Latest Updates
-
DHT: क्या है डायरेक्ट हेयर ट्रांसप्लांटेशन? जानें बालों की रिग्रोथ के लिए कितनी कारगर है यह तकनीक -
Captain Smit Machchhar: कैप्टन 'स्मित मच्छर' के सरनेम का क्या है मतलब? जानें इसके पीछे की दिलचस्प कहानी -
नुसरत भरूचा की रीढ़ की हड्डी में हुआ फ्रैक्चर, एयरलिफ्ट कर बाली से लाई गईं मुंबई, वीडियो देख फैंस हुए परेशान -
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जानें जरूरी नियम और पारण का समय -
Jitiya Vrat Katha: जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत में जरूर करें इस कथा का पाठ, पूरे साल सुरक्षित रहेगी संतान -
Jitiya Vrat 2026 Wishes: संतान की लंबी उम्र...जितिया व्रत के अवसर पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026: क्या आप जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री का असली नाम? जानें 10 रोचक तथ्य -
Gandhi Jayanti 2026: गांधी जी को 'बापू' क्यों कहा जाता है? जानें किसने दी थी 'महात्मा' की उपाधि -
Gandhi Jayanti Wishes 2026: हाथ में लाठी थी...गांधी जयंती पर अपनों को ये खास मैसेज भेजकर दें शुभकामनाएं -
Gandhi Jayanti 2026 Essay, Speech: गांधी जयंती पर ऐसे करें भाषण और निबंध की तैयारी, मिलेगा इनाम
इस रेस्त्रां में लोग कब्रों के बीच में बैठकर खाते है खाना
अहमदाबाद का एक रेस्त्रां जो कब्रों के पास बिठाकर अपने कस्टमर्स को फूड सर्व करता है। आइए जानते है इस अनोखे रेस्त्रां के बारे में।
क्या आपने कभी किसी ऐसे रेस्त्रां में बैठकर चाय पी है? जहां आस पास कब्र हो, कब्र भी एक दो नहीं पूरी 26 । आप सोच रहे होंगे कि हम रेस्त्रां की बात कर रहें है या किसी कब्रिस्तान की। आज हम आपको एक ऐसे रेस्त्रां के बारे में बताने जा रहे है। जिसके अंदर कस्टमर्स कब्रों की बीच में बैठकर अपनी चाय और स्नैक को एंजॉय करते है। जी हां हम बात कर रहे है अहमदाबाद के लाल दरवाजा स्थित न्यू लकी रेस्टोरेंट के बारे में।
यह कैफे अपने चाय और बन मस्का से ज्यादा रेस्त्रां के बीचों बीच बने कब्रों की वजह से ज्यादा जाना जाता है। यहां तक कि मशहूर आर्टिस्ट एमएफ हुसैन भी इस रेस्त्रां में आकर कई दफा चाय पी चुके हैं।

कभी था टी स्टॉल
इस रेस्त्रां की शुरुआत 1950 में मुस्लिम कब्रिस्तान के बाहर एक छोटे से टी स्टॉल के रुप के एच मुहम्मद ने की थी। इसके बाद जैसे जैसे यह जगह पॉपुलर होने लगी। उन्होंने इस रेस्त्रां को धीरे धीरे कब्रों के आसपास तक फैलाना शुरु किया। कई सालो तक यह रेस्त्रां चलाने के बाद उन्होंने यह रेस्त्रां कृष्णन् कुट्टी नायर को बेच दिया।
image source

26 कब्रे है रेस्त्रां में
इस रेस्त्रां के अंदर बीचो बीच करीब 26 कब्रे बनी हुई हैं। यहां आने वाले लोग इस कैफे की सिग्नेचर डिश बन मस्का और चाय को इन मरे हुए लोगों के साथ एंजॉय करते हैं। इन कब्रों की सलामती के लिए इन्हें चारों तरफ से लोहे की सलाखों से सील कर दिया गया है। इसके अलावा वो ध्यान रखते है कि इन कब्रों की रोजाना सफाई होनी चाहिए और इन्हें चमकदार कपड़े के साथ ही फूलों से सजाया जाता है।

एम एफ हुसैन ने गिफ्ट की थी पेंटिंग
विश्व के जाने माने आर्टिस्ट एमएफ हुसैन यहां नियमित तौर पर आया करते थे। उन्हें इस रेस्त्रां का अनुभव इतना अच्छा लगा कि उन्होंने इस रेस्त्रां के ऑर्नर को खुद के द्वारा बनाई गई एक पेंटिंग गिफ्ट की थी। जो आज भी इस रेस्त्रां की एक दिवार की शोभा बढ़ाए हुए है।
Image Source

कई देसी विदेशी मीडिया ने किया है कवर
इस रेस्टोरेंट्स के बारे में अभी तक कई इंटरनेशनल मीडिया तक कवर कर चुकी है। हिस्ट्री टीवी पर तो इस रेस्टोरेंट पर बनाए गए डॉक्यूमेंट्री को तो 9 घंटे में ऑनलाइन अपलोड करने के 9 घंटे के अंदर ही 4 लाख 60 हजार दर्शक ने इस शॉर्ट मूवी को देखा।

जितनी मुंह उतनी बातें
कब्र के आस पास बैठकर खाना खाने या चाय पीने से किसी को कोई दिक्कत नहीं है। यहां रोजाना अच्छी खासी भीड़ इस रेस्त्रां में आता में है। कई लोग कब्र के पास बैठकर खाना खाने को अच्छी नजर से नहीं देखते है। उनका कहना है कि यह उन मृत लोगों के लिए एक तरह से तिरस्कार है जो कब्र के अंदर दफन है। वहीं इस रेस्त्रा के मालिक कृष्णन कुट्टी का कहना है कि यह कब्रिस्तान उनके लिए गुड लक लेकर आया है इसी की वजह से हमारा बिजनस फल फूल रहा है। इसकी वजह से लोगों को एक अलग तरह का एक्सपीरियसं मिलता है। वो बताते है कि हमने इन क्रबों को वैसे ही रखा है, जैसे वो पहले थे। हमारे कस्टमर्स को भी आज तक इनसे कोई दिक्कत नहीं हुई।



Click it and Unblock the Notifications
