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शिमला के इस टनल को माना जाता है भूतिया, जानें इससे जुड़ी कहानी
शिमला हिमाचल प्रदेश का सुंदर शहर है। शिमला हिल स्टेशन का शहर है। बर्फीलें पहाड़ा वाले इस शहर में देश-विदेश के लोगों को घूमने आते हैं। शिमला जैसे खूबसूरत शहर में ऐसी जगह भी है जहां अकेले जाना काफी डरावना है। शिमला में बड़ोग रेलवे स्टेशन के पास एक टनल नंबर 33 है। इस टनल के बारे में अफवाह है कि यहा भूत का साया है। चलिए जानते है क्या है टनल नंबर 33 की कहानी।

क्या टनल नंबर 33 की कहानी
ये कहानी ब्रिटिश राज के समय की हैं। लगभग 1898 के आसपास शिमला में ब्रिटिश अपना धर्मशाला बनाना चाहती थी। इसके उन्होंने शिमला में विकास के लिए प्ररियोजना बनाई गई थी। शमिला के विकास के लिए शिमला में रेवल लाइन बनाने का फैसला किया गया था। लेकिन रेलवे लाइन बनाने के लिए एक पहाड़ बीच में आ रहा था। जिसे हटाने के लिए ब्रिटिश सरकार ने इंजिनियर कर्नल बड़ोग को जिम्मेदारी दी थी।

इंजिनियर कर्नल बड़ोग ने टनल काम शुरु कर दिया। उन्होंने पहाड़ के दोनों तरफ से खुदाई शुरु करवाई लेकिन मजदूर द्वारा खुदाई सहीं नहीं होने की वजह से टनल नहीं बना पाया। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने उनसे ये काम वापस ले लिया। उस समय उन पर 1 रुपए का जुर्माना लगया था। कर्नल बड़ोग इस अपमान को सहन नहीं कर पाएं जिसके बाद उन्होंने सुरंग में आत्महत्या कर ली थी। जिसे आज टनल 33 के नाम से जाना जाता है। उनकी आत्महत्या के बाद वहां टनल का काम शुरु हुआ। टनल बनकर तैयार हो गई थी।

टनल बनने के बाद वहां आम लोगों का आना जाना शुरु हुआ है। सब लोग कर्नल बड़ोग की आत्महत्या को भूल गए थे। इसके बाद कई बार लोनों टनल में काला साया देखना शुरु किया जिसके बाद अफवाह फैल गई कि टनल में कर्नल बड़ोग की आत्मा हैं। इसके बाद टनल में लोहे का दरवाजा लगाकार तला भी लगा दिया गया था। अगले दिन ताला टुटा हुआ मिला। इसके बाद उस टनल पर कभी भी ताला नहीं लगाया गया। तब से शिमला टनल नंबर 33 भारत की डरावनी जगहों में से गिना जाने लगा।

बता दें कि बाद में इस टनल का नाम कर्नल बड़ोग के नाम पर रखा गया है। शिमला की ये टनल दुनिया की सबसे सीधी टनल में से एक है। यहां का रेलवे स्टेशन स्कॉटिश स्टाइल में बना हुआ है, जिसे देखने के लिए लोग देश-विदेश से आते हैं।



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