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मिसिंग बच्चों' के डेटा पर बवाल, क्या फिल्म प्रमोशन के लिए फैलाई गई गलत जानकारी? दिल्ली पुलिस का खुलासा
Delhi Missing People News Fact Check: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया से लेकर न्यूज की हेडलाइन तक में बस एक ही मुद्दा गरमाया हुआ है और वो है दिल्ली से गायब हो रहे लोग। इस खबर ने सभी के दिलों में डर पैदा कर दिया है और हर कोई अपने घर से निकलते वक्त डर के साय में है। इन्हीं खबरों के बीच दिल्ली पुलिस ने हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे बच्चों के गायब होने वाले संदेशों पर कड़ा संज्ञान लिया है। पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर लापता बच्चों के डेटा को लेकर जो दहशत फैली थी, पुलिस ने उसे पूरी तरह भ्रामक और प्रायोजित अफवाह करार दिया है।
हैरानी की बात यह है कि इस खौफ के पीछे किसी अपराधी गिरोह का नहीं, बल्कि एक फिल्म के प्रमोशनल कैंपेन का हाथ होने की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है ताकि लोगों का ध्यान खींचा जा सके, लेकिन इसका नतीजा समाज में असुरक्षा की भावना के रूप में निकला। आइए जान लेते हैं क्या है पूरा मामला और इस पर दिल्ली पुलिस का क्या कहना है...

दिल्ली पुलिस का खुलासा
बीते कई दिनों से देश की राजधानी दिल्ली में हर दिन 54 लोगों के गायब होने की खबरें तेजी से फैल रही हैं। इन खबरों ने लोगों के मन में एक डर पैदा कर दिया है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि गायब बच्चों का सिर्फ शोर है या ये अफवाह है या फिर किसी फिल्म प्रमोशन के चक्कर में ऐसी फेक खबरें फैलाई जा रही हैं। ये तो आप जानते ही हैं कि राजधानी दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से व्हाट्सएप और फेसबुक पर लापता बच्चों के ग्राफिक्स और डेटा तेजी से शेयर किए जा रहे थे। दिल्ली पुलिस ने अब स्पष्ट कर दिया है कि यह किसी संगठित गिरोह की सक्रियता नहीं, बल्कि मार्केटिंग का एक गलत तरीका है।
क्या है गायब हो रहे लोगों का सच
दिल्ली पुलिस के अनुसार, कुछ प्रमोशनल कैंपेन से जुड़े लोगों ने लापता बच्चों के पुराने और अधूरे डेटा को इस तरह पेश किया जैसे दिल्ली में अचानक कोई संकट आ गया हो। पुलिस ने ऑफ-द-रिकॉर्ड पुष्टि की है कि एक बड़ी फिल्म की पीआर टीम ने अपने प्रोजेक्ट को रियल दिखाने के लिए इस्तेमाल किया। पुलिस और मुंबई पुलिस दोनों का मानना है कि यह 'डेटा-ड्रिवन डर' है, जिसका जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।
क्या है पुलिस का आधिकारिक डेटा
सोशल मीडिया पर तो गायब हो रहे लोगों का आंकड़ा बहुत अधिक बताया जा रहा है। मगर दिल्ली पुलिस के पीआरओ संजय त्यागी ने स्पष्ट आंकड़े पेश करते हुए कहा कि स्थिति सामान्य है। गायब लोगों के जितने आंकड़े दिखाए जा रहे हैं वो सही नहीं हैं। उनका कहना है कि जनवरी 2026 में पिछले वर्षों की तुलना में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग में कमी आई है।
कोई गिरोह सक्रिय नहीं
पुलिस ने जांच में पाया है कि लापता हो रहे लोगों को लेकर किसी भी तरह का संगठित गिरोह एक्टिव नहीं है। न ही किसी नेटवर्क या बच्चों को उठाने वाले किडनैपिंग सिंडिकेट का कोई सबूत मिला है। पुलिस ने बताया कि रिपोर्टिंग पूरी तरह पारदर्शी है और थाने से लेकर 112 हेल्प लाइन तक हर केस दर्ज किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने जनता को भरोसा दिलाया है कि वे लापता व्यक्तियों के मामलों को लेकर बेहद गंभीर हैं। हर जिले में मिसिंग पर्सन स्कैवड टीम तैनात है।
अफवाह फैलाने वालों पर होगी जेल
दिल्ली पुलिस ने उन लोगों और संस्थाओं को सख्त चेतावनी दी है जो डर का माहौल बना रहे हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अपुष्ट ग्राफिक्स या वायरल मैसेज पर भरोसा न करें। ये साफ कहा गया है कि सोशल मीडिया पर डर फैलाने वाली सामग्री शेयर करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नागरिकों को नहीं है पैनिक करने की जरूरत
पुलिस ने साफ किया है कि हर लापता व्यक्ति की रिपोर्ट तुरंत दर्ज की जाती है और बिना देरी किए ट्रेसिंग शुरू होती है। नागरिकों को पैनिक (Panic) करने की जरूरत नहीं है। पुलिस प्रशासन इस बात पर नजर रख रहा है कि मनोरंजन की आड़ में जनता की शांति भंग न की जाए।



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