Latest Updates
-
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
World Nature Conservation Day 2026: क्यों मनाते हैं विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
World Hepatitis Day 2026: हेपेटाइटिस क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण, प्रकार और बचाव के उपाय -
CJP के बाद किसने शुरू की E20 जनता पार्टी? सोशल मीडिया पर जुड़े लाखों फॉलोअर्स, जानें क्या है मांग -
कौन हैं Indian Idol 16 की विनर ज्योतिर्मयी नायक? कैंसर मरीजों को देती थीं थेरेपी, अब है ये सपना -
Bank Holidays August 2026: अगस्त में 14 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट -
APJ Abdul Kalam Death Anniversary: सपनों को पूरा करने का हौसला देते हैं डॉ. कलाम के ये 10 प्रेरणादायक विचार -
Jaya Parvati Vrat Katha: जया पार्वती व्रत में जरूर करें इस व्रत कथा का पाठ, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद -
Jaya Parvati Vrat 2026: जया पार्वती व्रत आज से शुरू, जानें पूजा मुहूर्त, विधि और महत्व -
National Parents Day 2026 Wishes: आपकी उंगली पकड़कर चलना सीखा...पेरेंट्स डे पर माता-पिता को भेजें ये खास संदेश
खुद को 'माताजी' कहने वाले इस 82 वर्ष के बुजुर्ग ने 77 सालों से नहीं खाया है अन्न का दाना
आपने आखिरी बार खाना कब खाया था? शायद 2 घंटे पहले या 3 घंटे पहले। हम आपको मिलाते हैं ऐसे शख़्स से जिन्हें याद नहीं कि उन्होने अंतिम बार खाना कब खाया था। जी हाँ, प्रहलाद जानी को खाना खाये कई साल हो चुके हैं। केवल हवा के सहारे ज़िंदा रहने वाले प्रहलाद का कहना है कि उन्होने 77 सालों से ना कुछ खाया है और ना कुछ पिया है। मां दुर्गा की आराधना करने वाले प्रहलाद जानी का कहना है कि वे 100-200 किलोमीटर जंगल में वॉक करने जाते हैं और 12 घंटे ध्यान करते हैं, उन्हें कभी थकान या भूख का एहसास नहीं होता है। हम इनके दावे को यहीं नकार सकते हैं, लेकिन कहानी अभी बाकी है।

15 दिन डॉक्टरों की निगरानी में रहें
मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक सप्ताह या ज़्यादा से ज़्यादा 10 दिनों से ज़्यादा बिना पानी के कोई रह नहीं सकता है। ‘माताजी' के नाम से जाने वाले प्रहलाद को गुजरात में 15 दिन मेडिकल देखभाल में रखा गया। इस दौरान उन्होने ना कुछ खाया और ना ही कुछ पिया।

डॉक्टरों के लिए बनी पहेली
सीसीटीवी कैमरे के जरिए तीन सौ डॉक्टरों की टीम 10 दिन तक प्रह्लादभाई पर नजर रखी। इस दौरान उन्होंने न कुछ खाया,न पिया। भूख का कोई नामो-निशान नहीं। डॉक्टरों को समझ नहीं आया कि ऐसा कैसे हो सकता है। मेडिकल साइंस इसकी इजाजत नहीं देती लेकिन ऑपरेशन भूख के नतीजे उनके सामने थे। दुनिया में अब तक की ये पहली घटना थी। भारती की एक चलती-फिरती पहेली ने डॉक्टरों को भी हैरत में डाल दिया था।

ब्रीद्रियनिज़्म से जिंदा
डॉक्टर्स को भी यकीन नहीं हुआ कि एक व्यक्ति कुछ भी नहीं खा पी रहा, वह ज़िंदा भी है और पेशाब और दस्त भी नहीं जा रहा है।
योगी को हजारों डॉक्टर्स ने सीसीटीवी कैमरा में निरंतर देखा। टॉयलेट सीट भी सील थी और उनके कपड़ों पर भी पेशाब और मल के निशान देखें जाते थे, पर उन्हें कुछ नहीं मिला।
चाहे उन्हें मेडिकल टेस्ट के लिए कमरे से बाहर जाना हो, उन पर कड़ी नज़र थी। इतना ही नहीं 15 दिनों तक उन्हें न तो मुंह धोने दिया और ना ही नहाने दिया गया।
ब्रीद्रियनिज़्म यानि सिर्फ साँसों से ज़िंदा रहने का मतलब है बिना भोजन पानी के ज़िंदा रहना।

विज्ञान जगत के लिए बने चनौती
डॉक्टरों का मानना है कि कोई भी वयस्क व्यक्ति बिना खाना खाए 30 से 40 दिन तक जीवित रह सकता है। लेकिन बिना पानी के पांच दिन से ज्यादा जिन्दा रहना सम्भव ही नहीं है। ऐसे में प्रहलाद जानी विज्ञान जगत के लिए एक चुनौती बने हुए हैं। प्रहलाद जानी भारतीय योग की शक्ति के अभिन्न उदाहरण हैं।



Click it and Unblock the Notifications