Latest Updates
-
IND vs SL 2nd Test: कोलंबो में सीरीज जीत की दहलीज पर भारत, बारिश और पिच का क्या है हाल? -
Varalakshmi Vrat Katha: वरलक्ष्मी व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, धन से जुड़ी बाधाएं होंगी दूर -
Varalakshmi Vrat 2026 Wishes: मां लक्ष्मी का आशीर्वाद...वरलक्ष्मी व्रत पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Rakhi Gift Ideas For Sister: इस रक्षाबंधन बहन को दें ये 7 प्यार भरे तोहफे, देखते ही खुशी से झूम उठेगी -
World Mosquito Day 2026: मच्छरों के काटने से हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां, बचाव के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय -
पुरूषों को स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खानी चाहिए ये 7 चीजें, फर्टिलिटी में होगा सुधार -
घर में अचानक कॉकरोच निकलना शुभ या अशुभ? जानें ज्योतिष और वास्तु के संकेत -
40 की उम्र में भी नजर आएंगी 20 की, हेल्दी और ग्लोइंग स्किन के लिए डाइट में शामिल करें ये 7 फूड्स -
September Travel Destinations: सितंबर में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये भारत की ये 7 खूबसूरत जगहें, मिलेगा यादगार -
World Photography Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व फोटोग्राफी दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम
करवा चौथ व्रत 2017: जानें व्रत के महत्व, सरगी और कथा के बारे में
8 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत हैं, जिसमें सुहागिन महिलाएं तब तक अन्न का एक दाना नहीं खाएंगी, जब तक चंद्रदर्शन नहीं होंगे।
हिन्दू धर्म में मनाए जाने वाले विभिन्न त्यौहारों में , करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं की जिंदगी में अत्यधिक महत्व रखता है, जिसके तहत इस वर्ष 8 अक्टूबर को महिलाएं अपने पति की सुरक्षा और दीर्घायु की कामना के साथ इस व्रत को करेगी।

तो आइए जानते है इस व्रत के पीछे की क्या कहानी है ? इसे क्यूं मनाया जाता है और इस दिन महिलाएं किस प्रकार का भोजन बनाती है?

करवा चौथ और सरगी क्या है ?
विवाहित हिन्दू महिला अपने पति की दीर्घायु की कामना के साथ निर्जल व्रत रखेगी।
वे सरगी खाने के लिए सूर्योदय से पहले उठेगी, जो कि महिला की सास बनाएगी।
ये सरगी ज्यादातर सूखे मेवे, नारियल से बनी होती है और इसके साथ ज्वैलरी जैसे उपहार भी शामिल होते है।

कब खाते हैं सरगी
सरगी खाने के बाद, व्रत करने वाली महिलाएं जब तक चांद दिखाई नहीं देता तब तक पूरा दिन बिना कुछ खाए-पीए व्यतीत करती है।
महिलाएं इस दिन भगवान शिव, पार्वती और भगवान कार्तिकेय की आराधना भी करेगी।
शाम के समय, महिलाएं भगवान की पूजा कर उन्हें प्रसाद अर्पित करेगी और अपने पति की सुरक्षा और लंबी आयु के लिए प्रार्थना करेगी।
जब चांद दिखाई देगा, तो महिलाएं चांद और अपने पति के चेहरे को छलनी से देखेगी और पति अपनी पत्नी का उपवास तोड़ने के लिए उसे जल पिलाएगा।

अन्य परंपराएं
चांद दिखाई देने से पहले, महिलाएं एक सामूहिक समारोह का आयोजन करती है जहां वे पारंपरिक वेशभूषा यानि साड़ी या लहंगा में सज-धजकर एक सर्कल में बैठेंगी और करवा चौथ से जुड़ी कथा और गीत सुनाएगी।
अपने पति की दीर्घायु और पारिवारिक सुख-शांति के लिए महिलाएं मां पार्वती की प्रतिमा के समक्ष प्रार्थना करेगी और देवताओं को भोजन अर्पण करेगी।

करवा चौथ की कथा क्या है ?
करवा चौथ के व्रत से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा ये है कि एक वीरावती नामक कन्या थी जो सात भाईयों की इकलौती बहन थी।
युवावस्था में वीरावती का विवाह हो जाता है, वो अपना पहला करवा चौथ का व्रत अपने पिता के घर पर ही करती है, लेकिन शाम होते ही वो भूख-प्यास से बैचेन हो जाती है और चांद दिखने का बेसब्री से इंतजार करने लगती है ताकि चांद दिखने के बाद वो खाना खा सके और पानी पी सकें।
वीरावती के भाई जो कि अपनी बहिन से अत्यधिक स्नेह रखते थे वे उसकी ये स्थिति नहीं देख पाए, और उन्होंने एक ऐसी काल्पनिक छवि बनाई जो चंद्रमा के समान नजर आ रही थी। अनजाने में वीरावती इस झूठ को हकीकत मान लेती है।
लेकिन अपनी पूजा पूरी करने के बाद जैसी ही वीरावती अपना उपवास तोड़ने बैठी, कि तभी उसे ये संदेश मिलता है कि उसके पति की मृत्य हो गई, पति के जाने के गम में वो पूरी रात रोती रही।
फिर उसे देवी ने सपने में दर्शन देकर कहा कि अगर वो सच्ची श्रद्धा और निष्ठा के साथ करवा चौथ के व्रत को दुबारा करेगी तो वो अपने पति को जिंदा देख सकेगी।
देवी के वचन सुनकर वीरावती ने चौथ माता का व्रत पूर्ण भक्तिभाव के साथ किया, जिससे उसकी मुराद पुरी हुई और उसका पति सकुशल वापिस लौट आया।



Click it and Unblock the Notifications