Latest Updates
-
क्या आपने कभी खाया है 'हरामजादा' और 'गधा' आम? मिलिए Mango की उन 14 किस्मों से जिनके नाम हैं सबसे अतरंगी -
Mother's Day 2026 Wishes for Bua & Mausi: मां जैसा प्यार देने वाली बुआ और मौसी को भेजें मदर्स डे पर ये संदेश -
Periods Delay Pills: पीरियड्स टालने वाली गोलियां बन सकती हैं जानलेवा, इस्तेमाल से पहले जान लें ये गंभीर खतरे -
वजन घटाने के लिए रोज 10K कदम चलना सबसे खतरनाक, एक्सपर्ट ने बताए चौंकाने वाले दुष्परिणाम -
Maharana Pratap Jayanti 2026 Quotes: महाराणा प्रताप की जयंती पर शेयर करें उनके अनमोल विचार, जगाएं जोश -
Shani Gochar 2026: रेवती नक्षत्र में शनि का महागोचर, मिथुन और सिंह सहित इन 5 राशियों की लगेगी लॉटरी -
Aaj Ka Rashifal 9 May 2026: शनिवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी शनिदेव की कृपा, धन लाभ के साथ चमकेंगे सितारे -
Mother Day 2026: सलाम है इस मां के जज्बे को! पार्किंसंस के बावजूद रोज 100 लोगों को कराती हैं भोजन -
Aaj Ka Rashifal 08 May 2026: शुक्रवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, जानें अपना भाग्यशाली अंक और रंग -
Mother’s Day 2026: इस मदर्स डे मां को दें स्टाइल और खूबसूरती का तोहफा, ये ट्रेंडी साड़ियां जीत लेंगी उनका दिल
न थकी, न रुकी.. पार्किंसंस की बीमारी के बावजूद भी रोजाना 100 मरीजों को खिचड़ी खिलाती हैं किरण कामदार
Parkinson's Warrior : 64 वर्षीय किरण कामदार, महाराष्ट्र के पालघर में रहने वाली एक साधारण-सी महिला, आज पूरे जिले में 'खिचड़ी आजी' के नाम से पहचानी जाती हैं। वह पार्किंसंस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं, लेकिन उनकी सेवा भावना और इच्छाशक्ति ने उन्हें आम से खास बना दिया है।
बीमारी के बावजूद वह हर दिन सुबह 5 बजे उठकर मरीजों के लिए खिचड़ी बनाती हैं और पालघर के डीएम पेटिट सरकारी अस्पताल में खुद पहुंचकर उसे परोसती हैं।

सेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य
किरण को सात साल पहले पार्किंसंस की बीमारी का पता चला था। पहले तो यह खबर उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। वह पहले से ही सामाजिक कार्यों में सक्रिय थीं और पिछले 20-25 सालों से गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रही थीं। लेकिन जब बीमारी का पता चला, तो परिवार को लगा कि शायद अब उनका सक्रिय जीवन रुक जाएगा। मगर किरण ने हार नहीं मानी। बीमारी से टूटने की बजाय, उन्होंने इसे हराने के लिए सेवा का मार्ग चुना।
ऐसा आया मरीजों को खिचड़ी परोसने का आइडिया?
बीमारी का पता चलने के बाद दो साल तक उन्होंने घर पर ही समय बिताया। लेकिन उनका मन हमेशा कुछ करने को बेचैन रहता था। इसी दौरान 2021 में एक दिन वह अपनी बेटी पलक के साथ उसकी एक बीमार दोस्त को अस्पताल में देखने गईं। उस समय कोविड की दूसरी लहर का दौर था, और अस्पताल में भीड़ देखकर किरण को झटका लगा। मरीजों को पौष्टिक भोजन नहीं मिल रहा था, यह देख उनका मन व्यथित हो उठा। वहीं से उन्हें खिचड़ी परोसने का विचार आया।
इसके बाद किरण ने पालघर के उपायुक्त से मुलाकात की और अपनी योजना साझा की। अनुमति मिलने के बाद उन्होंने खुद अपने रसोईघर में खिचड़ी बनाना शुरू किया और अस्पताल जाकर मरीजों को बांटना शुरू किया। देखते ही देखते यह उनकी दिनचर्या बन गई। पिछले पांच सालों से वह एक भी दिन नहीं चूकीं। हर दिन 100 से अधिक मरीजों और उनके परिजनों को गरमा-गरम खिचड़ी परोसती हैं।
मरीजों की उम्मीद बनीं किरण
पालघर के डीएम पेटिट अस्पताल में जैसे-जैसे दोपहर करीब आता है, मरीजों को किरण का इंतजार होने लगता है। वह ट्रॉली पर खिचड़ी से भरे डिब्बे लेकर अस्पताल पहुंचती हैं और एक कमरे से दूसरे कमरे में जाकर लोगों को खाना देती हैं। कई मरीज ऐसे हैं जिनका कोई सहारा नहीं है, लेकिन किरण की वजह से उन्हें भरपेट भोजन मिल जाता है।
जज्बे को सलाम
किरण कामदार का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सेवा और दृढ़ निश्चय से हर चुनौती को मात दी जा सकती है। आज वह सिर्फ खिचड़ी नहीं परोसतीं, बल्कि उम्मीद और प्रेम भी बांटती हैं। 'खिचड़ी आजी' के नाम से मशहूर किरण, न सिर्फ एक सामाजिक प्रेरणा हैं, बल्कि इस बात की मिसाल भी हैं कि उम्र या बीमारी सेवा के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती।
परिवार ने भी की खूब मदद
किरण कामदार के सेवा कार्य में उनके परिवार ने भी पूरा साथ दिया। बीमारी का पता चलने के बाद कई न्यूरोलॉजिस्ट से इलाज कराया गया, जिनका मानना था कि ऐसे मरीजों को सक्रिय रखना जरूरी होता है। किरण भी जानती थीं कि अच्छा खाना सेहत में सुधार लाता है। परिवार ने उनके खिचड़ी परोसने के फैसले को सराहा और समर्थन दिया। बेटी पलक बताती हैं कि सेवा में व्यस्त रहने से किरण की स्थिति बेहतर हुई है और आज भी वह शुरुआती दवाइयों पर ही हैं।



Click it and Unblock the Notifications