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गुजरात में Black Magic पर कानून लाने वाला 7 वां राज्य बना, किन राज्यों में है ऐसा कानून और क्या है सजा?
गुजरात सरकार काले जादू को रोकने के लिए सख्त कानून लेकर आई है। बुधवारको अंधविश्वास विरोधी बिल सर्वानुमति से पारित हो गया। गुजरात विधानसभा में एक विधेयक पारित हुआ है। इस विधेयक में अन्य अमानवीय कृत्य और काला जादू जैसी प्रथा को रोकने के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान है लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के किस राज्य में सबसे ज्यादा काला जादू होता है।
इस कानून के अधिनियम की धारा-2 में आस्था और अंधविश्वास के बीच अंतर को समझाया गया है! जिसके मुताबिक अब गुजरात राज्य में मानव बलि, क्रूर प्रथाएं, काला जादू या ऐसे अन्य अमानवीयअन्य अमानवीय, बुरे कृत्यों का संचालन, प्रचार, प्रसार करना कानून जुर्म है। इस कानून में न्यूनतम 7 साल की ही सजा का प्रावधान है।

इस तरह का कानून बनाने वाला गुजरात देश का 7 वां राज्य बन गया है। इससे पहले महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और असम में अंधविश्वास निर्मूलन कानून लागू किया गया है। आइए जानते हैं कौनसे राज्य में इसे लेकर क्या कानून हैं और कानून के तहत क्या सजा हो सकती है?
बिहार में सबसे पहले बना था कानून
देश का सबसे पहला काले जादू पर कानून बिहार में बना था। जहां काला जादू, टोना के खिलाफ सबसे पहले कानून बनाया गया था। साल 1999 में बने इस कानून में बिहार मकाला जादू, जादू-टोना और डायन प्रथा पर रोक लगाता है। ऐसा ही एक कानून झारखंड में भी है।
ओडिशा में 2013 में आया कानून
ओडिशा में भी जादू-टोना के खिलाफ साल 2013 से ही कानून है। यह कानून ओडिशा में डायन शिकार और जादू-टोना करने से किसी भी व्यक्ति को रोकता है। इस कानून के तहत 1 से 3 साल तक की कैद की सजा हो सकती है।
छत्तीसगढ़ में टोना-टोटका पर पांच साल की सजा
छत्तीसगढ़ सरकार ने साल 2015 में टोनाही प्रताड़ना निवारण कानून बनाया था। इस कानून के जरिए जादू-टोना के नाम पर किसी व्यक्ति को भ्रमित करना और झाड़-फूंक और टोना-टोटका पर भी रोक लगाता है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर पांच साल तक कैद की सजा हो सकती है।
महाराष्ट्र में सात साल तक हो सकती सजा
महाराष्ट्र में भी साल 2013 से ही काला जादू को लेकर कानून बना था। जो काला जादू, जादू-टोना, मानव बलि और बीमारियों के इलाज के नाम पर तंत्र-मंत्र पर रोक लगाता है। ऐसा करने वालों या लोगों के अंधविश्वास का फायदा उठाने वालों को इसके तहत सजा का प्रावधान है। महाराष्ट्र में इस कानून के तहत छह महीने से लेकर सात साल तक की सजा हो सकती है। इसके तहत 50 हजार रुपये तक का जुर्माना भी दोषी पर लगाया जा सकता है।
कर्नाटक में 2020 में बना था कानून
कर्नाटक सरकार भी 2020 में काला जादू के खिलाफ कानून लाई थी. कर्नाटक में यह कानून जादू-टोना, काला जादू और अंधविश्वास के नाम पर आम लोगों को नुकसान पहुंचाने वाले 16 कृत्यों पर रोक लगाता है। ऐसा करने पर अलग-अलग धाराओं में कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है।
राजस्थान और असम में भी है ये कानून
राजस्थान और असम की सरकारें भी साल 2015 में ही इसके खिलाफ कानून बना चुकी हैं।



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