शरीर तरह तरह के स्वर्ण आभूषणों से सज गए।

उनके घर भी सोने के बन गए और उनके पास घोड़े, हाथी, गाय आदि पशु भी आ गए। सभी महिलाओं ने व्रत की विधि बताने के लिए चारुमति की प्रशंसा की। कालांतर में यह कथा भगवान शिव जी ने माता पार्वती को कही थी। इस व्रत को सुनने मात्र से लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

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