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फुट बाइंडिंग: सेक्स और सुंदरता के लिए चाइनीज महिलाओं के पैरो का होता था ये हश्र
एक कहावत है कि महिला की सुंदरता का पैमाना उसके पांव से होता है। लेकिन चीन, ताईवान और जापान जैसे देशो में सुंदरता के नाम पर महिलाओं के पैरों को कसकर क्रूरता से बांध दिया जाता था और कभी पांव के पंजों को बढ़ने नहीं दिया जाता था।
हालांकि एक सदी पहले ही इस क्रूर प्रथा को चाइना और कई देशो में बैन लगा दिया गया है। लेकिन अब भी कई महिलाएं है जो 'लोटस फीट' के साथ दिखाई देती हैं। हालांकि माना जाता है कि 'लोटस फीट' परंपरा को फॉलो करने वाली ये आखिरी पीढ़ी हैं।
भले ही आपको ये पैर दिखने में अजीबोगरीब लगते हों, लेकिन सच ये है कि इनकी ये हालत 'खूबसूरत पैर' बनाने के कारण हुई है। चीन में यह परंपरा पाई जाती थी जिसमें महिलाओं के पैरों को छोटा रखने के लिए बांध दिया जाता था।

एक हजार साल रही ये पराम्परा
फुट बाइंडिग यह पराम्परा चीन में करीब 1,000 से अधिक वर्षों तक अस्तित्व में थी। युवा लड़कियों के पैरों पर विकास को दबाने के लिए बहुत ही निदर्यता के साथ तंग कपड़े से बांध दिया जाता था। कहा जाता था कि ऐसे करने से इन लड़कियों की शादी अच्छे घरों में होती थी।

अजीब मानसिकता की वजह से अस्तित्व में आई
कहा जाता था जिन महिलाओं के पैर लोटस फीट होते थे उन्हें अपने शहर या गांव की सबसे सुंदर महिलाओं में गिना जाता था। लेकिन अब यह महिला अपने पैरों पर अपने शरीर का वजन भी ठीक से नहीं उठा पाती। वह कुछ ही कदम चल पाती है।

खूबसूरती के प्रतीक
लोग महिलाओं के ऐसे पैरों को ‘खूबसूरती के प्रतीक' के तौर पर देखते थे। धनी लोग यह भी मानते थे कि महिलाओं के पैर छोटे होने चाहिए क्योंकि उन्हें किसी तरह का काम करने की जरूरत नहीं है।

बेहतर सेक्स लाइफ के लिए
फुट बाइंडिग की वजह दरअसल एक और वजह थी। माना जाता था कि जिन लड़कियों के लोट्स फीट होते थे, उनसे शादी करके सेक्स लाइफ बेहतर होती थी।

शादी करने के लिए जरुरी थे पांव को बांधना
लोट्स फीट की आखिरी जनरेशन की एक वृद्व महिला सु जी रॉन्ग ने बताया कि अगर वह तब अपने पैरों की बाइंडिंग नहीं कराती तो उसकी शादी नहीं होती। उसने यह भी कहा कि जब अपने बंधे हुए पैरों को उसने खोलने की कोशिश की तो ग्रैंड पेरेंट्स ने उसने स्किन का एक टुकड़ा सजा के तौर पर काट दिया।



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