Latest Updates
-
गणेश चतुर्थी के दिन कश्मीरी पंडित मानते हैं Pann Poshte, कुल देवी की पूजा से जुड़ी है परंपरा -
जयपुर का मोती डूंगरी गणेश मंदिर: जहां मेहंदी का प्रसाद जोड़ता है शादी की डोर, उमड़ी सिंगल लड़कों की भीड़ -
हरतालिका तीज व्रत कथा: जब नारद मुनि विष्णु विवाह का प्रस्ताव लेकर पहुंचे, मां पार्वती हुईं हैरान -
हरतालिका तीज 2026: क्या गर्भवती महिलाएं रख सकती हैं निर्जला व्रत, जान लें सावधानियां -
Ganesh Chaturthi 2026: ‘गणपति बप्पा मोरया’ से ‘देवा श्री गणेशा’ तक, गणेशोत्सव पर हिट रहे बॉलीवुड के ये गाने -
हरतालिका तीज: शिव-पार्वती के अटूट प्रेम का पावन पर्व, जानें पूजा के नियम और विधि -
Ganesh Chaturthi Decoration Ideas: गणेश चतुर्थी पर ऐसे सजाएं बप्पा का दरबार, कम खर्च में ये आइडियाज आएंगे काम -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर हाथों में लगी मेहंदी का चाहती हैं डार्क कलर, तो आजमाएं ये 4 आसान टिप्स -
Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर बप्पा के लिए घर पर बनाएं उनके प्रिय उकडिचे मोदक, जानें इसकी आसान रेसिपी -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
गुरुद्वारे या मंदिर में महिलाएं क्यो ढकती है सिर, जानिए इसके धार्मिक और वैज्ञानिक कारण
आपने अपने आसपास महिलाओं को अपना सिर ढककर पूजा करते हुए देखा होगा। मंदिर हो या गुरुद्वारा सब जगह महिलाएं आपको सिर ढके हुए नजर आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर महिलाएं क्यों धार्मिक स्थलों में या प्रार्थना करते वक्त सिर क्यों ढकते हैं। कई लोग इसे सम्मान की नजरों से देखते हैं लेकिन इस पराम्परा के पीछे भी कई धार्मिक और वैज्ञानिक मत भी है। सिर मनुष्य के अंगों में सबसे संवेदनशील स्थान होता है। इसलिए महिलाएं पूजा-अर्चना के वक्त सिर ढक लेते हैं।

सम्मान के लिए ढकती है सिर
इस पराम्परा के पीछे एक मान्यता है कि जिन्हें आप श्रेष्ठ और आदरणीय मानते हैं उनके सामने सिर को खुला नहीं रखना चाहिए। इसे सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है यही वजह है कि आज भी ग्रामीण परिवेश में महिलाएं अपने बड़ों के सामने सिर को ढ़ककर रखती हैं।

चुम्बकीय शक्ति होती है बालों में
माना जाता है कि आकाशीय विद्युतीय तरंगे खुले सिर वाले व्यक्तियों के भीतर प्रवेश कर क्रोध, सिर दर्द, आंखों में कमजोरी आदि कई प्रकार के रोगों को जन्म देती है। सिर के बालों में रोग फैलाने वाले कीटाणु सरलता से सम्पर्क में आते है, क्योंकि बालों में चुम्बकीय शक्ति होती है। सिर को ढंकने से इन कीटाणुओं से बचा जा सकता है।

नकरात्मक ऊर्जा से बचने के लिए
पूजा में सिर को ढकने के पीछे दूसरी धारणा यह भी है कि इससे नकरात्मक ऊर्जा का नाश होता है और ध्यान से एकत्रित सकारात्मक ऊर्जा शरीर में बनी रहती है। पूजा के समय पुरुषों द्वारा शिखा बांधने को लेकर भी यही मान्यता है। कहा जाता है कि सिर के मध्य में एक चक्र होता है। ऐसे में जब आप सिर को ढ़ककर पूजा करते हैं तो यह चक्र सक्रिय होता है। मान्यता है कि ध्यान केंद्रित करने के लिए भी सिर को ढंका जाता है।

सिर ढंकने का वैज्ञानिक तर्क
सिर ढंकने से गंजापन, बाल झड़ना और डेंड्रफ जैसी समस्या को दूर किया जा सकता है। आज भी हिंदू धर्म में परिवार में किसी की मृत्यु पर उसके संबंधियों का मुंडन किया जाता है। ताकि मृतक शरीर से निकलने वाले रोगाणु जो उनके बालों में चिपके रहते हैं। वह नष्ट हो जाए। स्त्रियां बालों को पल्लू से ढंके रहती है। इसलिए वह रोगाणु से बच पाती है। नवजात शिशु का भी पहले ही वर्ष में इसलिए मुंडन किया जाता है ताकि गर्भ के अंदर की जो गंदगी उसके बालों में चिपकी है वह निकल जाए। मुंडन की यह प्रक्रिया अलग-अलग धर्मों में किसी न किसी रूप में है।

सिक्ख में इसलिए ढकते हैं सिर
सिक्ख धर्म की ऐसी मान्यता है कि गुरुद्वारे में उपस्थित होने पर उस वातावरण के माध्यम से व्यक्ति का सिर विभिन्न प्रकार की सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करता है। यही ऊर्जा उसके सिर से बाहर ना निकले, इसीलिए वह सिर ढंकता है। माना गया है कि एक सिख केवल धार्मिक स्थलों में ही नहीं बल्कि हमेशा अपना सिर ढंक कर रखता है। उनका मानना है कि भगवान केवल गुरुद्वारे में नहीं बल्कि सभी जगह मौजूद है। इसीलिए सिखों में पगड़ी बांधकर हमेशा सिर को ढंकने का रिवाज़ है। पगड़ी बांधने का एक और कारण है बालों को सुरक्षित रखना, क्योंकि सिखों के बाल उनके लिए धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।



Click it and Unblock the Notifications
