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दुनिया का सबसे खतरनाक जहर? 1 बूंद से मौत पक्की, 'धुरंधर-2' में क्यों हुई डाइमिथाइल मरक्यूरी की चर्चा
Dhurandhar 2- World's Deadliest Slow Poison Fact Check: रणवीर सिंह की धुरंधर-2 ने इन दिनों बॉक्स ऑफिस को हिला कर रखा हुआ है। फिल्म की ताबड़तोड़ कमाई उसकी सक्सेस की कहानी बता रही है। इस मूवी ने न सिर्फ लोगों को एंटरटेन किया है बल्कि कई ऐसी जानकारियों से भी रू-ब-रू किया है जिसे बहुत कम लोग जानते थे। अगर आपने धुरंधर-2 देखी है तो उसमें भी 'डाइमिथाइल मरक्यूरी' की चर्चा की गई है। सोचिए एक ऐसा जहर, जिसकी मात्र एक बूंद अगर आपके हाथ के दस्ताने (Gloves) पर गिर जाए, तो वह उसे पार कर आपकी त्वचा में समा जाएगी। आपको पता भी नहीं चलेगा, कोई दर्द नहीं होगा, कोई जलन नहीं होगी, होगी तो सिर्फ मौत।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें इस जानलेवा जहर के बारे में बताया गया है। वहीं फिल्म देखने के बाद से लोगों के मन में इस जहर को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि ये कल्पना मात्र है या सच में ऐसा जहर होता है? आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं कि कैसे ये बनता है, कैसे काम करता है सब कुछ?

क्या है डाइमिथाइल मरक्यूरी?
फिल्म 'धुरंधर-2' में बड़े साहब यानी अंडरवर्ल्ड डॉन को बीमार करने के लिए जिस डाइमिथाइल मरक्यूरी की चर्चा की गई है वो कोई फिल्मी कल्पना नहीं, बल्कि विज्ञान की दुनिया का सबसे क्रूर और घातक स्लो पॉयजन है। यह इतना खतरनाक है कि इसे छूना तो दूर, इसकी गंध लेना भी मौत को दावत देना है। डाइमिथाइल मरक्यूरी एक ऑर्गेनोमर्करी कंपाउंड है। यह पानी की तरह रंगहीन तरल दिखता है, लेकिन पानी से तीन गुना भारी होता है।
इसे पहली बार 1858 में ब्रिटिश वैज्ञानिक जॉर्ज बकटन ने बनाया था। यह साधारण प्लास्टिक या लेटेक्स ग्लव्स को सेकंडों में भेदकर शरीर के अंदर घुस जाता है। शरीर में पहुंचते ही यह 'ब्लड-ब्रेन बैरियर' को पार कर सीधे मस्तिष्क की कोशिकाओं पर हमला करता है।
कैसे होता है 'स्लो पॉयजन' का खौफनाक असर
आपने ये तो जान लिया है कि ये पॉयजन कितना घातक है। अब ये भी जान लेते हैं कि ये कैसे असर करता है। इसे सबसे खतरनाक 'स्लो पॉयजन' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह तुरंत नहीं मारता। इसके लक्षण धीरे-धीरे दिखते हैं, जिसमें 3 से 5 महीने का समय लग सकता है। नीचे इस जहर के लक्षण के बारे में बताया गया है-
- हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन महसूस होना।
- चलने में लड़खड़ाहट, बोलने में दिक्कत और सुनने-देखने की क्षमता का खत्म होना।
- याददाश्त का पूरी तरह चले जाना, कोमा और अंत में दर्दनाक मौत।
कैसे इस जहर की भेंट चढ़े ये वैज्ञानिक
फिल्म 'धुरंधर-2' में दिखाए गए खौफ का सबसे बड़ा सबूत 1997 की एक वास्तविक घटना है। अमेरिका के डार्टमाउथ कॉलेज की मशहूर केमिस्ट केरन वेटरहान लैब में रिसर्च कर रही थीं। सुरक्षा के लिए उन्होंने लेटेक्स ग्लव्स पहने थे। काम के दौरान इस जहर की महज दो बूंदें उनके दस्ताने पर गिरीं। पहले उन्हें लगा कि ग्लव्स उन्हें बचा लेंगे, इसलिए उन्होंने तुरंत ध्यान नहीं दिया। इसका असर 5 महीने बाद दिखा जब उनके शरीर ने साथ छोड़ना शुरू किया। इलाज के दौरान उनके खून में पारे (Mercury) का स्तर सामान्य से 80 गुना ज्यादा पाया गया। तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
क्या इसका इलाज संभव है?
डाइमिथाइल मरक्यूरी का इलाज लगभग असंभव है। अगर यह जहर एक बार दिमाग तक पहुंच गया और नर्वस सिस्टम को डैमेज कर दिया, तो कोई भी दवा इसे ठीक नहीं कर सकती। इसकी गंध हल्की मीठी सी होती है जो सीधे दिमाग पर असर करती है। ये जहर त्वचा से सांस से और मुंह से शरीर में पहुंच सकता है और जान लेकर ही मानता है। ये जहर अमीनो एसिड के साथ मिलकर एक सुक्ष्म रूप बना लेता है।
धुरंधर-2 और हकीकत का मेल
फिल्म में जमील जमाली नाम के किरदार ने हमजा अली मजारी यानी रणवीर सिंह से कहा कि उन्होंने बड़े साहब यानी दाऊद इब्राहिम को बहुत पहले ये ये जहर दे दिया था। तभी से इसके बारे में लोगों ने रिसर्च करना शुरू कर दिया कि आखिर क्या है ये चीज। असल जिंदगी में यह रसायन इतना महंगा, दुर्लभ और हैंडल करने में जोखिम भरा है कि इसका इस्तेमाल किसी अपराध में लगभग नामुमकिन है। यह सिर्फ दुनिया की सबसे सुरक्षित लैब्स में रिसर्च के लिए इस्तेमाल होता है और अब कई देशों में इस पर कड़ा प्रतिबंध है।



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