Latest Updates
-
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
World Nature Conservation Day 2026: क्यों मनाते हैं विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
World Hepatitis Day 2026: हेपेटाइटिस क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण, प्रकार और बचाव के उपाय -
CJP के बाद किसने शुरू की E20 जनता पार्टी? सोशल मीडिया पर जुड़े लाखों फॉलोअर्स, जानें क्या है मांग -
कौन हैं Indian Idol 16 की विनर ज्योतिर्मयी नायक? कैंसर मरीजों को देती थीं थेरेपी, अब है ये सपना -
Bank Holidays August 2026: अगस्त में 14 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट -
APJ Abdul Kalam Death Anniversary: सपनों को पूरा करने का हौसला देते हैं डॉ. कलाम के ये 10 प्रेरणादायक विचार -
Jaya Parvati Vrat Katha: जया पार्वती व्रत में जरूर करें इस व्रत कथा का पाठ, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद -
Jaya Parvati Vrat 2026: जया पार्वती व्रत आज से शुरू, जानें पूजा मुहूर्त, विधि और महत्व
पुराने जमाने में अनचाहे गर्भ से ऐसे बचा करते थे लोग... नींबू, आलू और पपीते का होता था प्रयोग
आइए जानते है कि पुराने समय में लोग अनचाहे गर्भ से बचने के लिए कैसे कैसे गर्भ निरोधक तरीके अपनाते थे।
क्या आपने कभी सोचा है कि पुराने जमाने में लोग अनचाहे गर्भ से बचने के लिए क्या उपाय करते होंगे? जबकि उस समय में तो कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स और कंडोम जैसे उपाय भी नहीं थे।
आपको लगता होगा कि गर्भ निरोध के उपाय आधुनिक जमाने की खोज है। परंतु प्राचीन काल में भी कई उपायों को गर्भ निरोध के रूप में आज़माया जाता था। हालांकि वैज्ञानिक अनुसंधान के कारण आज हमारे पास कई कारगर तरीके उपलब्ध हैं, जबकि प्राचीन उपायों की पुष्टि करना थोड़ा कठीन है।
लेकिन कुछ जानकारियों से यह मालूम चलता है कि प्राचीन काल के उपाय कुछ ज्यादा सफल नहीं थे और कुछ उपायों तो ऐसे थे जिनके बारे में न तो आपको मालूम होगा न ही आपने देखा और सुना होगा। आइए जानते है कि कैसे 17 वीं या 18 वीं सदी में लोग गर्भ निरोध के उपाय अपनाया करते थे।

1. नींबू
वर्ष 1700 के आस पास में गर्भ निरोध के लिए नींबू का इस्तेमाल किया जाता था, यह सोच कर कि नींबू में मौजूद एसिड शुक्राणु को खत्म कर देगा। माना जाता है कि महान प्रेमी कैसनोवा भी इस तरकीब को आज़माया करते थे। इस बात का मालूम इस बात से चलता है कि वे अपनी प्रेमिकाओं को सबसे पहले कॉकटेल बनाकर पिलाते थे। जिसमें वो नींबू का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते थे। हो सकता हो कि उस समय ये तरीका असरदार हो , लेकिन नींबू में मौजूद एसिड महिलाओं की प्रजनन प्रणली पर कहर बरसा सकता है।

2. आलू
गर्भवती होने से बचने के लिए 22 साल की कोलंबियाई लड़की ने आलू का इस्तेमाल किया। दो हफ्तों तक योनि में दबाकर रखे गए आलू से उसकी जडे निकल आई जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह तरीका मरीज़ की मां ने बताया था क्यों वह अपनी बेटी से सेक्स से जुड़ी बाते करने से कतराती थी।

3. कोको कोला
50 व 60 के दशक में गर्भ निरोध के रूप में कई महिलाओं ने कोको कोला का भी इस्तेमाल किया है। सुनने में यह तरीका काफी अटपटा लगता है। उस समय बने कानून और दबंग पतियों के दबाव के कारण महिलाएं विश्वसनीय जन्म निरोधक तरीका नहीं अपना पाती थी उन्होंने इस तरीके को चुनना बेहतर समझा। हांलाकि, बाद में हुए प्रयोगों से यह पता चला कि केवल डायट कोक में ही शुक्राणुनाशक प्रभाव था।

4 . जैतून का तेल
अरस्तू द्वारा लिखी गई किताब "हिस्टोरिया एनीमियम" के उल्लेख से पता चलता है कि उन्होंने कई बार जैतून के तेल को गर्भ गिराने के लिए इस्तेमाल किया था। किताब के उल्लेख से पता चलता है कि अगर जैतून के तेल को देवदार के तेल या सीसा या लोबान की मलहम के साथ मिलाकर गर्भ पर लगाया जाए तो गर्भ धारण रोका जा सकता है। हांलाकि या काफी अप्रभावी और खतरनाक था।

5. पपीता
कई एशियाई देशों में कच्चे पपीते का सेवन गर्भ अवस्था से बचने का एक हल था। कच्चे पपीते में मौजूद फाइटोकेमिकल्स गर्भ निरोध की प्रक्रिया में मदद करते हैं। जबकी पुरुष पपीते के बीजों को गर्भ निरोधक के रूप में इस्तेमाल किया करते थे। हर रोज पपीते के बीजों का सेवन करने से शुक्राणुओं की संख्या शून्य हो जाती थी - शुक्राणुओं की संख्या को वापस बढा़ने के लिए बीजों का सेवन बंद कर दिया जाता था।

6. सोने का डायाफ्राम
कई गर्भनिरोधक उपकरणों को सोने व चांदी से बनाया जाता था। माना जाता है कि इसमें कुछ तो कैसनोवो द्वारा आविष्कृत उपकरण भी शामिल हैं। ये सारे उपकरण व्यर्थ थे और कई उपकरणों से संक्रमण होने की भी संभावना थी।

7. पारा
प्राचीन चीन में, उपस्त्री को बांझ रखने के लिए उन्हें सीसा और पारा का मिश्रण पिलाया जाता था। जब अन्य प्राचीन संस्कृतियों ने पारा के वैज्ञानिक और चिकित्सा गुणों का अध्ययन किया, तब उन्हें पता चला कि यह मिश्रण काफी जहरीला था तथा यह व्यक्ति के अंगों और मस्तिष्क का नाश कर व्यक्ति की जान भी ले सकता है।

8. लोहे का पानी
दूसरी शताब्दी के ग्रीक डॉक्टर का विचार था कि गर्भ निरोध के रूप में महिलाओं को लोहे के उपकरणों को बनना में इस्तेमाल होने वाले पानी का सेवन करना चाहिए। क्योंकि यह पानी सीसा से युक्त था और सीसा से होने वालो नुकसानों को हम पहले ही बता चुके हैं।

9. कंडोम के रूप में कच्छुएंं का इस्तेमाल
कहा जाता है कि जापान के अमीर वर्ग के पुरुष कच्छुएं के कवच को कंडोम के रूप में इस्तेमाल किया करते थे। यह एक बेकार और दर्दनाक तरीका था। इस तरीके के माध्यम से वे अपनी नपुंसकता को छुपाने की कोशिश करते थे।

10. मगरमच्छ का मल
गर्भ निरोध के रूप में प्राचीन मिस्रियों ने विभिन्न प्रकार के तरीके आज़माएं। माना जाता है कि वे मगरमच्छ के मल से पेसेरी बनाते थे जिसका इस्तेमाल योनि में शुक्राणु के प्रवेश को रोकने के लिए किया जाता था। मगरमच्छ का मल आधुनिक शुक्राणुओं की तरह खार के गुणों से युक्त होता था। हो सकता है यह तरीका काम करता हो - परंतु आप इसे आज़माने ना जाएं।

11. रक्तपात
इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ के समय में यह एक आम चिकित्सा प्रथा थी, उस समय रक्तपात को गर्भ निरोध के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। उस समय की चिकित्सा परंपरा के अनुसार, संभोग के दौरान गर्मी से रक्त सफेद हो कर शुक्राणु बन जाते हैं। और जो व्यक्ति कामेच्छा नियंत्रण से बाहर हो जाता है उसे इस निरोध का सहारा लेना होता था। लेकिन यह तरीका असफल रहा।
Image Source



Click it and Unblock the Notifications