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Budget 2026: हिंदी नहीं इस विदेशी भाषा में छपता था हिंदुस्तान का बजट, आजादी के 13 साल बाद बदली परंपरा
Union Budget History: बजट को लेकर देशभर में चर्चा तेज है, जो आज यानी 1 फरवरी 2026 दिन रविवार को पेश होने वाला है। वित्त मंत्री निर्मल सीतारमण इस बार अपना नौंवा बजट पेश करने जा रही हैं जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 2026-27 के इस बजट तक पहुंचने का सफर काफी दिलचस्प रहा है। आज जहां केंद्रीय बजट हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध होता है, वहीं कभी ऐसा दौर भी था जब भारत का बजट हिंदी में नहीं, बल्कि एक विदेशी भाषा में छपता था।
आजादी के बाद भी यह परंपरा कई सालों तक जारी रही और फिर करीब 13 साल बाद इसमें बड़ा बदलाव हुआ। आप सोच रहे होंगे कि वो कौन सी भाषा थी जिसमें देश का बजट छपता था, तो चलिए हम उसका जवाब दे देते हैं। आइए जान लेते हैं बजट के बारे में दिलचस्प बातें...

कब पेश हुआ था पहला बजट?
क्या आप जानते हैं कि भारत का पहला बजट कब पेश किया गया था। बहुत से लोगों का जवाब यही होगा कि आजादी के बाद यानी 1947 के बाद। लेकिन ऐसा नहीं है, बल्कि भारत का पहला बजट साल 1860 में पेश हुआ था। देश का पहला बजट अंग्रेज अधिकारी जेम्स विल्सन ने पेश किया था। उनका उद्देश्य जनता को जवाब देना नहीं बल्कि सरकार के खर्च और टैक्स का हिसाब रखना था।
किस भाषा में छपता था भारत का बजट?
स्वतंत्रता के बाद शुरुआती वर्षों में भारत का केंद्रीय बजट पूरी तरह अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित और प्रस्तुत किया जाता था। ब्रिटिश शासन की प्रशासनिक व्यवस्था का प्रभाव इतना गहरा था कि आजादी के बाद भी सरकारी दस्तावेजों और आर्थिक नीतियों की भाषा अंग्रेजी ही बनी रही। इसका असर ये था कि गांव-देहात के लोगों के लिए अंग्रेजी भाषा समझना आसान नहीं था और इस वजह से बहुत से लोग ये जान ही नहीं पाते थे कि बजट में क्या नया आया है और क्या पुराना है।
क्यों हिंदी में नहीं पेश होता था बजट?
1947 में आजादी मिलने के बावजूद देश की प्रशासनिक और आर्थिक व्यवस्था ब्रिटिश ढांचे पर ही आधारित थी। अधिकांश वरिष्ठ अधिकारी अंग्रेजी भाषा जानते थे, साथ ही संसद और वित्त मंत्रालय में कामकाज अंग्रेजी में ही होता था। 60 के दशक तक आर्थिक शब्दावली का हिंदी में मानकीकरण नहीं हुआ था इन्हीं कारणों से बजट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज को हिंदी में लाने में समय लगा।

13 साल बाद बदली बजट की भाषा
करीब 1960 के आसपास पहली बार केंद्रीय बजट को हिंदी में भी आधिकारिक रूप से प्रकाशित किया गया। यह कदम संविधान में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिए जाने की भावना के अनुरूप था। इसके बाद धीरे-धीरे बजट दस्तावेजों, भाषणों और आर्थिक रिपोर्ट्स में हिंदी का प्रयोग बढ़ता चला गया। बजट का हिंदी में प्रकाशन सिर्फ भाषा परिवर्तन नहीं था, बल्कि यह आम जनता को आर्थिक नीतियों से जोड़ने की एक बड़ी पहल थी। साथ ही इससे सरकारी पारदर्शिता में इजाफा हुआ व आम नागरिक बजट की घोषणाओं को बेहतर समझने लगे।
आज कैसी है बजट की भाषा व्यवस्था?
आज केंद्रीय बजट हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में समान रूप से उपलब्ध होता है। इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बजट से जुड़ी जानकारियां अन्य भारतीय भाषाओं में भी पहुंचाई जाती हैं, जिससे आम जनता का जुड़ाव और मजबूत हुआ है।



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